15 सितंबर 2026
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मराठा आरक्षण: डिप्टी CM एकनाथ शिंदे ने जरांगे पाटिल से गणेशोत्सव में मुंबई मार्च टालने का आग्रह किया

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मराठा आरक्षण: डिप्टी CM एकनाथ शिंदे ने जरांगे पाटिल से गणेशोत्सव में मुंबई मार्च टालने का आग्रह किया

सारांश

गणेशोत्सव के बीच मराठा आरक्षण आंदोलन की आग एक बार फिर भड़की। डिप्टी CM एकनाथ शिंदे की अपील, पुलिस की रोक और जरांगे पाटिल का मार्च — महाराष्ट्र की राजनीति में यह टकराव सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक बड़े सत्ता-समीकरण की परीक्षा है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 15 सितंबर 2026 को मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल से मुंबई मार्च पर पुनर्विचार का आग्रह किया।
मुंबई पुलिस ने गणेशोत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था का हवाला देते हुए आज़ाद मैदान में प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया।
राज्य सरकार ने न्यायमूर्ति शुक्रे आयोग की सिफारिश पर मराठा समुदाय के लिए नौकरियों और शिक्षा में 10% आरक्षण लागू किया है।
सर्वोच्च न्यायालय के स्थगन के बावजूद 5,300 उम्मीदवारों की नियुक्ति सुनिश्चित की गई।
अन्नासाहेब पाटिल महामंडल का ब्याज-मुक्त ऋण ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख किया गया।
शिंदे ने आंदोलन को 'बाहरी राजनीतिक एजेंडे' में बदलने की संभावना के प्रति आगाह किया।

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल से मुंबई में प्रस्तावित मार्च पर पुनर्विचार करने की सार्वजनिक अपील की। यह अपील मुंबई पुलिस द्वारा गणेशोत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए आज़ाद मैदान में प्रदर्शन की अनुमति न देने के तत्काल बाद आई।

शिंदे का आग्रह और सरकार का रुख

शिंदे ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता गणेश भक्तों को किसी प्रकार की असुविधा से बचाना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। उन्होंने कहा, 'जिस प्रकार सरकार ने चार कदम आगे बढ़ाए हैं, उसी प्रकार मनोज जरांगे पाटिल को भी सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और मुंबई में प्रवेश करने के अपने निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।'

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि गणेशोत्सव भारत और विदेश से लाखों श्रद्धालुओं को मुंबई की ओर खींचता है, ऐसे में प्रदर्शन से उत्पन्न बाधाएँ व्यापक जन-असुविधा का कारण बन सकती हैं।

मराठा समुदाय के लिए उठाए गए कदम

शिंदे ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) या किसी अन्य समुदाय के अधिकारों से समझौता किए बिना मराठा समुदाय के हितों के लिए सक्रिय रही है। उन्होंने बताया कि न्यायमूर्ति शुक्रे आयोग के निष्कर्षों के आधार पर नौकरियों और शिक्षा में मराठा समुदाय के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण लागू करने हेतु एक विशेष विधायी सत्र बुलाया गया था, जिसका लाभ वर्तमान में छात्र और युवा उठा रहे हैं।

चल रही कानूनी चुनौतियों और सर्वोच्च न्यायालय के स्थगन आदेशों के बावजूद, राज्य सरकार ने पहले से रुके हुए 5,300 उम्मीदवारों की नियुक्ति सुनिश्चित की। न्यायमूर्ति शिंदे समिति के अंतर्गत जिला कलेक्टर कार्यालयों में समर्पित प्रकोष्ठों के माध्यम से ऐतिहासिक अभिलेखों का सत्यापन किया गया है और राज्य भर में लाखों कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं।

आर्थिक और शैक्षणिक सुविधाओं में विस्तार

अन्नासाहेब पाटिल आर्थिक विकास महामंडल के माध्यम से दिए जाने वाले ब्याज-मुक्त ऋण की अधिकतम सीमा ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख कर दी गई है। इसके अतिरिक्त विदेशी अध्ययन छात्रवृत्ति, छात्रावास आवास और सारथी संस्थान में रियायतें जैसी सुविधाओं को मौजूदा OBC कल्याण योजनाओं के समतुल्य किया गया है।

गौरतलब है कि मराठा समुदाय पहले भी 58 विशाल और शांतिपूर्ण रैलियाँ आयोजित कर चुका है, जिन्होंने अनुकरणीय अनुशासन के लिए व्यापक सराहना पाई थी। शिंदे ने इसी परंपरा को आगे बढ़ाने की अपील करते हुए आंदोलन को किसी बाहरी राजनीतिक एजेंडे में बदलने की संभावना के प्रति आगाह किया।

राजनीतिक शोषण पर चेतावनी

शिंदे ने स्पष्ट चेतावनी दी कि 'बाहरी तत्वों को इस आंदोलन को राजनीतिक एजेंडे में नहीं बदलना चाहिए या वंचित मराठा युवाओं की भावनाओं का शोषण नहीं करना चाहिए।' उन्होंने यह भी दोहराया कि प्रशासन सभी विचाराधीन मामलों पर संवैधानिक संवाद के लिए पूरी तरह खुला है।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब महाराष्ट्र की राजनीति में मराठा आरक्षण का मुद्दा चुनावी संवेदनशीलता के चरम पर है और सर्वोच्च न्यायालय में इससे जुड़ी याचिकाएँ लंबित हैं। आने वाले दिनों में जरांगे पाटिल की प्रतिक्रिया और मार्च की दिशा यह तय करेगी कि यह राजनीतिक तनाव किस मोड़ लेता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे की राजनीतिक मजबूरी स्पष्ट है — गणेशोत्सव जैसे संवेदनशील अवसर पर मराठा मार्च सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए छवि-संकट बन सकता था। सरकार द्वारा गिनाई गई उपलब्धियाँ — 5,300 नियुक्तियाँ, कुनबी प्रमाण पत्र, बढ़ा हुआ ऋण — वास्तविक हैं, लेकिन मूल मुद्दे यानी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित आरक्षण की वैधता का उत्तर इनमें से कोई नहीं देता। जब तक शीर्ष अदालत का स्थगन बना रहेगा, तब तक जरांगे पाटिल के पास आंदोलन जारी रखने का राजनीतिक आधार बना रहेगा और सरकार की हर 'सकारात्मक कदम' की दलील अधूरी लगेगी।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एकनाथ शिंदे ने मनोज जरांगे पाटिल से मुंबई मार्च टालने का आग्रह क्यों किया?
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने गणेशोत्सव के दौरान लाखों भक्तों को असुविधा से बचाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की आवश्यकता का हवाला देते हुए यह अपील की। मुंबई पुलिस ने इसी आधार पर आज़ाद मैदान में प्रदर्शन की अनुमति देने से पहले ही इनकार कर दिया था।
मराठा समुदाय के लिए महाराष्ट्र सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं?
राज्य सरकार ने न्यायमूर्ति शुक्रे आयोग की सिफारिश पर नौकरियों और शिक्षा में 10% आरक्षण लागू किया, सुप्रीम कोर्ट के स्थगन के बावजूद 5,300 उम्मीदवारों की नियुक्ति सुनिश्चित की, और लाखों कुनबी जाति प्रमाण पत्र जारी किए। इसके अलावा अन्नासाहेब पाटिल महामंडल का ब्याज-मुक्त ऋण ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹15 लाख किया गया है।
मराठा आरक्षण का मामला सर्वोच्च न्यायालय में कहाँ है?
मराठा समुदाय को दिए गए 10% आरक्षण पर सर्वोच्च न्यायालय का स्थगन आदेश अभी भी लागू है और मामला विचाराधीन है। इस स्थगन के कारण आरक्षण का पूर्ण क्रियान्वयन अटका हुआ है, जो आंदोलन की मुख्य माँगों में से एक बना हुआ है।
मनोज जरांगे पाटिल कौन हैं और उनकी मुख्य माँग क्या है?
मनोज जरांगे पाटिल महाराष्ट्र के प्रमुख मराठा आरक्षण कार्यकर्ता हैं जो मराठा समुदाय को OBC श्रेणी के अंतर्गत कुनबी जाति का दर्जा देने और आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट के स्थगन को हटाने की माँग कर रहे हैं। वे बड़े पैमाने पर रैलियाँ आयोजित कर राज्य सरकार पर दबाव बनाते रहे हैं।
क्या मराठा समुदाय की पिछली रैलियाँ शांतिपूर्ण रही हैं?
शिंदे के अनुसार मराठा समुदाय ने पहले भी 58 विशाल और शांतिपूर्ण रैलियाँ आयोजित की हैं जिन्होंने अनुकरणीय अनुशासन के लिए व्यापक प्रशंसा अर्जित की। उन्होंने इसी परंपरा को बनाए रखते हुए सहयोगात्मक दृष्टिकोण अपनाने की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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