क्या मध्य प्रदेश में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने पर सभी दल सहमत हैं?

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क्या मध्य प्रदेश में ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने पर सभी दल सहमत हैं?

सारांश

मध्य प्रदेश की राजनीतिक स्थिति में एक महत्वपूर्ण मोड़ आ गया है। सभी दलों ने ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने पर सहमति जताई है, जिससे समाज के एक महत्वपूर्ण वर्ग को सशक्त बनाने की दिशा में कदम उठाया गया है।

Key Takeaways

  • सर्वदलीय सहमति - सभी दलों ने ओबीसी के आरक्षण पर एकमत होकर संकल्प लिया।
  • सर्वोच्च न्यायालय में मामला विचाराधीन है।
  • राजनीतिक स्थिरता के लिए यह निर्णय महत्वपूर्ण है।
  • ओबीसी वर्ग के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम।
  • विधायकों का समर्थन - सभी दलों के विधायक आरक्षण का समर्थन कर रहे हैं।

भोपाल, 28 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में गुरुवार को आयोजित सर्वदलीय बैठक में सभी राजनीतिक दलों ने अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने पर अपनी सहमति व्यक्त की है। इस बैठक में एक संकल्प भी पारित किया गया।

ओबीसी को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत आरक्षण दिए जाने का मामला वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने की अपनी प्रतिबद्धता को फिर से दोहराते हुए गुरुवार को सर्वदलीय बैठक बुलाने का आह्वान किया था।

इस संदर्भ में, मुख्यमंत्री आवास पर गुरुवार को सर्वदलीय बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में भाजपा, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी, और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक के बाद संवाददाताओं के साथ बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सभी दलों ने सर्वोच्च न्यायालय में ओबीसी से संबंधित मामले पर चर्चा की।

सभी दलों के विधायक विधानसभा में 27 प्रतिशत आरक्षण देने की बात उठाते रहे हैं। इस मामले में विभिन्न वकील केस लड़ रहे हैं, जिसके संबंध में न्यायालय ने निर्णय लिया है।

इसी के अनुसार, 23 सितंबर से रोजाना सुनवाई की जाएगी। ओबीसी आरक्षण से संबंधित न्यायालय में कई याचिकाएं हैं। इस पर चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि सभी अधिवक्ताओं को एकमत होना चाहिए और इसके लिए वे सभी मिलकर निर्णय लें।

सभी दलों के विधायक विधानसभा में ओबीसी आरक्षण का समर्थन करते रहे हैं। अब वे एक साथ बैठे हैं और सर्वदलीय संकल्प पारित किया गया है, जिसके तहत ओबीसी आरक्षण देने के लिए एकजुट होकर एक मंच पर आए हैं।

वहीं, वकील भी 10 सितंबर से पहले एकत्र होकर विचार-विमर्श करेंगे।

मुख्यमंत्री यादव ने सर्वोच्च न्यायालय में लंबित मामले को लेकर कहा कि यह सच है कि 13 प्रतिशत आरक्षण अभी भी पेंडिंग है। यदि न्यायालय जल्दी से निर्णय करता है, तो जो विद्यार्थी 13 प्रतिशत में आते हैं और जिन्होंने आयु सीमा पार कर ली है, उन्हें भी इसका लाभ मिलेगा। दरअसल, कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने ओबीसी आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत करने का प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद मामला न्यायालय में लंबित है।

Point of View

NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण क्यों दिया जा रहा है?
ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय उनके सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए एक आवश्यक कदम है।
क्या यह निर्णय सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है?
हाँ, ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का मामला वर्तमान में सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है।
सर्वदलीय बैठक में किन दलों ने भाग लिया?
सर्वदलीय बैठक में भाजपा, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, कम्युनिस्ट पार्टी, और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधि शामिल हुए।
इस निर्णय का समाज पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
इस निर्णय से ओबीसी वर्ग को अधिक अवसर मिलेंगे, जिससे उनका सामाजिक और आर्थिक विकास होगा।
ओबीसी आरक्षण का समर्थन कौन कर रहा है?
सभी प्रमुख राजनीतिक दल ओबीसी आरक्षण का समर्थन कर रहे हैं।