10 अगस्त 2026
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जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल की बैठक: ओपन मेरिट आरक्षण 40% करने की कोशिश, केंद्र की टिप्पणियों पर मंथन

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जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल की बैठक: ओपन मेरिट आरक्षण 40% करने की कोशिश, केंद्र की टिप्पणियों पर मंथन

सारांश

जम्मू-कश्मीर में कुल आरक्षण 70% तक पहुँचने से ओपन मेरिट के लिए केवल 30% बचा है — और युवाओं का असंतोष बढ़ रहा है। उमर अब्दुल्ला सरकार इसे 40% करना चाहती है, लेकिन केंद्र की टिप्पणियों के बाद रास्ता अब भी अटका है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में 23 जून 2026 को सिविल सचिवालय, श्रीनगर में मंत्रिपरिषद की बैठक हुई।
बैठक में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक सीटों में ओपन मेरिट का हिस्सा 30% से बढ़ाकर 40% करने पर विचार हुआ।
जम्मू-कश्मीर में विभिन्न वर्गों का कुल आरक्षण 70 प्रतिशत तक पहुँच चुका है, जिससे ओपन मेरिट के लिए सिर्फ 30% बचता है।
मंत्रिमंडलीय उपसमिति ने 10 जून 2025 को रिपोर्ट सौंपी थी; 4 दिसंबर 2025 को मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी देकर उपराज्यपाल को भेजा था।
उपराज्यपाल ने रिपोर्ट को मंजूरी नहीं दी और गृह मंत्रालय की टिप्पणियों के साथ वापस भेज दिया।
सरकार अब केंद्र की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए संशोधित रास्ता तलाश रही है।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में मंगलवार, 23 जून 2026 को सिविल सचिवालय, श्रीनगर में मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में खुली मेरिट (ओपन मेरिट) श्रेणी का हिस्सा 30% से बढ़ाकर 40% करने की संभावना पर विचार-विमर्श किया गया, साथ ही गृह मंत्रालय की टिप्पणियों के आलोक में आगे का रास्ता तलाशा गया।

बैठक में क्या हुआ

मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर जारी संदेश में बताया कि बैठक में शासन व्यवस्था को मज़बूत करने, विकास कार्यों में गति लाने और सार्वजनिक सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने से जुड़े विभिन्न प्रस्तावों और नीतिगत विषयों पर चर्चा की गई। आरक्षण नीति के अलावा कई अन्य प्रशासनिक मुद्दे भी एजेंडे में शामिल रहे।

आरक्षण समीक्षा की पृष्ठभूमि

10 दिसंबर 2024 को जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल ने मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा के लिए एक मंत्रिमंडलीय उपसमिति गठित की थी। इस उपसमिति ने लगभग छह महीने के विचार-विमर्श के बाद 10 जून 2025 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी। संबंधित विभागों से सलाह लेने के बाद मंत्रिमंडल ने 4 दिसंबर 2025 को रिपोर्ट को मंजूरी देकर उपराज्यपाल को भेज दिया था।

रिपोर्ट में सिफारिश की गई थी कि ओपन मेरिट श्रेणी के लिए सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक सीटों का अनुपात 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत किया जाए। गौरतलब है कि वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में विभिन्न श्रेणियों के लिए कुल आरक्षण 70 प्रतिशत तक पहुँच चुका है, जिससे ओपन मेरिट के लिए केवल 30 प्रतिशत स्थान बचता है।

मौजूदा आरक्षण ढाँचा

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार अनुसूचित जनजाति-1, अनुसूचित जनजाति-2, पिछड़ा क्षेत्र निवासी (RBA) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को 10-10 प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है। अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग को 8-8 प्रतिशत आरक्षण प्राप्त है, जबकि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LoC) से सटे क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र की श्रेणी को 4 प्रतिशत आरक्षण मिलता है। इसके अतिरिक्त 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण भी लागू है — जिसमें 6 प्रतिशत पूर्व सैनिकों और 4 प्रतिशत दिव्यांग व्यक्तियों के लिए निर्धारित है।

केंद्र की टिप्पणियाँ और अड़चन

उपराज्यपाल ने मंत्रिमंडल की इस रिपोर्ट को मंजूरी नहीं दी और गृह मंत्रालय की टिप्पणियों के साथ इसे वापस जम्मू-कश्मीर सरकार को लौटा दिया। यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में युवाओं में ओपन मेरिट श्रेणी की सीमित सीटों को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। मंत्रिमंडल अब केंद्र की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए ऐसा रास्ता तलाश रहा है जिससे ओपन मेरिट का हिस्सा कम से कम 40 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सके।

आगे की राह

मंत्रिमंडल की यह बैठक संकेत देती है कि जम्मू-कश्मीर सरकार केंद्र के साथ समन्वय बनाते हुए आरक्षण नीति में संशोधन को अंतिम रूप देने के करीब है। विशेषज्ञों के अनुसार, ओपन मेरिट में बढ़ोतरी से प्रतिस्पर्धी भर्ती परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले उम्मीदवारों को फायदा होगा, हालाँकि इससे आरक्षित वर्गों के हितों का संतुलन बनाना एक जटिल चुनौती बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उपराज्यपाल और गृह मंत्रालय की भूमिका यह याद दिलाती है कि जम्मू-कश्मीर की राज्य सरकार की स्वायत्तता अभी भी सीमित है। असली सवाल यह है कि क्या केंद्र की टिप्पणियाँ तकनीकी हैं या नीतिगत — और इसका जवाब तय करेगा कि यह सुधार कब और किस रूप में लागू होगा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल की 23 जून की बैठक में क्या फैसला हुआ?
23 जून 2026 को श्रीनगर में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक सीटों में ओपन मेरिट का हिस्सा 30% से बढ़ाकर 40% करने की संभावना पर विचार हुआ। साथ ही गृह मंत्रालय की टिप्पणियों के आलोक में आगे का रास्ता तलाशा गया।
जम्मू-कश्मीर में मौजूदा आरक्षण व्यवस्था क्या है?
जम्मू-कश्मीर में अनुसूचित जनजाति-1, अनुसूचित जनजाति-2, RBA और EWS को 10-10%, अनुसूचित जाति और OBC को 8-8%, तथा LoC और अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र को 4% आरक्षण मिलता है। इसके अलावा 10% क्षैतिज आरक्षण (6% पूर्व सैनिक, 4% दिव्यांग) भी लागू है, जिससे कुल आरक्षण 70% तक पहुँच जाता है।
आरक्षण समीक्षा रिपोर्ट केंद्र के पास क्यों अटकी है?
मंत्रिमंडल ने 4 दिसंबर 2025 को रिपोर्ट को मंजूरी देकर उपराज्यपाल को भेजा था, लेकिन उपराज्यपाल ने इसे मंजूरी नहीं दी और गृह मंत्रालय की टिप्पणियों के साथ वापस लौटा दिया। अब जम्मू-कश्मीर सरकार केंद्र की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए संशोधित प्रस्ताव तैयार कर रही है।
ओपन मेरिट का हिस्सा बढ़ाने से किसे फायदा होगा?
ओपन मेरिट श्रेणी का हिस्सा 40% होने से प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों को अधिक अवसर मिलेंगे। वर्तमान में 70% आरक्षण के कारण केवल 30% सीटें ओपन मेरिट के लिए बचती हैं, जिससे युवाओं में असंतोष देखा जा रहा है।
मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन कब और क्यों हुआ था?
10 दिसंबर 2024 को जम्मू-कश्मीर मंत्रिमंडल ने आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा के लिए उपसमिति गठित की थी। उपसमिति ने लगभग छह महीने बाद 10 जून 2025 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी, जिसमें ओपन मेरिट का हिस्सा 30% से बढ़ाकर 40% करने की सिफारिश की गई थी।
राष्ट्र प्रेस
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