मराठा आरक्षण पर एकनाथ शिंदे: 'न्याय देंगे, लेकिन OBC के साथ अन्याय नहीं होगा'
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को मुंबई में पत्रकारों से बात करते हुए स्पष्ट किया कि महायुति सरकार मराठा समुदाय की जायज माँगों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है, परंतु इस प्रक्रिया में ओबीसी (OBC) या किसी अन्य समुदाय के अधिकारों से समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मामले न्यायालय में विचाराधीन हैं, इसलिए सरकार कानूनी और संवैधानिक दायरे में रहकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ रही है।
मनोज जारांगे पाटिल से बातचीत जारी
उपमुख्यमंत्री शिंदे ने बताया कि मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्री, जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और सरकारी प्रतिनिधि मराठा आरक्षण आंदोलन के कार्यकर्ता मनोज जारांगे पाटिल के साथ निरंतर संवाद बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार चार कदम आगे बढ़ती है, तो प्रदर्शनकारियों को भी सकारात्मक रुख अपनाना चाहिए।
आरक्षण का इतिहास और वर्तमान स्थिति
शिंदे ने मराठा आरक्षण के इतिहास का संदर्भ देते हुए बताया कि इस समुदाय को आरक्षण देने का निर्णय सर्वप्रथम 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के कार्यकाल में लिया गया था, जिसे न्यायिक प्रक्रियाओं के माध्यम से शिक्षा में 12 प्रतिशत और नौकरियों में 13 प्रतिशत आरक्षण के रूप में बरकरार रखा गया था। हालाँकि, सरकार बदलने के बाद यह आरक्षण कायम नहीं रह सका। सत्ता में वापसी के बाद वर्तमान सरकार ने छत्रपति शिवाजी महाराज की शपथ लेकर अपने वादे को पूरा किया और विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर मराठा समुदाय को 10 प्रतिशत आरक्षण दिया, जिसका लाभ वर्तमान में छात्र और युवा उठा रहे हैं।
5,300 उम्मीदवारों की नियुक्ति पर सरकार का रुख
उपमुख्यमंत्री ने उन 5,300 उम्मीदवारों के मामले का भी उल्लेख किया, जिनकी नियुक्तियाँ न्यायालय की रोक के कारण अटकी हुई थीं। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि यदि प्रभावित युवाओं को रोज़गार मिलता है, तो वे किसी भी कानूनी कार्रवाई का सामना करने को तैयार हैं।
सहायक उपाय और जस्टिस शिंदे समिति
शिंदे ने राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कई सहायक कदमों की जानकारी दी। इनमें अन्नासाहेब पाटिल आर्थिक विकास निगम की ऋण सीमा बढ़ाना, छात्रावास निर्माण, विदेश में शिक्षा हेतु छात्रवृत्ति और सत्यापित कुनबी रिकॉर्ड वाले नागरिकों को प्रमाण पत्र जारी करने के लिए जस्टिस शिंदे समिति का गठन शामिल है। उन्होंने बताया कि इन उपायों से पहले ही लाखों नागरिकों को लाभ मिल चुका है।
गणेशोत्सव और यूसीसी पर शिंदे का संदेश
आगामी गणेशोत्सव को लेकर शिंदे ने आंदोलन के आयोजकों से अपील की कि वे सुनिश्चित करें कि उत्सव में कोई बाधा न आए, क्योंकि देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु मुंबई आते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और पुलिस प्रशासन सभी आवश्यक सावधानियाँ बरत रहे हैं। यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) पर बोलते हुए उन्होंने बालासाहेब ठाकरे के 'एक देश, एक कानून और सभी के लिए समान न्याय' के विजन के प्रति महायुति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयानों का हवाला देते हुए उन्होंने पुष्टि की कि सही समय आने पर सरकार UCC की दिशा में निर्णायक कदम उठाएगी। आंदोलन में राजनीतिक अवसरवाद की संभावना को लेकर भी उन्होंने सावधान रहने की अपील की।