10 अगस्त 2026
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भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: आरा कोर्ट ने 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ जारी किए गैर-जमानती वारंट, 12 अगस्त तक पेशी का आदेश

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भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: आरा कोर्ट ने 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ जारी किए गैर-जमानती वारंट, 12 अगस्त तक पेशी का आदेश

सारांश

बिहार के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में आरा कोर्ट ने एसडीएम और एसडीपीओ समेत 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए हैं। 12 अगस्त तक पेशी न होने पर एसपी को खुद अदालत में हाजिर होना होगा — यह बिहार में पुलिस जवाबदेही की एक बड़ी न्यायिक परीक्षा है।

मुख्य बातें

भोजपुर सीजेएम अदालत ने 10 अगस्त 2026 को 11 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किए।
आरोपियों में जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीएम संजीत कुमार , तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा और शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार शामिल हैं।
अदालत ने पुलिस अधीक्षक को 12 अगस्त 2026 तक सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर पेश करने का निर्देश दिया।
एसटीएफ जवान अक्षय कुमार को इस मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
मामला 17 जून 2026 को बिलौटी गाँव में हुई मुठभेड़ से जुड़ा है, जिसमें भरत भूषण तिवारी को पाँच गोलियाँ लगीं और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।
राज्य सरकार ने मामले की जाँच के लिए न्यायिक आयोग का गठन किया है; भोजपुर पुलिस ने अदालती कार्रवाई की जानकारी होने से इनकार किया है।

बिहार के बहुचर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में आरा की अदालत ने 10 अगस्त 2026 को कड़ा रुख अपनाते हुए तत्कालीन एसडीएम और एसडीपीओ सहित 11 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। भोजपुर के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत ने पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर 12 अगस्त 2026 तक न्यायालय में पेश किया जाए। उल्लेखनीय है कि भोजपुर पुलिस ने इस कार्रवाई की जानकारी होने से इनकार किया है।

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 17 जून 2026 की सुबह शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गाँव में हुई पुलिस मुठभेड़ से जुड़ा है। बिलौटी निवासी काशीनाथ तिवारी के पुत्र भरत भूषण तिवारी को उस कार्रवाई के दौरान पाँच गोलियाँ लगने की बात सामने आई थी, जिसके बाद अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। परिजनों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि भरत भूषण ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उन्हें गोली मारी गई। घटना के बाद क्षेत्र में भारी विरोध प्रदर्शन हुआ था। राज्य सरकार ने बाद में निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया, जो पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रहा है।

किन अधिकारियों पर जारी हुए वारंट

अदालत की यह कार्रवाई शाहपुर थाना कांड संख्या 178/2026 से जुड़ी बताई जा रही है। जिन अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के खिलाफ वारंट जारी होने की बात कही जा रही है, उनमें जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीएम संजीत कुमार, तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, दारोगा अंकित आर्यन, हरिचंद्र कुमार, एएसआई रामाशंकर यादव, एसटीएफ के विकास कुमार, अक्षय कुमार और अन्य पुलिसकर्मी शामिल हैं। गौरतलब है कि एसटीएफ जवान अक्षय कुमार को इस मामले में पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।

अदालत में क्या माँगा गया

अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 73 के तहत गैर-जमानती वारंट जारी करने सहित जाँच की प्रगति से जुड़े कई बिंदुओं पर अदालत से निर्देश देने की माँग की थी। याचिका में जाँच शुरू होने की तारीख, आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए उठाए गए कदम, जारी नोटिसों का विवरण और जिन आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई उसके कारण जानने की माँग की गई। इसके अलावा भरत भूषण तिवारी के मोबाइल फोन से संबंधित जानकारी, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और गवाहों के बयान भी माँगे गए। अधिवक्ता का दावा है कि मृतक के मोबाइल में कथित तौर पर महत्वपूर्ण साक्ष्य मौजूद थे और पुलिस द्वारा मोबाइल अपने कब्जे में लिए जाने के बाद उसके बारे में भी जानकारी माँगी गई है।

अदालत का निर्देश और आगे की चेतावनी

अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह के अनुसार, अदालत ने उनकी सभी प्रमुख प्रार्थनाओं को स्वीकार कर लिया है और पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि 12 अगस्त 2026 तक सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर पेश किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि यदि निर्धारित समय तक गिरफ्तारी नहीं होती, तो पुलिस अधीक्षक को स्वयं उस दिन अदालत में उपस्थित होकर जवाब देना होगा। गैर-जमानती वारंट जारी करने की माँग के समर्थन में सर्वोच्च न्यायालय के कई मामलों का हवाला दिए जाने की बात भी कही गई है। यह मामला अब राज्य में पुलिस जवाबदेही की बड़ी बहस का केंद्र बन गया है, और न्यायिक आयोग की रिपोर्ट का इंतजार बना हुआ है।

संपादकीय दृष्टिकोण

खुद एक गंभीर सवाल खड़ा करता है। राज्य सरकार ने न्यायिक आयोग तो बना दिया, लेकिन जब तक इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य — मृतक का मोबाइल, सीसीटीवी फुटेज — सुरक्षित और पारदर्शी रूप से अदालत के सामने नहीं आते, न्याय की माँग अधूरी रहेगी। 12 अगस्त की तारीख बिहार में पुलिस जवाबदेही की एक वास्तविक कसौटी बनने वाली है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला क्या है?
यह मामला 17 जून 2026 को बिहार के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गाँव में हुई पुलिस मुठभेड़ से जुड़ा है, जिसमें भरत भूषण तिवारी को पाँच गोलियाँ लगीं और बाद में अस्पताल में उनकी मृत्यु हो गई। परिजनों का आरोप है कि भरत भूषण ने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद उन्हें गोली मारी गई।
आरा कोर्ट ने किन-किन अधिकारियों के खिलाफ वारंट जारी किए हैं?
अदालत ने जगदीशपुर के तत्कालीन एसडीएम संजीत कुमार, तत्कालीन एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार, दारोगा अंकित आर्यन, हरिचंद्र कुमार, एएसआई रामाशंकर यादव और एसटीएफ के विकास कुमार व अक्षय कुमार सहित कुल 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किए हैं।
अदालत ने गिरफ्तारी की क्या समय-सीमा तय की है?
भोजपुर सीजेएम की अदालत ने पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया है कि सभी आरोपियों को 12 अगस्त 2026 तक गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया जाए। यदि ऐसा नहीं होता, तो पुलिस अधीक्षक को स्वयं उस दिन अदालत में उपस्थित होकर जवाब देना होगा।
इस मामले में अदालत से क्या-क्या माँगा गया था?
अधिवक्ता संजीव कुमार सिंह ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 73 के तहत गैर-जमानती वारंट के साथ-साथ मृतक के मोबाइल फोन, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और गवाहों के बयानों का विवरण माँगा था। यह भी पूछा गया कि क्या किसी आरोपी ने जानबूझकर गिरफ्तारी से बचने का प्रयास किया।
राज्य सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
बिहार सरकार ने मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जाँच के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया है, जो पूरे घटनाक्रम की पड़ताल कर रहा है। इसके अलावा एसटीएफ जवान अक्षय कुमार को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है।
राष्ट्र प्रेस
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