भरत तिवारी एनकाउंटर: जदयू नेता राजीव रंजन का कड़ा बयान — दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा
सारांश
मुख्य बातें
जनता दल (यूनाइटेड) के नेता राजीव रंजन प्रसाद ने 24 जून 2026 को पटना में भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर स्पष्ट रुख अपनाते हुए कहा कि राज्य सरकार इस घटना में हुई किसी भी चूक को लेकर पूरी तरह दृढ़ है और दोषियों के विरुद्ध बिना किसी रियायत के कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी कहा कि मामला न्यायिक जांच समिति को सौंपा जा चुका है और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।
एनकाउंटर मामले में सरकार का रुख
राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सवाल उठने के बाद बिहार सरकार ने इस मामले को न्यायिक जांच समिति को सौंप दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस किसी की भी इस घटना में गलती साबित होगी, उसके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष इस एनकाउंटर को लेकर राज्य सरकार पर लगातार दबाव बना रहा है।
राजद के आरोपों पर पलटवार
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की ओर से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार और उप-मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर लगाए गए आरोपों को राजीव रंजन प्रसाद ने सिरे से खारिज किया। उन्होंने कहा कि राजद पहले नीतीश कुमार के बारे में इसी तरह के बयान देता था और अब सम्राट चौधरी को निशाना बना रहा है — यह उनकी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा मात्र है। प्रसाद के अनुसार, बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहतर है और अपराधियों के विरुद्ध पुलिस ने हर मामले में कठोर कार्रवाई की है।
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार की कार्यशैली पर टिप्पणी
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के कामकाज की सराहना करते हुए राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि वे नैतिक मूल्यों के प्रति बेहद सजग हैं। उनकी कार्यशैली बिहार की राजनीति में उन्हें अन्य नेताओं से अलग पहचान दिलाती है।
टीएमसी विभाजन पर जदयू का दृष्टिकोण
तृणमूल कांग्रेस (TMC) में विभाजन के बाद ऋतब्रत बनर्जी की ओर से 'असली टीएमसी' होने के दावे पर राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि विधायक दल में टूट हो चुकी है और संसदीय दल के दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को मूल पार्टी से बाहर किए जाने के बाद यह स्पष्ट है कि पार्टी और उसका चुनाव चिह्न अब उनके पास नहीं रहा।
प्रसाद ने आगे कहा कि मूल पार्टी पर अब काकोली घोष और ऋतब्रत बनर्जी जैसे नेताओं का नियंत्रण है और उनके बयान ही आधिकारिक टीएमसी की आवाज़ हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद चुनाव आयोग के समक्ष और गहरा होने की संभावना है।