10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, CBI जांच और स्वतंत्र समिति की मांग

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर: सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार, CBI जांच और स्वतंत्र समिति की मांग

सारांश

बिहार के भोजपुर में हुए कथित फर्जी एनकाउंटर का मामला अब सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा, लेकिन तत्काल सुनवाई नहीं मिली। CBI जांच और सेवानिवृत्त जज की निगरानी की मांग के बीच राज्य सरकार ने खुद न्यायिक जांच के आदेश दिए और चार पुलिसकर्मी निलंबित किए।

मुख्य बातें

सर्वोच्च न्यायालय ने 22 जून 2026 को भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार किया; याचिकाकर्ता को रजिस्ट्रार के पास भेजा।
अधिवक्ता विशाल तिवारी की याचिका में CBI जांच और सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र समिति की मांग।
घटना बिहार के भोजपुर जिले के बिलौती गांव में हुई; पुलिस ने दावा किया तिवारी ने पहले गोली चलाई।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जांच के आदेश दिए।
बिहार पुलिस ने एक थाना प्रभारी समेत 4 पुलिसकर्मियों को निलंबित किया, कथित वीडियो सामने आने के बाद।

सर्वोच्च न्यायालय ने 22 जून 2026 को भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में दायर याचिका पर त्वरित सुनवाई की तारीख निर्धारित करने से इनकार कर दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि वे रजिस्ट्रार के समक्ष उल्लेख करें, जिसके पश्चात आगे की प्रक्रिया तय होगी। यह मामला बिहार के भोजपुर जिले में हुई कथित पुलिस मुठभेड़ से जुड़ा है, जिसमें तिवारी की मृत्यु हो गई थी।

याचिका में क्या मांगें हैं

यह याचिका सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि भोजपुर जिले में हुई पुलिस मुठभेड़ में भरत भूषण तिवारी की मृत्यु एक 'न्यायेतर हत्या' हो सकती है। याचिकाकर्ता ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए और सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित की जाए। इसके अतिरिक्त, एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने की भी मांग की गई है।

घटनाक्रम: क्या हुआ बिलौती गांव में

घटना बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौती गांव में बुधवार को हुई बताई जा रही है। पुलिस का दावा है कि अभियान के दौरान भरत भूषण तिवारी ने पुलिस दल पर गोली चलाई, जिसके बाद आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई की गई। इस गोलीबारी में तिवारी गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें पटना मेडिकल कॉलेज ले जाने के दौरान रास्ते में उनकी मृत्यु हो गई। गौरतलब है कि पुलिस के इस दावे को ही याचिका में चुनौती दी गई है।

बिहार सरकार की प्रतिक्रिया

बिहार सरकार ने मामले की न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए जानकारी दी कि बिलौती गांव में हुई मुठभेड़ की जांच पटना उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाएगी। सरकार का कहना है कि इस प्रक्रिया से पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और पारदर्शी समीक्षा सुनिश्चित होगी।

प्रशासनिक कार्रवाई: चार पुलिसकर्मी निलंबित

इस बीच बिहार पुलिस ने एक थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई एक कथित वीडियो सामने आने के बाद की गई, जिसमें एक हथियारबंद व्यक्ति पुलिस बल की ओर पिस्तौल ताने हुए दिखाई देता है और पुलिसकर्मियों पर समय पर प्रतिक्रिया न देने के आरोप लगाए गए हैं। यह निलंबन स्वयं पुलिस की आंतरिक जवाबदेही की ओर इशारा करता है।

आगे क्या होगा

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद याचिकाकर्ता को अब रजिस्ट्रार के समक्ष मामले का उल्लेख करना होगा, जिसके बाद सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। एक ओर जहाँ राज्य सरकार की न्यायिक जांच प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, वहीं CBI जांच की मांग पर सर्वोच्च न्यायालय का अंतिम निर्णय इस मामले की दिशा तय करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि गुण-दोष पर निर्णय — लेकिन इससे पीड़ित परिवार को न्याय मिलने में विलंब होगा। असली परीक्षा यह है कि राज्य-स्तरीय न्यायिक जांच CBI की स्वतंत्रता का विकल्प बन सकती है या नहीं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामला क्या है?
यह बिहार के भोजपुर जिले के बिलौती गांव में हुई एक पुलिस मुठभेड़ का मामला है, जिसमें भरत भूषण तिवारी की मृत्यु हो गई। पुलिस का दावा है कि तिवारी ने पहले गोली चलाई, जबकि याचिकाकर्ता इसे कथित 'न्यायेतर हत्या' बता रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई से इनकार क्यों किया?
सर्वोच्च न्यायालय ने याचिका पर त्वरित सुनवाई की तारीख देने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता को रजिस्ट्रार के समक्ष उल्लेख करने का निर्देश दिया। यह प्रक्रियागत कदम है, जिसके बाद ही सुनवाई की तारीख निर्धारित होगी।
याचिका में क्या मांगें की गई हैं?
अधिवक्ता विशाल तिवारी द्वारा दायर याचिका में CBI जांच, सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठन और एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के विरुद्ध FIR दर्ज करने की मांग की गई है।
बिहार सरकार ने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में न्यायिक जांच के आदेश दिए हैं। इसके अलावा बिहार पुलिस ने एक थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है।
चार पुलिसकर्मियों को निलंबित क्यों किया गया?
एक कथित वीडियो सामने आने के बाद यह कार्रवाई की गई, जिसमें एक हथियारबंद व्यक्ति पुलिस बल की ओर पिस्तौल ताने हुए दिखाई देता है और पुलिसकर्मियों पर समय पर प्रतिक्रिया न देने के आरोप लगाए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले