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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में PDP का आरक्षण पर स्थगन प्रस्ताव, NC सरकार ने किया नामंज़ूर

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जम्मू-कश्मीर विधानसभा में PDP का आरक्षण पर स्थगन प्रस्ताव, NC सरकार ने किया नामंज़ूर

सारांश

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में PDP का आरक्षण पर स्थगन प्रस्ताव — NC सरकार ने बहस से इनकार किया। ओपन मेरिट 40% से नीचे, EWS प्रमाणपत्रों में जम्मू-कश्मीर असंतुलन, और युवाओं के रोज़गार अवसर — ये सवाल अब सदन से सड़क पर आने को तैयार हैं।

मुख्य बातें

PDP विधायक वहीद पारा ने 21 सितंबर 2026 को नियम 56 के तहत जम्मू-कश्मीर विधानसभा में आरक्षण पर स्थगन प्रस्ताव दिया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस सरकार ने प्रस्ताव को विस्तृत चर्चा के लायक नहीं माना।
मौजूदा आरक्षण ढाँचे के चलते ओपन मेरिट का हिस्सा 40% से नीचे गिर गया है।
कुल 26,558 EWS प्रमाणपत्रों में से 24,545 जम्मू और मात्र 2,013 कश्मीर डिवीजन में जारी किए गए।
मुफ्त राशन लाभार्थी: कश्मीर डिवीजन में 37,64,605 बनाम जम्मू डिवीजन में 29,76,027 ।
इल्तीजा मुफ्ती ने NC सरकार पर 'मेरिट के साथ संस्थागत भेदभाव' का आरोप लगाया।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) ने 21 सितंबर 2026 को ओपन मेरिट और आरक्षण व्यवस्था के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव पेश किया, जिसे सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) सरकार ने विस्तृत बहस के योग्य नहीं माना। PDP विधायक वहीद उर रहमान पारा द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को दी गई इस सूचना के बाद पार्टी नेता इल्तीजा मुफ्ती ने सरकार पर कड़ा प्रहार किया।

स्थगन प्रस्ताव की मुख्य माँगें

वहीद पारा ने नियम 56 के तहत विधानसभा अध्यक्ष को लिखे पत्र में कहा कि मौजूदा आरक्षण ढाँचे के चलते ओपन मेरिट का हिस्सा 40 प्रतिशत से नीचे आ गया है। उनके अनुसार, इससे आरक्षित श्रेणियों से बाहर के अभ्यर्थियों के लिए शिक्षा और रोज़गार के अवसरों तक समान पहुँच को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

पारा ने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा आरक्षण बनाम योग्यता का नहीं है, और न ही इसे क्षेत्रीय या सांप्रदायिक रंग दिया जाना चाहिए। उनके शब्दों में, यह सामाजिक न्याय, प्रतिनिधित्व और समान अवसर के बीच उचित संतुलन बनाए रखने का प्रश्न है।

EWS प्रमाणपत्रों में क्षेत्रीय असमानता

प्रस्ताव में सदन में प्रस्तुत आँकड़ों का हवाला देते हुए बताया गया कि केंद्र शासित प्रदेश में जारी किए गए कुल 26,558 EWS प्रमाणपत्रों में से 24,545 जम्मू डिवीजन में और मात्र 2,013 कश्मीर डिवीजन में जारी किए गए। यह असंतुलन, पारा के अनुसार, पात्रता मानदंडों की ज़मीनी हकीकत से कटी हुई स्थिति को उजागर करता है।

इसके साथ ही, मुफ्त राशन योजना के लाभार्थियों के आँकड़े एक अलग तस्वीर पेश करते हैं — कश्मीर डिवीजन में 37,64,605 लाभार्थी हैं, जबकि जम्मू डिवीजन में 29,76,027। पारा ने सवाल उठाया कि क्या मौजूदा आय, संपत्ति और परिसंपत्ति-आधारित पात्रता शर्तें परिवारों की वास्तविक आर्थिक कमज़ोरी को दर्शाती हैं।

इल्तीजा मुफ्ती की तीखी प्रतिक्रिया

PDP नेता इल्तीजा मुफ्ती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'PDP ने मेरिट की हत्या और कश्मीर के युवाओं पर इसके बुरे असर पर तुरंत बहस के लिए स्थगन प्रस्ताव पेश किया, फिर भी NC सरकार ने इसे विस्तार से बहस और चर्चा के लायक नहीं समझा। मेरिट के साथ संस्थागत भेदभाव और इस उदासीनता को खत्म करना होगा।'

यह बयान ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल होने की माँग और स्थानीय युवाओं में सरकारी नौकरियों को लेकर बेचैनी पहले से चरम पर है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब आरक्षण नीति विधानसभा में टकराव का केंद्र बनी हो।

पाँच सूत्री माँगें

वहीद पारा ने सदन से पाँच बिंदुओं पर तत्काल विचार करने का अनुरोध किया है। इनमें शामिल हैं — मौजूदा आरक्षण ढाँचे का युक्तिकरण, अनारक्षित युवाओं पर इसके प्रभाव का आकलन, EWS कार्यान्वयन की समीक्षा, EWS पात्रता मानदंडों की पुनर्परीक्षा, और एक आवधिक समीक्षा तंत्र की स्थापना।

क्या होगा आगे

NC सरकार द्वारा प्रस्ताव को नामंज़ूर किए जाने के बाद PDP इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की तैयारी में दिखती है। विपक्षी दलों की नज़र इस पर बनी रहेगी, और आने वाले सत्रों में यह मुद्दा और तीखा हो सकता है — विशेष रूप से तब, जब आगामी स्थानीय निकाय चुनावों में युवा मतदाता निर्णायक भूमिका निभाने वाले हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

545 बनाम 2,013 का आँकड़ा महज़ प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि नीतिगत उदासीनता का प्रमाण है। NC सरकार का बहस से इनकार इस सवाल को और धारदार बनाता है कि क्या सत्ता पक्ष जवाबदेही से बचना चाहता है। जब तक EWS मानदंड और आरक्षण ढाँचे की समीक्षा के लिए एक पारदर्शी तंत्र नहीं बनता, कश्मीरी युवाओं का भरोसा संस्थाओं पर और कमज़ोर होता रहेगा।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर में PDP का स्थगन प्रस्ताव क्या है?
PDP विधायक वहीद पारा ने 21 सितंबर 2026 को नियम 56 के तहत विधानसभा अध्यक्ष को आरक्षण ढाँचे और ओपन मेरिट पर तत्काल बहस के लिए स्थगन प्रस्ताव दिया। NC सरकार ने इसे चर्चा के योग्य नहीं माना।
ओपन मेरिट 40% से नीचे कैसे गिरा?
वहीद पारा के अनुसार, मौजूदा आरक्षण ढाँचे में विभिन्न श्रेणियों को दिए गए कोटे के कारण अनारक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए ओपन मेरिट की हिस्सेदारी 40 प्रतिशत से नीचे आ गई है, जिससे शिक्षा और रोज़गार में समान अवसर प्रभावित हो रहे हैं।
EWS प्रमाणपत्रों में जम्मू-कश्मीर असंतुलन क्या है?
सदन में प्रस्तुत आँकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में जारी कुल 26,558 EWS प्रमाणपत्रों में से 24,545 जम्मू डिवीजन में और केवल 2,013 कश्मीर डिवीजन में दिए गए। जबकि मुफ्त राशन लाभार्थियों की संख्या कश्मीर डिवीजन में अधिक है, यह असंतुलन पात्रता मानदंडों पर सवाल उठाता है।
इल्तीजा मुफ्ती ने NC सरकार पर क्या आरोप लगाया?
इल्तीजा मुफ्ती ने एक्स पर पोस्ट करते हुए NC सरकार पर 'मेरिट के साथ संस्थागत भेदभाव' का आरोप लगाया और कहा कि सरकार ने कश्मीरी युवाओं पर पड़ रहे बुरे असर पर बहस से जानबूझकर मुँह फेर लिया।
PDP ने सदन से कौन-सी पाँच माँगें रखी हैं?
PDP ने सदन से मौजूदा आरक्षण ढाँचे का युक्तिकरण, अनारक्षित युवाओं पर प्रभाव का आकलन, EWS कार्यान्वयन की समीक्षा, EWS पात्रता मानदंडों की पुनर्परीक्षा और एक आवधिक समीक्षा तंत्र स्थापित करने की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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