मराठा आरक्षण: मनोज जरांगे का अनशन जारी, 12 सितंबर तक मुंबई कूच की रणनीति तैयार
सारांश
मुख्य बातें
मराठा आरक्षण आंदोलन के प्रमुख नेता मनोज जरांगे पाटिल ने 31 अगस्त को मराठा समाज को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि वे अपना अनशन समाप्त नहीं करेंगे और 12 सितंबर तक मुंबई में बड़े आंदोलन की तैयारी कर चुके हैं। उन्होंने महाराष्ट्र भर के मराठा युवाओं से अपील की कि वे धीरे-धीरे मुंबई की ओर रवाना हों।
मुंबई कूच की रणनीति
जरांगे पाटिल ने कहा, 'मैं अनशन नहीं छोड़ूंगा। मैं जानता हूं कि मुंबई में कैसे जाना है। मेरे आने के बाद जहां जाना है, वहां चले जाना।' उन्होंने समर्थकों को निर्देश दिया कि जैसे ही उन्हें पता चले कि वे आज़ाद मैदान या वर्षा बंगले पर पहुँच गए हैं, वे तुरंत बाहर निकलें। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि एक साथ सभी का मुंबई जाना संभव नहीं है, इसलिए चरणबद्ध तरीके से आज से ही आवाजाही शुरू की जाए।
गोपनीय रणनीति और पुलिस पर सवाल
जरांगे ने आंदोलनकारियों को सतर्क करते हुए कहा, 'बस आज़ाद मैदान पर मत जाएं, क्योंकि उन्हें पता नहीं चलना चाहिए कि मराठा यहां आए हैं।' उन्होंने सुझाव दिया कि आंदोलनकारी मुंबई में अपने रिश्तेदारों या मित्रों के घर रुकें। पुलिस कार्रवाई के संभावित डर को दूर करते हुए उन्होंने कहा, 'अगर पुलिस आपको उस घर से उठाकर ले जाए तो बेझिझक पुलिस स्टेशन में रहें — उल्टा, वहां अच्छी सुविधा है, घबराएं नहीं।' उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस किन लोगों को उठाकर ले जाती है, इस पर उनकी नज़र रहेगी।
सरकार से अनुमति की मांग
जरांगे पाटिल ने महाराष्ट्र सरकार से 12 सितंबर से 30 सितंबर तक मुंबई में अनशन की अनुमति देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन को अभी ही अनुमति पत्र जारी करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि अनुमति मिलती है या नहीं, दोनों स्थितियों में आगे की रणनीति तय की जाएगी।
आंदोलन का व्यापक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब मराठा आरक्षण की माँग को लेकर महाराष्ट्र में लंबे समय से तनाव बना हुआ है। गौरतलब है कि जरांगे पाटिल पहले भी कई बार अनशन कर सरकार पर दबाव बना चुके हैं। 12 सितंबर की समयसीमा आंदोलन के अगले निर्णायक चरण को परिभाषित कर सकती है।
आगे क्या होगा
आंदोलनकारियों की मुंबई में बड़े पैमाने पर उपस्थिति और प्रस्तावित अनशन के मद्देनज़र राज्य सरकार तथा प्रशासन पर दबाव बढ़ने की संभावना है। अनुमति पर सरकार का रुख और आंदोलनकारियों की संख्या ही तय करेगी कि 12 सितंबर के बाद स्थिति किस दिशा में जाती है।