भोजपुर कथित एनकाउंटर: JDU नेता संजय कुमार झा ने उठाए सवाल, 4 पुलिसकर्मी निलंबित, जांच की मांग
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र में कथित पुलिस मुठभेड़ में युवक भरत भूषण तिवारी की मौत ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर से ही इस एनकाउंटर पर सवाल उठने लगे हैं और जांच की मांग जोर पकड़ रही है। राज्य सरकार ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।
सत्ता पक्ष ने ही उठाए सवाल
जनता दल (यूनाइटेड) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने शनिवार को कहा कि इस घटना से जुड़ा जो वीडियो सामने आया है, वह निश्चित रूप से संदेह पैदा करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चार पुलिसकर्मियों का निलंबन पर्याप्त नहीं है और इस मामले में किसी वरिष्ठ अधिकारी से समयबद्ध जांच कराई जानी चाहिए।
झा ने अपनी ही सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि जब सरकार यह घोषणा करती है कि कोई भी अपराधी नहीं बचेगा, तो यह सिद्धांत पुलिस पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए — यदि पुलिस ने कोई अपराध किया है, तो उसे भी बचने का अवसर नहीं मिलना चाहिए।
मंत्री मिथिलेश तिवारी ने भी मांगी जांच
कैमूर में बिहार के मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि मृतक मानसिक रूप से विक्षिप्त था और उसने अंत में अपना हथियार भी फेंक दिया था, तो यह जांच का विषय है कि पुलिसकर्मियों ने किन परिस्थितियों में गोली चलाई। उन्होंने आश्वासन दिया कि जांच अवश्य कराई जाएगी।
पुलिस का पक्ष और घटनाक्रम
पुलिस के अनुसार, बुधवार को युवक भरत भूषण तिवारी ने पहले फायरिंग शुरू की, जिसके जवाब में पुलिस ने भी गोली चलाई। गोली लगने के बाद गंभीर रूप से घायल युवक को पहले आरा सदर अस्पताल पहुंचाया गया और फिर बेहतर उपचार के लिए पटना के पीएमसीएच रेफर किया गया, जहाँ इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
ग्रामीणों का आक्रोश और प्रदर्शन
गुरुवार को क्षेत्र के ग्रामीण सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने शव को सड़क पर रखकर विरोध दर्ज कराया। आक्रोशित ग्रामीणों का आरोप है कि मृतक भरत भूषण तिवारी पर पहले से कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था और उसने आत्मसमर्पण कर दिया था, इसके बावजूद पुलिस ने गोली मारी।
एफआईआर और आगे की कार्रवाई
पुलिस ने इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े अलग-अलग मामलों में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर कार्रवाई तेज कर दी है। दर्ज एफआईआर में मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को भी आरोपी बनाया गया है। यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर दबाव का केंद्र बन गया है, और आने वाले दिनों में जांच की दिशा तय करेगी कि इस एनकाउंटर को न्यायसंगत माना जाएगा या नहीं।