मराठा आरक्षण विवाद: OBC संगठनों की चेतावनी, 12 जून तक मांगें न मानीं तो महाराष्ट्र बंद
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण को लेकर सियासी पारा एक बार फिर चढ़ गया है। OBC महासंघ से जुड़े संगठनों और नेताओं ने राज्य सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि मराठा समुदाय को OBC श्रेणी में शामिल किया गया या ‘सगे-सोयरे’ अध्यादेश लागू किया गया, तो पूरे राज्य में उग्र आंदोलन छेड़ा जाएगा, जिसमें मुंबई में विशाल मोर्चा और ज़रूरत पड़ने पर महाराष्ट्र बंद तक शामिल होगा।
मुंबई में जुटे OBC नेता
मंगलवार को मुंबई में OBC महासंघ से जुड़े नेताओं ने एक बैठक की और सरकार के समक्ष औपचारिक रूप से अपना विरोध दर्ज कराया। उनकी प्रमुख माँग है कि ‘सगे-सोयरे’ से जुड़ी अधिसूचना को तत्काल वापस लिया जाए। नेताओं का कहना है कि यदि मराठा समुदाय को OBC में शामिल किया जाता है, तो मौजूदा आरक्षण ढाँचा गहराई से प्रभावित होगा।
50 प्रतिशत की सीमा का तर्क
OBC नेताओं ने सर्वोच्च न्यायालय के उस फैसले का हवाला दिया, जिसमें आरक्षण की अधिकतम सीमा 50 प्रतिशत निर्धारित की गई है। उनके अनुसार, महाराष्ट्र में पहले से ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति को 22 प्रतिशत तथा OBC वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है। ऐसे में किसी नए वर्ग को जोड़ने से, उनका कहना है, यह संवैधानिक संतुलन बिगड़ जाएगा।
‘सगे-सोयरे’ पर आपत्ति
नेताओं ने दावा किया कि मराठा समुदाय सामाजिक और आर्थिक रूप से सक्षम है, इसलिए उसे OBC में शामिल करना उचित नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि कुणबी और मराठा अलग-अलग जातियाँ हैं, परन्तु ‘सगे-सोयरे’ जैसे प्रावधानों के ज़रिए पुराने राजस्व रिकॉर्ड खंगालकर कथित तौर पर फ़र्ज़ी जाति प्रमाणपत्र जारी हो सकते हैं। आलोचकों का कहना है कि इससे OBC युवाओं के लिए नौकरी और शिक्षा के अवसर सीधे प्रभावित होंगे।
12 जून तक की समयसीमा
OBC नेताओं ने राज्य सरकार को 12 जून तक का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें इस तय अवधि में नहीं मानी गईं, तो राज्यभर में बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस रणनीति में मुंबई में मोर्चा निकालने और अंतिम विकल्प के रूप में महाराष्ट्र बंद का आह्वान भी शामिल बताया जा रहा है।
शेंडगे की समिति भंग करने की मांग
इस बीच OBC नेता प्रकाश शेंडगे ने माँग की है कि OBC समाज के हितों की रक्षा के लिए गठित मौजूदा विशेष समिति को तत्काल रद्द कर एक नई समिति का गठन किया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समिति OBC हितों की प्रभावी पैरवी करने में विफल रही है। गौरतलब है कि मराठा बनाम OBC की यह तनातनी पिछले दो वर्षों में राज्य की राजनीति का सबसे संवेदनशील मोर्चा बनी हुई है, और आने वाले सप्ताह सरकार के लिए राजनीतिक रूप से निर्णायक साबित हो सकते हैं।