चेतन चौहान: बिना शतक 2,000 टेस्ट रन बनाने वाले विश्व के पहले बल्लेबाज, गावस्कर को बैन से बचाया था
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय क्रिकेट के सबसे जुझारू सलामी बल्लेबाजों में से एक चेतन चौहान ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वह मुकाम हासिल किया जो उनसे पहले किसी ने नहीं किया था — वह टेस्ट क्रिकेट में बिना एक भी शतक लगाए 2,000 रन पूरे करने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने। 21 जुलाई, 1947 को उत्तर प्रदेश के बरेली में जन्मे चेतन का क्रिकेट से गहरा नाता बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे एक यादगार अंतरराष्ट्रीय करियर में बदल गया।
घरेलू क्रिकेट से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
चेतन चौहान ने घरेलू क्रिकेट में अपना डेब्यू 1967 में किया और लगातार प्रभावशाली प्रदर्शन से चयनकर्ताओं का ध्यान खींचा। उन्होंने 179 प्रथम श्रेणी मैचों में 40 की औसत से 11,143 रन बनाए, जिनमें 21 शतक और 59 अर्धशतक शामिल रहे। घरेलू क्रिकेट में इस दमदार प्रदर्शन के बल पर 1978 में उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली।
अनोखा अंतरराष्ट्रीय करियर और ऐतिहासिक रिकॉर्ड
चेतन ने भारत के लिए 40 टेस्ट और 7 एकदिवसीय मैच खेले। टेस्ट क्रिकेट में उन्होंने 2,084 रन बनाए, जबकि वनडे में 153 रन उनके खाते में आए। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में वह कभी शतक नहीं जुटा सके — अपने करियर में वह 80 से 97 के बीच के स्कोर पर 9 बार आउट हुए। बावजूद इसके, टेस्ट क्रिकेट में बिना शतक के 2,000 रन पूरे करने वाले वह विश्व के पहले बल्लेबाज बने — एक रिकॉर्ड जो कई वर्षों तक अटूट रहा।
मेलबर्न 1981: गावस्कर विवाद और चेतन की सूझबूझ
1981 में मेलबर्न के मैदान पर भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए टेस्ट मैच में एक नाटकीय घटना हुई। तेज गेंदबाज डेनिस लिली की एक गेंद सुनील गावस्कर के पैड पर लगी और अंपायर ने उन्हें एलबीडब्ल्यू आउट करार दिया। गावस्कर इस फैसले से नाखुश थे और मैदान छोड़ने को तैयार नहीं थे। बहस लंबी खिंची और तत्कालीन कप्तान गावस्कर अपने सलामी जोड़ीदार चेतन का हाथ थामकर मैदान से बाहर जाने लगे — वह मैच का बहिष्कार करना चाहते थे।
इस नाजुक मौके पर चेतन ने संयम और सूझबूझ का परिचय दिया। उन्होंने पहले गावस्कर को समझाने की कोशिश की और फिर टीम इंडिया के ग्रुप कैप्टन शाहिद अली खां दुर्रानी को मैदान की ओर आने का इशारा किया। दुर्रानी के हस्तक्षेप के बाद गावस्कर शांत हुए और मामला सुलझ गया। क्रिकेट विशेषज्ञों के अनुसार, यदि चेतन ने गावस्कर को नहीं रोका होता, तो उन पर इस आचरण के लिए पाँच साल तक का प्रतिबंध लग सकता था।
विरासत और निधन
बड़े से बड़े गेंदबाजों का डटकर सामना करने वाले चेतन चौहान का 16 अगस्त, 2020 को 73 वर्ष की आयु में निधन हो गया। कोविड-19 से जूझते हुए वह जिंदगी की यह लड़ाई हार गए। उनका जाना भारतीय क्रिकेट के लिए एक अपूरणीय क्षति था — एक ऐसे खिलाड़ी की विदाई जिन्होंने मैदान पर और मैदान के बाहर, दोनों जगह अपनी समझदारी और साहस का लोहा मनवाया।