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जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड प्रदर्शन पर इल्तिजा मुफ्ती का वार: 'अनुच्छेद 370 बिना यह महज़ प्रतीकात्मक'

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जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड प्रदर्शन पर इल्तिजा मुफ्ती का वार: 'अनुच्छेद 370 बिना यह महज़ प्रतीकात्मक'

सारांश

फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में दिल्ली में जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड प्रदर्शन हुआ, लेकिन पीडीपी ने दूरी बनाए रखी। इल्तिजा मुफ्ती ने इसे 'प्रतीकात्मक' करार दिया और कहा कि अनुच्छेद 370 की माँग के बिना यह आयोजन 5 अगस्त 2019 के फैसलों को सामान्य बनाने जैसा है।

मुख्य बातें

इल्तिजा मुफ्ती ने 20 जुलाई को एक्स पर फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में हुए जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड प्रदर्शन को 'प्रतीकात्मक' बताया।
पीडीपी ने प्रदर्शन में शामिल होने से इनकार किया, क्योंकि एजेंडे में अनुच्छेद 370 की बहाली शामिल नहीं थी।
महबूबा मुफ्ती ने 18 जुलाई को कहा था कि केवल राज्य-दर्जे तक सीमित प्रदर्शन 5 अगस्त 2019 के फैसलों को वैधता देने जैसा होगा।
इल्तिजा ने चेताया कि चुनी हुई सरकार 'गैर-कानूनी कदम को सामान्य बनाने' का रास्ता चुन रही है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के बीच एजेंडे पर मतभेद जम्मू-कश्मीर के विपक्षी एकजुटता पर सवाल उठाते हैं।

पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में नई दिल्ली में आयोजित जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड बहाली प्रदर्शन को 'प्रतीकात्मक' करार दिया है। 20 जुलाई को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर उन्होंने सवाल उठाया कि अनुच्छेद 370 की बहाली की माँग के बिना यह आयोजन किस काम का है।

इल्तिजा मुफ्ती ने क्या कहा

इल्तिजा मुफ्ती ने एक्स पर लिखा, 'दिल्ली के किसी आम क्लब में बिना किसी जोश के, जानबूझकर हल्के-फुल्के ढंग से और बिना आर्टिकल 370 का ज़िक्र किए आयोजित एक-दिवसीय कार्यक्रम के बजाय, जरा जंतर-मंतर पर उस विरोध-प्रदर्शन की कल्पना कीजिए जहाँ जम्मू-कश्मीर का स्पेशल स्टेटस बहाल करने के नारे गूंज रहे हों।' उन्होंने यह भी कहा कि 'यह दुखद है कि एक चुनी हुई सरकार एक गैर-कानूनी और अधिकार छीनने वाले कदम को सामान्य बनाने का रास्ता चुन रही है।'

पीडीपी की शर्त और महबूबा मुफ्ती का रुख

पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने 18 जुलाई को नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन से सशर्त दूरी बनाई थी। उन्होंने एक्स पर स्पष्ट किया था कि पीडीपी तभी शामिल होगी जब अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई एजेंडे का केंद्रीय हिस्सा हों।

महबूबा मुफ्ती ने कहा था, 'सिर्फ राज्य का दर्जा बहाल करने तक सीमित विरोध प्रदर्शन में शामिल होना अनुच्छेद 370 की बहाली के हमारे व्यापक संवैधानिक संघर्ष के ताबूत में आखिरी कील ठोकने जैसा होगा। इससे भाजपा के 5 अगस्त, 2019 के गैर-कानूनी कदमों को वैधता मिलने का संदेश जाएगा।'

18 जुलाई की एक्स पोस्ट में इल्तिजा का पूर्व-चेतावनी

गौरतलब है कि 18 जुलाई को ही इल्तिजा मुफ्ती ने एक्स पर लिख दिया था कि पीडीपी जंतर-मंतर प्रदर्शन में तभी शामिल होगी जब जम्मू-कश्मीर के स्पेशल स्टेटस की बहाली मुख्य माँग हो। उन्होंने चेताया था कि इसके बिना यह आयोजन 5 अगस्त 2019 के 'काले, असंवैधानिक और अधिकार छीनने वाले फैसलों' पर पर्दा डालने जैसा होगा।

व्यापक राजनीतिक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में चुनी हुई सरकार केंद्र से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग कर रही है। आलोचकों का कहना है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के बीच एजेंडे पर यह मतभेद कश्मीरी राजनीति में गहरे वैचारिक विभाजन को उजागर करता है — एक पक्ष व्यावहारिक राज्य-दर्जे की माँग को प्राथमिकता देता है, जबकि दूसरा अनुच्छेद 370 की पूर्ण बहाली को अपरिहार्य मानता है। यह पहली बार नहीं है कि दोनों दलों के बीच रणनीतिक मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए हों।

आगे क्या

पीडीपी की अनुपस्थिति में नेशनल कॉन्फ्रेंस का यह प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर के विपक्षी एकजुटता के दावों पर सवाल खड़े करता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जब तक दोनों दल साझा न्यूनतम कार्यक्रम पर सहमत नहीं होते, केंद्र पर दबाव बनाने की उनकी क्षमता सीमित रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

वैचारिक है — और यही इसकी असली कीमत है। जब कश्मीर के दो सबसे बड़े क्षेत्रीय दल एक साझा मंच पर एजेंडे पर सहमत नहीं हो पाते, तो केंद्र को दबाव में लाने की उनकी सामूहिक क्षमता कमज़ोर पड़ती है। इल्तिजा मुफ्ती की आलोचना तीखी है, लेकिन यह सवाल भी उठता है कि पीडीपी खुद अनुच्छेद 370 बहाली के लिए ज़मीनी स्तर पर क्या ठोस कदम उठा रही है। प्रतीकात्मकता की आलोचना तब ज़्यादा विश्वसनीय होती है जब आलोचक खुद वैकल्पिक कार्यक्रम सामने रखे।
RashtraPress
5 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इल्तिजा मुफ्ती ने फारूक अब्दुल्ला के प्रदर्शन को प्रतीकात्मक क्यों कहा?
इल्तिजा मुफ्ती का कहना है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस का यह प्रदर्शन अनुच्छेद 370 की बहाली की माँग के बिना आयोजित किया गया, जिससे यह महज एक औपचारिकता बनकर रह गया। उनके अनुसार, जंतर-मंतर जैसे प्रमुख स्थल पर विशेष दर्जे की बहाली की माँग के साथ प्रदर्शन होना चाहिए था।
पीडीपी ने जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल होने से क्यों इनकार किया?
पीडीपी की शर्त थी कि प्रदर्शन के एजेंडे में अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई को प्राथमिकता दी जाए। चूँकि नेशनल कॉन्फ्रेंस ने इन माँगों को केंद्रीय एजेंडे में नहीं रखा, इसलिए पीडीपी ने दूरी बनाए रखी।
महबूबा मुफ्ती का 5 अगस्त 2019 के फैसलों से क्या आपत्ति है?
महबूबा मुफ्ती 5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के केंद्र सरकार के फैसले को असंवैधानिक मानती हैं। उनका कहना है कि केवल राज्य-दर्जे की माँग तक सीमित रहना इन फैसलों को अप्रत्यक्ष रूप से स्वीकार करने जैसा होगा।
नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के बीच इस मतभेद का क्या असर होगा?
दोनों दलों के बीच एजेंडे पर यह सार्वजनिक विभाजन जम्मू-कश्मीर के विपक्षी गठबंधन को कमज़ोर करता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जब तक दोनों दल साझा न्यूनतम कार्यक्रम नहीं बनाते, केंद्र पर दबाव बनाने की उनकी क्षमता सीमित रहेगी।
जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा कब मिलेगा?
केंद्र सरकार ने पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया है, लेकिन अभी तक कोई निश्चित समय-सीमा घोषित नहीं की गई है। उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली चुनी हुई सरकार इस माँग को लगातार केंद्र के सामने उठाती रही है।
राष्ट्र प्रेस
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