जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल की बैठक: ओपन मेरिट आरक्षण 40% करने की कोशिश, केंद्र की टिप्पणियों पर मंथन
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में मंगलवार, 23 जून 2026 को सिविल सचिवालय, श्रीनगर में मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में खुली मेरिट (ओपन मेरिट) श्रेणी का हिस्सा 30% से बढ़ाकर 40% करने की संभावना पर विचार-विमर्श किया गया, साथ ही गृह मंत्रालय की टिप्पणियों के आलोक में आगे का रास्ता तलाशा गया।
बैठक में क्या हुआ
मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी संदेश में बताया कि बैठक में शासन व्यवस्था को मज़बूत करने, विकास कार्यों में गति लाने और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों और नीतिगत विषयों पर चर्चा की गई। आरक्षण नीति के अलावा कई अन्य प्रशासनिक मुद्दे भी एजेंडे में शामिल रहे।
आरक्षण समीक्षा की पृष्ठभूमि
10 दिसंबर 2024 को जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक मंत्रिमंडलीय उपसमिति गठित की थी। इस उपसमिति ने लगभग छह महीने के विचार-विमर्श के बाद 10 जून 2025 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी। संबंधित विभागों से सलाह लेने के बाद मंत्रिमंडल ने 4 दिसंबर 2025 को रिपोर्ट को मंजूरी देकर उपराज्यपाल को भेज दिया था।
रिपोर्ट में सिफारिश की गई थी कि ओपन मेरिट श्रेणी के लिए सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक सीटों का अनुपात 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत किया जाए। गौरतलब है कि वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में विभिन्न श्रेणियों के लिए कुल आरक्षण 70 प्रतिशत तक पहुँच चुका है, जिससे ओपन मेरिट के लिए केवल 30 प्रतिशत स्थान बचता है।
मौजूदा आरक्षण ढाँचा
वर्तमान व्यवस्था के अनुसार अनुसूचित जनजाति-1, अनुसूचित जनजाति-2, पिछड़ा क्षेत्र निवासी (RBA) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10-10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है। अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को 8-8 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त है, जबकि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LoC) से सटे क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र की श्रेणी को 4 प्रतिशत आरक्षण मिलता है। इसके अतिरिक्त 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण भी लागू है — जिसमें 6 प्रतिशत पूर्व सैनिकों और 4 प्रतिशत दिव्यांग व्यक्तियों के लिए निर्धारित है।
केंद्र की टिप्पणियाँ और अड़चन
उपराज्यपाल ने मंत्रिमंडल की इस रिपोर्ट को मंजूरी नहीं दी और गृह मंत्रालय की टिप्पणियों के साथ इसे वापस जम्मू-कश्मीर सरकार को लौटा दिया। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में युवाओं में ओपन मेरिट श्रेणी की सीमित सीटों को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। मंत्रिमंडल अब केंद्र की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए ऐसा रास्ता तलाश रहा है जिससे ओपन मेरिट का हिस्सा कम से कम 40 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सके।
आगे की राह
मंत्रिमंडल की यह बैठक संकेत देती है कि जम्मू-कश्मीर सरकार केंद्र के साथ समन्वय बनाते हुए आरक्षण नीति में संशोधन को अंतिम रूप देने के करीब है। विशेषज्ञों के अनुसार, ओपन मेरिट में बढ़ोतरी से प्रतिस्पर्धी भर्ती परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवारों को फायदा होगा, हालाँकि इससे आरक्षित वर्गों के हितों का संतुलन बनाना एक जटिल चुनौती बनी रहेगी।