28 जून 2026
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भरत तिवारी एनकाउंटर: पूर्व डीजीपी अभयानंद ने SDM की मौजूदगी पर उठाए गंभीर सवाल

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भरत तिवारी एनकाउंटर: पूर्व डीजीपी अभयानंद ने SDM की मौजूदगी पर उठाए गंभीर सवाल

सारांश

भरत तिवारी एनकाउंटर पर पूर्व डीजीपी अभयानंद का बड़ा सवाल — एक व्यक्ति को पकड़ने गई पुलिस के साथ SDM क्यों था? साजिश की संभावना से इनकार नहीं, और असली मुद्दा गोलियों की संख्या नहीं बल्कि फायरिंग की दूरी है।

मुख्य बातें

पूर्व डीजीपी अभयानंद ने 28 जून 2026 को भरत तिवारी एनकाउंटर में SDM की मौजूदगी को असामान्य और समझ से परे बताया।
उन्होंने कहा कि क्राइम रेड या एनकाउंटर में SDM की तैनाती का कोई प्रावधान नहीं; मजिस्ट्रेट केवल DM और SP के संयुक्त आदेश पर तैनात होते हैं।
अभयानंद ने कहा — साजिश की संभावना से इनकार नहीं ; निष्पक्ष जाँच से ही सच्चाई सामने आएगी।
पूर्व डीजीपी के अनुसार पोस्टमार्टम में गोलियों की संख्या नहीं, फायरिंग की दूरी सबसे अहम तथ्य है।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा धमकाया जा रहा है ; पुलिस ने आरोप नकारा।

बिहार के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पूर्व डीजीपी अभयानंद ने 28 जून 2026 को पटना में बिहार पुलिस की कार्यशैली पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस मामले में एसडीएम (SDM) की मौजूदगी उनकी समझ से परे है और इसे नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भरत तिवारी को कितनी गोलियाँ लगीं, यह उतना अहम नहीं जितना यह जानना कि फायरिंग किस दूरी से की गई

पुलिस एक्शन में SDM की मौजूदगी क्यों असामान्य है

पूर्व डीजीपी अभयानंद ने बताया कि पुलिस कार्रवाई दो प्रकार की होती है — एक जब भीड़ नियंत्रण या कानून-व्यवस्था की स्थिति हो, और दूसरी जब किसी व्यक्ति विशेष को पकड़ने जाना हो। उन्होंने कहा, 'इस केस में एक व्यक्ति को पकड़ने पुलिस गई थी। मुझे समझ नहीं आ रहा कि एसडीएम वहाँ क्या कर रहे थे। यह मजमा वाला मामला नहीं था।'

उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि जब भी किसी मजिस्ट्रेट को तैनात किया जाता है, तो डीएम और एसपी मिलकर संयुक्त आदेश (Joint Order) जारी करते हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं पता कि इस मामले में ऐसा कोई आदेश जारी हुआ था या नहीं।

SDM और क्राइम ऑपरेशन का कोई संबंध नहीं: अभयानंद

अपने दीर्घ अनुभव के आधार पर पूर्व डीजीपी ने कहा कि एसडीएम का क्राइम या रेड से कोई संबंध नहीं होता। उन्होंने कहा, 'हमने कभी नहीं देखा कि क्राइम या रेड के दौरान डीएम या एसडीएम साथ गए हों। कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए कभी-कभी डीएम रहते हैं, लेकिन यहाँ तो अलग मामला था।'

साजिश की संभावना से इनकार नहीं

अभयानंद ने इस पूरे प्रकरण पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि 'यह मामला मेरे दिमाग में परेशानी पैदा कर रहा है। साजिश हो सकती है — इससे इनकार नहीं किया जा सकता।' उन्होंने यह भी कहा कि यदि जाँच टीम ठीक ढंग से जाँच करे तो सच्चाई जरूर सामने आएगी।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के संदर्भ में उन्होंने कहा कि उन्होंने रिपोर्ट नहीं देखी है, लेकिन गोली तीन लगी या पाँच, यह महत्वपूर्ण नहीं है — सबसे ज़रूरी यह है कि कितनी दूरी से गोली चलाई गई।

विपक्ष और पीड़ित परिवार के आरोप

भरत तिवारी के एनकाउंटर के बाद विपक्षी दलों और कई सामाजिक संगठनों ने बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा धमकाया जा रहा है, हालाँकि पुलिस ने इस आरोप को सिरे से नकारते हुए कहा है कि परिवार के किसी सदस्य को धमकाए जाने की बात गलत है।

आगे क्या होगा

सभी पक्षों की निगाहें अब जाँच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यह मामला बिहार में पुलिस एनकाउंटर की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर व्यापक बहस का केंद्र बन गया है। जाँच के नतीजे न केवल इस मामले की दिशा तय करेंगे, बल्कि राज्य में पुलिस-प्रशासन समन्वय पर भी सवाल खड़े करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि वे वहाँ किसके निर्देश पर थे। बिहार में पिछले कुछ वर्षों में एनकाउंटर की पारदर्शिता को लेकर बार-बार सवाल उठे हैं, और इस मामले में फायरिंग की दूरी जैसे तकनीकी पहलुओं की अनदेखी जाँच की विश्वसनीयता पर ही सवालिया निशान लगाती है। पीड़ित परिवार के धमकी के आरोप और पुलिस के खंडन के बीच, स्वतंत्र न्यायिक जाँच ही इस विवाद का एकमात्र विश्वसनीय समाधान है।
RashtraPress
28 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरत तिवारी एनकाउंटर में SDM की मौजूदगी पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
पूर्व डीजीपी अभयानंद के अनुसार, SDM की तैनाती केवल भीड़ नियंत्रण या कानून-व्यवस्था की स्थितियों में होती है, न कि किसी एक व्यक्ति को पकड़ने के अभियान में। उनका कहना है कि इस मामले में SDM की उपस्थिति प्रशासनिक प्रोटोकॉल से मेल नहीं खाती।
पूर्व डीजीपी अभयानंद ने फायरिंग की दूरी को अहम क्यों बताया?
अभयानंद के अनुसार, एनकाउंटर की वैधता परखने के लिए यह जानना ज़रूरी है कि गोली किस दूरी से चलाई गई — यह तथ्य बताता है कि पुलिस को वास्तव में खतरा था या नहीं। उनके मुताबिक गोलियों की संख्या से ज़्यादा यह तकनीकी पहलू महत्वपूर्ण है।
क्या भरत तिवारी एनकाउंटर में साजिश की संभावना है?
पूर्व डीजीपी अभयानंद ने कहा है कि साजिश की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जाँच टीम निष्पक्ष और सही तरीके से जाँच करे, तो सच्चाई सामने आएगी।
पीड़ित परिवार ने पुलिस पर क्या आरोप लगाए हैं?
पीड़ित परिवार का आरोप है कि उन्हें वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा धमकाया जा रहा है। हालाँकि बिहार पुलिस ने इस आरोप को पूरी तरह नकारते हुए कहा है कि परिवार के किसी सदस्य को धमकाए जाने की बात गलत है।
भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में आगे क्या होगा?
मामले की जाँच जारी है और सभी पक्षों को जाँच रिपोर्ट का इंतज़ार है। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने निष्पक्ष जाँच की माँग की है, जबकि पूर्व डीजीपी ने संयुक्त आदेश और फायरिंग की दूरी जैसे तथ्यों की जाँच को अनिवार्य बताया है।
राष्ट्र प्रेस
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