24 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

जम्मू-कश्मीर विधानसभा: छात्र-शिक्षक अनुपात सुधार, 12.89 लाख किसानों को फसल बीमा और 17 क्रिटिकल केयर ब्लॉक की घोषणा

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
जम्मू-कश्मीर विधानसभा: छात्र-शिक्षक अनुपात सुधार, 12.89 लाख किसानों को फसल बीमा और 17 क्रिटिकल केयर ब्लॉक की घोषणा

सारांश

जम्मू-कश्मीर विधानसभा के पतझड़ सत्र में 24 सितंबर को एक साथ चार बड़े क्षेत्रों — शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और परिवहन — में सरकार की कार्य-योजना सामने आई। 12.89 लाख किसान PMFBY के दायरे में, 17 क्रिटिकल केयर ब्लॉक और 630 एम्बुलेंस का लक्ष्य — यह सत्र महज सवाल-जवाब नहीं, नीतिगत इरादे की झलक था।

मुख्य बातें

शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने बताया कि उरी के 375 सरकारी स्कूलों में से केवल 10 में PTR 40 से अधिक है; रैशनलाइजेशन और ATD-2026 से समाधान किया जा रहा है।
22 लैब असिस्टेंट शिक्षक पद पर पदोन्नत, जिनमें से 8 उरी क्षेत्र में तैनात; 5 मास्टर्स का ट्रांसफर भी हुआ।
PMFBY अब जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों में लागू; 12,89,917 किसान लाभान्वित, ₹221.71 करोड़ के 3,72,134 क्लेम दर्ज।
बागवानी सेक्टर 35 लाख लोगों की आजीविका का आधार, जीडीपी में ~10% योगदान, सालाना ₹12,000 करोड़ अनुमानित आय।
PM-ABHIM के तहत पूरे जम्मू-कश्मीर में 17 क्रिटिकल केयर ब्लॉक स्थापित; एम्बुलेंस संख्या 530 से बढ़कर 630 होगी।
सोनावारी में ₹116 करोड़ की 7 DPR तैयार; वित्त वर्ष 2027-28 की सूची में शामिल।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा के पतझड़ सत्र (ऑटम सेशन) 2026 के दौरान 24 सितंबर को प्रश्नकाल में शिक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और परिवहन — चार अहम क्षेत्रों में सरकार की नीतियों और योजनाओं का विस्तृत ब्यौरा सामने आया। शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री सकीना इट्टू, कृषि उत्पादन मंत्री जावेद डार और परिवहन मंत्री सतीश शर्मा ने विभिन्न विधायकों के सवालों का जवाब देते हुए केंद्र शासित प्रदेश में चल रही सुधार प्रक्रियाओं का ब्यौरा दिया।

शिक्षा: रैशनलाइजेशन से सुधरेगा छात्र-शिक्षक अनुपात

शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने उरी के विधायक सज्जाद शफी के सवाल के जवाब में बताया कि पूरे केंद्र शासित प्रदेश में 'रैशनलाइजेशन' प्रक्रिया के ज़रिए कम स्टाफ वाले स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षक तैनात किए जा रहे हैं, ताकि छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) को संतुलित किया जा सके।

उन्होंने बताया कि उरी विधानसभा क्षेत्र के 375 सरकारी स्कूलों में से केवल 10 स्कूलों में PTR 40 से अधिक है। इन स्कूलों में शिक्षण संसाधनों के बेहतर उपयोग और रैशनलाइजेशन के ज़रिए स्थिति सुधारने के कदम उठाए जा रहे हैं।

मंत्री ने सदन को बताया कि सालाना ट्रांसफर ड्राइव (ATD)-2026 के तहत योग्य शिक्षकों से आवेदन पहले ही मंगाए जा चुके हैं और इन आवेदनों पर विचार करते समय उन स्कूलों को प्राथमिकता दी जाएगी जहाँ PTR अधिक है। इसके अलावा, हाल ही में 22 लैब असिस्टेंट को शिक्षक पद पर पदोन्नत किया गया है, जिनमें से 8 को उरी क्षेत्र में तैनात किया गया है। उरी में 5 मास्टर्स का ट्रांसफर भी उन स्कूलों में किया गया है जहाँ PTR अधिक है।

कृषि: 12.89 लाख किसानों को फसल बीमा, बागवानी से ₹12,000 करोड़ की सालाना आय

कृषि उत्पादन मंत्री जावेद डार ने विधायक पीरजादा फारूक अहमद शाह, गुलाम मोहि-उद-दीन मीर, इरफान हाफिज लोन और शब्बीर अहमद कुल्ले के सवालों के जवाब में बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) अभी जम्मू-कश्मीर के सभी 20 जिलों में लागू है।

आंकड़ों के अनुसार, अब तक 6,86,741.37 हेक्टेयर कृषि भूमि को इस योजना के दायरे में लाया जा चुका है और 12,89,917 किसान इसका लाभ उठा रहे हैं। योजना के तहत ₹221.71 करोड़ की राशि के 3,72,134 क्लेम दर्ज किए गए हैं। मंत्री ने बताया कि केंद्र शासित प्रदेश में लगभग 13.985 लाख किसान परिवार इस योजना का लाभ लेने के पात्र हैं।

डार ने बागवानी क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह सेक्टर लगभग 35 लाख लोगों — जिनमें करीब 7.5 लाख परिवार शामिल हैं — की आजीविका का आधार है और जम्मू-कश्मीर की जीडीपी में लगभग 10 प्रतिशत का योगदान देता है। सालाना अनुमानित आय लगभग ₹12,000 करोड़ बताई गई है। एक हेक्टेयर बागान से सालाना लगभग 400 मैन-डेज का रोजगार सृजित होता है।

पेंडिंग बीमा दावों के संदर्भ में मंत्री ने स्वीकार किया कि आधार वेरिफिकेशन न होना, बंद या ब्लॉक बैंक खाते और एनपीसीआई मैपर से आधार लिंक न होना — ये मुख्य बाधाएँ हैं। उन्होंने बताया कि एक विशेष अभियान शुरू किया गया है और प्रभावित किसानों में से लगभग 60 प्रतिशत से अब तक संपर्क किया जा चुका है। बागवानी उत्पादों के परिवहन के लिए अनंतनाग और बडगाम से दिल्ली तक रेलवे पार्सल और फ्रेट सेवाओं को भी बढ़ावा दिया गया है, ताकि NH-44 पर निर्भरता कम हो।

स्वास्थ्य: 17 क्रिटिकल केयर ब्लॉक और 630 एम्बुलेंस का लक्ष्य

स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू ने विधायक सुनील कुमार शर्मा के सवाल के जवाब में बताया कि प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन (PM-ABHIM) के तहत पूरे जम्मू-कश्मीर में 17 क्रिटिकल केयर ब्लॉक स्थापित किए जा रहे हैं — जिनमें 50-50 बेड वाले 15 ब्लॉक और 100-100 बेड वाले 2 ब्लॉक शामिल हैं। इसका उद्देश्य दूरदराज और पहाड़ी इलाकों से आने वाले मरीजों को गंभीर चिकित्सा सेवाओं के लिए लंबी यात्रा से बचाना है।

एम्बुलेंस सेवाओं के विस्तार पर जानकारी देते हुए मंत्री ने बताया कि 44 एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट (ALS) एम्बुलेंस — जम्मू और कश्मीर डिवीजन के लिए 22-22 — जोड़ी गई हैं, जिससे 102/108 एम्बुलेंस सेवा के तहत कुल एम्बुलेंस की संख्या 530 हो गई है। इसके अतिरिक्त, बेड़े में 100 और एम्बुलेंस शामिल की जा रही हैं — जिनमें 75 क्रिटिकल-केयर एम्बुलेंस और 25 4x4 ऑल-टेरेन एम्बुलेंस शामिल हैं। इससे कुल संख्या 630 हो जाएगी।

परिवहन: 'एक गाड़ी-एक अधिकारी' नीति विचाराधीन

परिवहन मंत्री सतीश शर्मा ने विधायक रणबीर सिंह पठानिया के सवाल के जवाब में बताया कि संशोधित कार पॉलिसी अभी यूटी सरकार के विचाराधीन है, जिसमें 'एक गाड़ी-एक अधिकारी' का सिद्धांत लागू करने का प्रस्ताव है। इस नीति में सुरक्षा जरूरतों, फील्ड ड्यूटी और विशेष विभागों की परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए कुछ विशेष छूट का भी प्रावधान होगा।

शर्मा ने कहा कि इस नीति का मकसद सरकारी वाहनों का उचित उपयोग सुनिश्चित करना, संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना और सरकारी खर्च में बचत लाना है। नीति को मंजूरी मिलने के बाद इसे सभी संबंधित विभागों, PSU, बोर्ड और स्वायत्त निकायों में लागू किया जाएगा।

सिंचाई: सोनावारी में ₹116 करोड़ की 7 DPR तैयार

जल शक्ति मंत्री जावेद राणा ने विधायक हिलाल अकबर लोन के सवाल के जवाब में बताया कि सोनावारी निर्वाचन क्षेत्र की 110 सिंचाई योजनाएँ विभाग के अधिकार क्षेत्र में हैं। पुरानी और बंद पड़ी सिंचाई परियोजनाओं की मरम्मत और उन्नयन के लिए ₹116 करोड़ की अनुमानित लागत वाली 7 विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की गई हैं, जो वित्त वर्ष 2027-28 की परियोजना सूची का हिस्सा होंगी।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा का यह सत्र स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि नवगठित सरकार शिक्षा से लेकर स्वास्थ्य और कृषि तक व्यापक सुधारों की दिशा में कदम बढ़ा रही है — अब देखना यह होगा कि ये घोषणाएँ जमीनी स्तर पर कितनी जल्दी और प्रभावी ढंग से लागू होती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इनके साथ कुछ अनुत्तरित सवाल भी हैं। PMFBY के तहत 13.985 लाख पात्र परिवारों में से केवल 12.89 लाख ही अब तक कवर हुए हैं और पेंडिंग क्लेम की मुख्य वजहें — आधार वेरिफिकेशन और बैंक खाते की समस्याएँ — प्रशासनिक कमज़ोरी की ओर इशारा करती हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में 17 क्रिटिकल केयर ब्लॉक और 630 एम्बुलेंस का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, पर सवाल यह है कि पहाड़ी और दूरदराज इलाकों में योग्य विशेषज्ञ डॉक्टरों और पैरामेडिक स्टाफ की कमी को कब और कैसे दूर किया जाएगा — जो इंफ्रास्ट्रक्चर से भी बड़ी चुनौती है। शिक्षा में रैशनलाइजेशन की नीति पुरानी है; असली परीक्षा यह होगी कि यह प्रक्रिया कागज़ों से निकलकर वास्तव में उन 10 स्कूलों तक पहुँचती है या नहीं।
RashtraPress
24 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर में छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
शिक्षा मंत्री सकीना इट्टू के अनुसार, रैशनलाइजेशन प्रक्रिया के ज़रिए अधिक PTR वाले स्कूलों में अतिरिक्त शिक्षक तैनात किए जा रहे हैं। ATD-2026 के तहत आवेदन मंगाए जा चुके हैं और उरी क्षेत्र में 22 में से 8 पदोन्नत लैब असिस्टेंट तैनात किए गए हैं।
जम्मू-कश्मीर में PMFBY के तहत कितने किसानों को फसल बीमा का लाभ मिल रहा है?
आंकड़ों के अनुसार, अभी तक 12,89,917 किसान PMFBY के दायरे में आ चुके हैं और ₹221.71 करोड़ की राशि के 3,72,134 क्लेम दर्ज हुए हैं। यह योजना सभी 20 जिलों में लागू है और 13.985 लाख किसान परिवार पात्र हैं।
जम्मू-कश्मीर में क्रिटिकल केयर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए क्या योजना है?
PM-ABHIM के तहत पूरे जम्मू-कश्मीर में 17 क्रिटिकल केयर ब्लॉक बनाए जा रहे हैं — 15 ब्लॉक 50-50 बेड के और 2 ब्लॉक 100-100 बेड के। एम्बुलेंस संख्या वर्तमान 530 से बढ़कर 630 हो जाएगी, जिसमें 75 क्रिटिकल-केयर और 25 ऑल-टेरेन एम्बुलेंस शामिल होंगी।
जम्मू-कश्मीर का बागवानी सेक्टर अर्थव्यवस्था में कितना योगदान देता है?
बागवानी सेक्टर जम्मू-कश्मीर की जीडीपी में लगभग 10 प्रतिशत का योगदान देता है और सालाना लगभग ₹12,000 करोड़ की अनुमानित आय होती है। यह सेक्टर लगभग 35 लाख लोगों — जिनमें करीब 7.5 लाख परिवार हैं — की आजीविका का आधार है।
जम्मू-कश्मीर में 'एक गाड़ी-एक अधिकारी' कार पॉलिसी क्या है?
परिवहन मंत्री सतीश शर्मा के अनुसार, यह संशोधित कार पॉलिसी अभी यूटी सरकार के विचाराधीन है। इसका उद्देश्य प्रत्येक अधिकारी को एक ही सरकारी वाहन आवंटित कर संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना और सरकारी खर्च में बचत लाना है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 दिन पहले
  2. 3 दिन पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 9 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले