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13वां पेइचिंग श्यांगशान फोरम शुरू: 100 देशों के प्रतिनिधि, वैश्विक सुरक्षा पर मंथन

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13वां पेइचिंग श्यांगशान फोरम शुरू: 100 देशों के प्रतिनिधि, वैश्विक सुरक्षा पर मंथन

सारांश

बीजिंग में 13वां पेइचिंग श्यांगशान फोरम शुरू हुआ — 100 देशों के प्रतिनिधि तीन दिन तक वैश्विक सुरक्षा, क्षेत्रीय संघर्ष और सैन्य प्रौद्योगिकी पर मंथन करेंगे। यह फोरम अपनी स्थापना की 20वीं वर्षगांठ पर ऐसे दौर में हो रहा है जब वैश्विक व्यवस्था तेज़ बदलाव के दौर से गुज़र रही है।

मुख्य बातें

13वां पेइचिंग श्यांगशान फोरम 15 सितंबर 2026 को बीजिंग अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में शुरू हुआ।
फोरम 15 से 17 सितंबर तक चलेगा; उद्घाटन समारोह बुधवार को होगा।
करीब 100 देशों, क्षेत्रों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधिमंडल भाग ले रहे हैं।
इस वर्ष का विषय: 'स्थिरता पर आम सहमति बनाएं, सुरक्षा शासन को संयुक्त रूप से बढ़ावा दें' ।
चार पूर्ण सत्र और आठ समानांतर समूह सत्र आयोजित होंगे, जिनमें सैन्य प्रौद्योगिकी, क्षेत्रीय हॉटस्पॉट और अंतरराष्ट्रीय कानून पर चर्चा होगी।
इस वर्ष फोरम की स्थापना की 20वीं वर्षगांठ है — स्थापना 2006 में हुई थी।

13वां पेइचिंग श्यांगशान फोरम सोमवार, 15 सितंबर 2026 को बीजिंग अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र में औपचारिक रूप से आरंभ हुआ। इस तीन-दिवसीय सम्मेलन में करीब 100 देशों, क्षेत्रों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भाग ले रहे हैं। इस वर्ष फोरम का केंद्रीय विषय है — 'स्थिरता पर आम सहमति बनाएं, सुरक्षा शासन को संयुक्त रूप से बढ़ावा दें'

फोरम का एजेंडा और संरचना

फोरम 15 से 17 सितंबर 2026 तक चलेगा। इसमें चार पूर्ण सत्र और आठ समानांतर समूह सत्र आयोजित होंगे। उद्घाटन समारोह बुधवार, 17 सितंबर को निर्धारित है।

इन सत्रों में पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा, वैश्विक शासन, क्षेत्रीय हॉटस्पॉट, सैन्य प्रौद्योगिकी तथा अंतरराष्ट्रीय कानून के शासन जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। चीन और विदेशों के विद्वान एवं विशेषज्ञ भी इसमें सहभागी हैं।

विषय का महत्व: 'स्थिरता' और 'शासन'

फोरम के विषय में दो प्रमुख अवधारणाएं निहित हैं। 'स्थिरता' का जोर उथल-पुथल भरे वैश्विक बदलावों के बीच अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की बुनियाद को मज़बूत करने पर है, जबकि 'शासन' संवाद और विचार-विमर्श के ज़रिए सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करने पर केंद्रित है।

यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक शासन व्यवस्था में गहरे बदलाव हो रहे हैं और दुनिया में एक सदी में एक बार होने वाले बड़े परिवर्तन तेज़ी से सामने आ रहे हैं। फोरम के आयोजकों के अनुसार, ये दोनों पहलू — स्थिरता और शासन — एक-दूसरे से अभिन्न रूप से जुड़े हैं और संघर्षों के बीच शांति बनाए रखने तथा साझा लाभ के रास्ते तलाशने की दिशा में काम करते हैं।

20वीं वर्षगांठ: फोरम की यात्रा

गौरतलब है कि इस वर्ष पेइचिंग श्यांगशान फोरम की स्थापना की 20वीं वर्षगांठ भी है। वर्ष 2006 में स्थापना के बाद से यह मंच समानता, खुलेपन, समावेशिता और आपसी सीख की भावना के साथ निरंतर आगे बढ़ा है। इन दो दशकों में फोरम चीन की सैन्य कूटनीति का एक प्रमुख और प्रतिष्ठित मंच बन चुका है।

संवाद और आदान-प्रदान की इस परंपरा ने इसे एशियाई सुरक्षा वार्ता के परिदृश्य में विशेष स्थान दिलाया है — जिसकी तुलना अक्सर सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला वार्ता से की जाती है।

वैश्विक सुरक्षा पर क्या होगा आगे

फोरम में व्यापक रणनीतिक विश्लेषण के साथ-साथ विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक विचार-विमर्श की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा क्षेत्र के सामने खड़ी प्रमुख और तात्कालिक चुनौतियों पर केंद्रित यह फोरम, आलोचकों के मुताबिक, बहुपक्षीय सुरक्षा संवाद में चीन की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करता है। अगले तीन दिनों में आने वाले निष्कर्ष और सिफारिशें वैश्विक सुरक्षा नीति-निर्माण की दिशा को प्रभावित कर सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

या यह वास्तविक बहुपक्षीय संवाद की दिशा में आगे बढ़ता है। भारत समेत कई देशों की भागीदारी इस फोरम को भू-राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती है, खासकर तब जब एशिया-प्रशांत में सुरक्षा प्रतिस्पर्धा तेज़ हो रही हो। मुख्यधारा की कवरेज जो प्रायः चूक जाती है, वह यह है कि चीन इस मंच का उपयोग शांगरी-ला जैसे पश्चिम-झुकाव वाले फोरमों के विकल्प के रूप में स्थापित करने के लिए भी करता है।
RashtraPress
15 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पेइचिंग श्यांगशान फोरम क्या है?
पेइचिंग श्यांगशान फोरम चीन का एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन है, जिसकी स्थापना 2006 में हुई थी। यह चीन की सैन्य कूटनीति का महत्वपूर्ण मंच माना जाता है और इसमें दुनियाभर के देशों, संगठनों और विशेषज्ञों की भागीदारी होती है।
13वें पेइचिंग श्यांगशान फोरम में कितने देश भाग ले रहे हैं?
इस वर्ष के फोरम में करीब 100 देशों, क्षेत्रों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भाग ले रहे हैं। इनके साथ चीन और विदेशों के विद्वान एवं विशेषज्ञ भी सम्मिलित हैं।
2026 के फोरम का विषय क्या है और यह क्यों चुना गया?
इस वर्ष का विषय है — 'स्थिरता पर आम सहमति बनाएं, सुरक्षा शासन को संयुक्त रूप से बढ़ावा दें।' यह विषय इसलिए चुना गया क्योंकि वैश्विक शासन व्यवस्था में गहरे बदलाव हो रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति व स्थिरता बनाए रखने की साझा अपेक्षाएं रखता है।
फोरम में किन विषयों पर चर्चा होगी?
फोरम में चार पूर्ण सत्र और आठ समानांतर समूह सत्र होंगे। इनमें पारंपरिक और गैर-पारंपरिक सुरक्षा, वैश्विक शासन, क्षेत्रीय हॉटस्पॉट, सैन्य प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय कानून का शासन जैसे प्रमुख मुद्दे शामिल हैं।
पेइचिंग श्यांगशान फोरम की 20वीं वर्षगांठ का क्या महत्व है?
2006 में स्थापना के बाद से यह फोरम दो दशकों में चीन की सैन्य कूटनीति का प्रमुख प्रतीक बन चुका है। समानता, खुलेपन और समावेशिता के सिद्धांतों पर चलते हुए इसने एशियाई सुरक्षा संवाद में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।
राष्ट्र प्रेस
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