6 अगस्त 2026
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भोजपुर कथित एनकाउंटर: JDU नेता संजय कुमार झा ने उठाए सवाल, 4 पुलिसकर्मी निलंबित, जांच की मांग

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भोजपुर कथित एनकाउंटर: JDU नेता संजय कुमार झा ने उठाए सवाल, 4 पुलिसकर्मी निलंबित, जांच की मांग

सारांश

भोजपुर में कथित पुलिस मुठभेड़ में युवक की मौत अब केवल विपक्ष का मुद्दा नहीं रही — सत्तारूढ़ JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने खुद वीडियो को 'संदेहजनक' बताया और समयबद्ध जांच की मांग की। चार पुलिसकर्मी निलंबित, लेकिन सवाल बरकरार।

मुख्य बातें

भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में कथित पुलिस मुठभेड़ में युवक भरत भूषण तिवारी की मौत हुई।
JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने घटना का वीडियो 'संदेहजनक' बताया और वरिष्ठ अधिकारी से समयबद्ध जांच की मांग की।
बिहार के मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी स्वतंत्र जांच का आश्वासन दिया।
राज्य सरकार ने 4 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया, लेकिन JDU नेता ने इसे 'पर्याप्त नहीं' बताया।
ग्रामीणों का आरोप — मृतक पर कोई पूर्व आपराधिक मामला नहीं था और उसने आत्मसमर्पण कर दिया था।
एफआईआर में मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपी बनाया गया।

बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में कथित पुलिस मुठभेड़ में युवक भरत भूषण तिवारी की मौत ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर से ही इस एनकाउंटर पर सवाल उठने लगे हैं और जांच की मांग जोर पकड़ रही है। राज्य सरकार ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।

सत्ता पक्ष ने ही उठाए सवाल

जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने शनिवार को कहा कि इस घटना से जुड़ा जो वीडियो सामने आया है, वह निश्चित रूप से संदेह पैदा करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चार पुलिसकर्मियों का निलंबन पर्याप्त नहीं है और इस मामले में किसी वरिष्ठ अधिकारी से समयबद्ध जांच कराई जानी चाहिए।

झा ने अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जब सरकार यह घोषणा करती है कि कोई भी अपराधी नहीं बचेगा, तो यह सिद्धांत पुलिस पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए — यदि पुलिस ने कोई अपराध किया है, तो उसे भी बचने का अवसर नहीं मिलना चाहिए।

मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी मांगी जांच

कैमूर में बिहार के मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मृतक मानसिक रूप से विक्षिप्त था और उसने अंत में अपना हथियार भी फेंक दिया था, तो यह जांच का विषय है कि पुलिसकर्मियों ने किन परिस्थितियों में गोली चलाई। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच अवश्य कराई जाएगी।

पुलिस का पक्ष और घटनाक्रम

पुलिस के अनुसार, बुधवार को युवक भरत भूषण तिवारी ने पहले फायरिंग शुरू की, जिसके जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई। गोली लगने के बाद गंभीर रूप से घायल युवक को पहले आरा सदर अस्पताल पहुंचाया गया और फिर बेहतर उपचार के लिए पटना के पीएमसीएच रेफर किया गया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।

ग्रामीणों का आक्रोश और प्रदर्शन

गुरुवार को क्षेत्र के ग्रामीण सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने शव को सड़क पर रखकर विरोध दर्ज कराया। आक्रोशित ग्रामीणों का आरोप है कि मृतक भरत भूषण तिवारी पर पहले से कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था और उसने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने गोली मारी।

एफआईआर और आगे की कार्रवाई

पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े अलग-अलग मामलों में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर कार्रवाई तेज कर दी है। दर्ज एफआईआर में मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपी बनाया गया है। यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर दबाव का केंद्र बन गया है, और आने वाले दिनों में जांच की दिशा तय करेगी कि इस एनकाउंटर को न्यायसंगत माना जाएगा या नहीं।

संपादकीय दृष्टिकोण

सरकार के कानून-व्यवस्था के दावों के लिए आत्म-आलोचना है। मृतक पर कोई पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड न होने और 'आत्मसमर्पण के बाद गोली' के ग्रामीण आरोप को देखते हुए, मात्र निलंबन से जनाक्रोश शांत होने की संभावना नहीं है। असली परीक्षा यह है कि जांच किसी वरिष्ठ स्वतंत्र अधिकारी द्वारा होती है या इसे नौकरशाही की धीमी प्रक्रिया में दफन कर दिया जाता है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भोजपुर कथित एनकाउंटर में क्या हुआ?
बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ में युवक भरत भूषण तिवारी को गोली लगी। पुलिस के अनुसार युवक ने पहले फायरिंग की, जिसके जवाब में गोली चलाई गई। आरा सदर अस्पताल और फिर पटना पीएमसीएच में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
JDU के संजय कुमार झा ने इस एनकाउंटर पर क्या कहा?
JDU के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि घटना का वीडियो संदेह पैदा करता है और चार पुलिसकर्मियों का निलंबन पर्याप्त नहीं है। उन्होंने किसी वरिष्ठ अधिकारी द्वारा समयबद्ध जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।
ग्रामीणों का क्या आरोप है?
ग्रामीणों का कहना है कि मृतक भरत भूषण तिवारी पर पहले से कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था और उसने आत्मसमर्पण कर दिया था। इसके बावजूद पुलिस ने गोली मारी। गुरुवार को ग्रामीणों ने शव को सड़क पर रखकर विरोध प्रदर्शन किया।
इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
राज्य सरकार ने चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है। पुलिस ने घटनाक्रम से जुड़े अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज की है, जिसमें मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपी बनाया गया है।
बिहार के मंत्री मिथिलेश तिवारी ने क्या कहा?
कैमूर में मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि यदि मृतक विक्षिप्त था और उसने हथियार फेंक दिया था, तो पुलिस ने किन परिस्थितियों में गोली चलाई, इसकी जांच होनी चाहिए और कराई भी जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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