भोजपुर एनकाउंटर: पोस्टमार्टम में 5 गोलियाँ, पुलिस का 3 का दावा झूठा; अजय राय ने परिवार से की मुलाकात
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के भोजपुर जिले में भरत तिवारी एनकाउंटर मामला गंभीर मोड़ पर आ गया है। 27 जून 2026 को सामने आई पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने पुलिस के उस दावे को चुनौती दी है जिसमें कहा गया था कि मृतक को केवल तीन गोलियाँ मारी गई थीं — रिपोर्ट के अनुसार शव पर पाँच गोलियों के निशान पाए गए हैं। इस खुलासे के बाद परिवार, स्थानीय जनता और विपक्षी दलों का आक्रोश और बढ़ गया है।
अजय राय की परिवार से मुलाकात
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय भरत तिवारी के घर पहुँचे और उनके माता-पिता से मुलाकात की। राय ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, 'मैंने भरत तिवारी की माँ और पिता से मुलाकात की। वे बेसुध हैं, लेकिन मैंने कहा कि उन्होंने एक शेर को जन्मा है। मैंने उन्हें आश्वासन दिया है कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी का एक-एक सिपाही उनके साथ खड़ा है।'
राय ने आगे कहा, 'अगर दोषी पुलिसकर्मियों को जेल नहीं भेजा गया, उनके खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज नहीं हुआ और उन्हें फाँसी की सजा नहीं मिली — तो कांग्रेस पार्टी सदन से लेकर सड़क तक लड़ेगी।'
पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस के दावे पर सवाल
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पाँच गोलियाँ पाए जाने की पुष्टि के बाद अजय राय ने माँग की कि घटना में शामिल पुलिसकर्मियों की तत्काल गिरफ्तारी हो और फास्टट्रैक अदालत में सुनवाई करके कठोरतम सजा दी जाए। उन्होंने कहा, 'पुलिस तीन गोली का दावा कर रही थी, लेकिन रिपोर्ट ने झूठ उजागर कर दिया है।'
राय ने भाजपा शासित राज्यों पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि 'जहाँ-जहाँ भाजपा की सरकार है, वहाँ चुन-चुनकर ब्राह्मण समाज के लोगों को निशाना बनाया जा रहा है — चाहे यूपी में विनोद उपाध्याय का मामला हो या बिहार में भरत तिवारी की घटना।' उन्होंने इसे 'सुशासन नहीं, बल्कि कुशासन' करार दिया।
परिवार की गवाही
भरत तिवारी के भाई चंदन तिवारी ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट की पुष्टि करते हुए कहा, 'मैं और पूरी जनता पहले से कह रही थी कि भरत तिवारी को पाँच गोली मारी गई है, वही अब रिपोर्ट में सामने आया है। पुलिस वाले झूठ बोल रहे थे। हमारी माँग है कि दोषियों को फाँसी दी जाए।'
न्याय समिति की माँग और प्रत्यक्षदर्शियों का बयान
'भरत तिवारी न्याय समिति' के संयोजक पंकज त्रिपाठी ने कहा कि स्थानीय लोगों ने केवल तीन गोलियों की आवाज़ सुनी थी, जबकि शव पर पाँच गोलियाँ मिली हैं। उनके अनुसार, 'तीन गोलियाँ एक जगह मारी गईं जिनकी आवाज़ ग्रामीणों ने सुनी, और बाद में दो गोलियाँ और मारी गईं जिनकी आवाज़ किसी ने नहीं सुनी।' त्रिपाठी ने कहा कि यह गवाहों के बयानों और रिपोर्ट का मेल इस बात की ओर इशारा करता है कि एनकाउंटर की परिस्थितियाँ संदिग्ध हैं।
यह मामला ऐसे समय में और तीखा हो गया है जब बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर विपक्ष पहले से ही सरकार पर दबाव बना रहा है। गौरतलब है कि एनकाउंटर में गोलियों की संख्या को लेकर पुलिस और परिवार के बीच का यह विरोधाभास न्यायिक जाँच की माँग को और बल दे रहा है।