आर. रामचंद्र राव: गावस्कर के ऐतिहासिक 10,000 रन वाले टेस्ट में अंपायरिंग करने वाले भारतीय अधिकारी
सारांश
मुख्य बातें
भारत के अनुभवी क्रिकेट अंपायर आर. रामचंद्र राव उस ऐतिहासिक टेस्ट मैच का अभिन्न हिस्सा रहे, जिसमें भारत के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने 1987 में अहमदाबाद के मैदान पर टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन पूरे करने वाले विश्व के पहले बल्लेबाज बनने का कीर्तिमान स्थापित किया। राव ने अपने शांत और निष्पक्ष अंपायरिंग से भारत-पाकिस्तान के मुकाबलों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रारंभिक जीवन और अंपायरिंग की शुरुआत
आर. रामचंद्र राव का जन्म 16 सितंबर 1931 को हुआ था। क्रिकेट के प्रति उनकी गहरी समझ और सटीक निर्णय लेने की क्षमता ने उन्हें फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में अंपायरिंग के अवसर तक पहुँचाया। उन्होंने 1975 में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच खेले गए रणजी ट्रॉफी मुकाबले से अपनी अंपायरिंग करियर की शुरुआत की।
अपने पूरे करियर में राव ने कुल 20 फर्स्ट-क्लास मैचों में अंपायरिंग की। मैदान पर उनकी पहचान थी — शांत स्वभाव और खिलाड़ियों की जोरदार अपील के सामने भी दबाव में न आने की विशेषता, जो एक अंपायर के लिए सर्वोच्च गुण माना जाता है।
गावस्कर का ऐतिहासिक 10,000 रन का कीर्तिमान
1987 में अहमदाबाद में भारत और पाकिस्तान के बीच खेले गए टेस्ट मैच में रामचंद्र राव अंपायर के रूप में मैदान पर थे। इसी मुकाबले में सुनील गावस्कर ने टेस्ट क्रिकेट में 10,000 रन पूरे किए और यह उपलब्धि हासिल करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने।
गौरतलब है कि जब गावस्कर ने यह मील का पत्थर पार किया, तो दर्शक उन्हें बधाई देने के लिए मैदान पर उतर आए, जिसके कारण तकरीबन 20 मिनट तक खेल को रोकना पड़ा था। यह मुकाबला अंततः ड्रॉ पर समाप्त हुआ। रामचंद्र राव के लिए यह उनके करियर का एकमात्र टेस्ट मैच था, जो अपने आप में एक दुर्लभ और यादगार अनुभव रहा।
लिस्ट-ए और वनडे में भूमिका
टेस्ट क्रिकेट के अलावा आर. रामचंद्र राव ने कुल 5 लिस्ट-ए मैचों में अंपायरिंग की, जिनमें 3 वनडे अंतरराष्ट्रीय मुकाबले भी शामिल थे। 1987 में पुणे में भारत और पाकिस्तान के बीच खेला गया वनडे मुकाबला उनके करियर का अंतिम अंतरराष्ट्रीय मैच साबित हुआ।
विरासत और निधन
भारतीय क्रिकेट के इस निष्ठावान अंपायर ने 11 जून 2017 को 85 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कहा। यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब गावस्कर के उस ऐतिहासिक पल को देखने वाले चश्मदीद गवाह एक-एक कर क्रिकेट जगत से विदा हो रहे हैं। राव का नाम उन गिने-चुने अंपायरों में दर्ज है जिन्होंने खेल के किसी महानतम क्षण के साक्षी बनने का अवसर पाया।