भरत तिवारी एनकाउंटर: जगदीशपुर एसडीएम संजीत कुमार पटना मुख्यालय अटैच, न्यायिक जांच जारी
सारांश
मुख्य बातें
बिहार के भोजपुर जिले में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में राज्य सरकार ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई करते हुए जगदीशपुर के उपविभागीय दंडाधिकारी (एसडीएम) संजीत कुमार को उनके पद से हटाकर पटना मुख्यालय से अटैच कर दिया है। 24 जुलाई को की गई यह कार्रवाई मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सीधे निर्देश पर हुई है, जबकि मामले की न्यायिक जांच समानांतर रूप से जारी है।
मुख्य प्रशासनिक कार्रवाई
सरकारी सूत्रों के अनुसार, एनकाउंटर मामले की चल रही जांच के बीच एसडीएम संजीत कुमार को पद से हटाने का निर्णय लिया गया। हालांकि, इस कदम के पीछे के विस्तृत कारण आधिकारिक तौर पर सामने नहीं आए हैं। प्रशासनिक हलकों में इसे जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
न्यायिक जांच आयोग का गठन
राज्य सरकार ने इस मामले की गहन जांच के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में एक न्यायिक जांच आयोग का गठन किया है। आयोग विभिन्न पक्षों और गवाहों के बयान दर्ज कर रहा है। हाल ही में मृतक भरत भूषण तिवारी के माता-पिता ने आयोग के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया। परिवार ने घटना को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए हैं और मामले में शामिल पुलिसकर्मियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की है।
सर्वोच्च न्यायालय का रुख
इस मामले में दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने सीधे हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ताओं को पहले पटना उच्च न्यायालय का रुख करने की सलाह दी। याचिकाओं में कथित फर्जी एनकाउंटर की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच, सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में जांच और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की माँग की गई थी।
परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं की चिंताएँ
सामाजिक कार्यकर्ताओं और मृतक के परिवार की ओर से सुरक्षा संबंधी गंभीर चिंताएँ जताई गई हैं। परिवार का आरोप है कि वे दबाव और भय के माहौल में जी रहे हैं। परिवार ने मामले की निष्पक्ष जांच और न्याय की माँग को लेकर अपना संघर्ष जारी रखा है।
आगे क्या होगा
यह मामला बिहार की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें जस्टिस विनोद कुमार सिन्हा की अध्यक्षता वाले न्यायिक जांच आयोग की अंतिम रिपोर्ट और उसके आधार पर सरकार द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदमों पर टिकी हैं।