जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड प्रदर्शन पर इल्तिजा मुफ्ती का वार: 'अनुच्छेद 370 बिना यह महज़ प्रतीकात्मक'
सारांश
मुख्य बातें
पीडीपी नेता इल्तिजा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला के नेतृत्व में नई दिल्ली में आयोजित जम्मू-कश्मीर स्टेटहुड बहाली प्रदर्शन को 'प्रतीकात्मक' करार दिया है। 20 जुलाई को एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर उन्होंने सवाल उठाया कि अनुच्छेद 370 की बहाली की माँग के बिना यह आयोजन किस काम का है।
इल्तिजा मुफ्ती ने क्या कहा
इल्तिजा मुफ्ती ने एक्स पर लिखा, 'दिल्ली के किसी आम क्लब में बिना किसी जोश के, जानबूझकर हल्के-फुल्के ढंग से और बिना आर्टिकल 370 का ज़िक्र किए आयोजित एक-दिवसीय कार्यक्रम के बजाय, जरा जंतर-मंतर पर उस विरोध-प्रदर्शन की कल्पना कीजिए जहाँ जम्मू-कश्मीर का स्पेशल स्टेटस बहाल करने के नारे गूंज रहे हों।' उन्होंने यह भी कहा कि 'यह दुखद है कि एक चुनी हुई सरकार एक गैर-कानूनी और अधिकार छीनने वाले कदम को सामान्य बनाने का रास्ता चुन रही है।'
पीडीपी की शर्त और महबूबा मुफ्ती का रुख
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने 18 जुलाई को नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रस्तावित जंतर-मंतर प्रदर्शन से सशर्त दूरी बनाई थी। उन्होंने एक्स पर स्पष्ट किया था कि पीडीपी तभी शामिल होगी जब अनुच्छेद 370 की बहाली और राजनीतिक कैदियों की रिहाई एजेंडे का केंद्रीय हिस्सा हों।
महबूबा मुफ्ती ने कहा था, 'सिर्फ राज्य का दर्जा बहाल करने तक सीमित विरोध प्रदर्शन में शामिल होना अनुच्छेद 370 की बहाली के हमारे व्यापक संवैधानिक संघर्ष के ताबूत में आखिरी कील ठोकने जैसा होगा। इससे भाजपा के 5 अगस्त, 2019 के गैर-कानूनी कदमों को वैधता मिलने का संदेश जाएगा।'
18 जुलाई की एक्स पोस्ट में इल्तिजा का पूर्व-चेतावनी
गौरतलब है कि 18 जुलाई को ही इल्तिजा मुफ्ती ने एक्स पर लिख दिया था कि पीडीपी जंतर-मंतर प्रदर्शन में तभी शामिल होगी जब जम्मू-कश्मीर के स्पेशल स्टेटस की बहाली मुख्य माँग हो। उन्होंने चेताया था कि इसके बिना यह आयोजन 5 अगस्त 2019 के 'काले, असंवैधानिक और अधिकार छीनने वाले फैसलों' पर पर्दा डालने जैसा होगा।
व्यापक राजनीतिक संदर्भ
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में चुनी हुई सरकार केंद्र से पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की माँग कर रही है। आलोचकों का कहना है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी के बीच एजेंडे पर यह मतभेद कश्मीरी राजनीति में गहरे वैचारिक विभाजन को उजागर करता है — एक पक्ष व्यावहारिक राज्य-दर्जे की माँग को प्राथमिकता देता है, जबकि दूसरा अनुच्छेद 370 की पूर्ण बहाली को अपरिहार्य मानता है। यह पहली बार नहीं है कि दोनों दलों के बीच रणनीतिक मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए हों।
आगे क्या
पीडीपी की अनुपस्थिति में नेशनल कॉन्फ्रेंस का यह प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर के विपक्षी एकजुटता के दावों पर सवाल खड़े करता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जब तक दोनों दल साझा न्यूनतम कार्यक्रम पर सहमत नहीं होते, केंद्र पर दबाव बनाने की उनकी क्षमता सीमित रहेगी।