अनुच्छेद 370 हटाने की जिम्मेदार महबूबा मुफ्ती — नेशनल कॉन्फ्रेंस का 'दिमागी नक्सल' बयान पर पलटवार
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस (JKNC) ने सोमवार, 17 अगस्त को पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती के 'दिमागी नक्सल' वाले बयान पर तीखा पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि उनकी पार्टी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) ही उन राजनीतिक घटनाक्रमों की मूल जिम्मेदार है, जिनकी परिणति 2019 में अनुच्छेद 370 की समाप्ति के रूप में हुई। नेशनल कॉन्फ्रेंस का कहना है कि अगर PDP ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ गठबंधन न किया होता, तो यह संवैधानिक बदलाव कभी नहीं आता।
विवाद की पृष्ठभूमि
'दिमागी नक्सल' पद को लेकर यह सियासी तूफान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण के बाद उठा, जिसमें उन्होंने चेतावनी दी थी कि सशस्त्र नक्सलवाद से निपटने में काफी प्रगति के बावजूद इस विचारधारा का एक सूक्ष्म रूप देश के लिए चुनौती बना हुआ है। इसके बाद महबूबा मुफ्ती ने खुद को 'दिमागी नक्सल' कहते हुए स्पष्ट किया कि वे अनुच्छेद 370 के समर्थन में अपना रुख बरकरार रखती हैं और इसे हटाने का विरोध जारी रखेंगी।
नेशनल कॉन्फ्रेंस का आरोप
नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता तनवीर सादिक ने महबूबा मुफ्ती की टिप्पणी पर कड़ा सवाल उठाते हुए कहा, 'एक मुख्यमंत्री या पूर्व मुख्यमंत्री अगर वह ऐसी बात कहती है जिसके लिए वह खुद जिम्मेदार है, तो यह बहुत अजीब लगता है।' उन्होंने याद दिलाया कि 2014 के विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने PDP को स्पष्ट रूप से आगाह किया था कि BJP को सरकार में शामिल न किया जाए, क्योंकि उनके घोषणापत्र में अनुच्छेद 370 को हटाने का वादा था।
सादिक के अनुसार, उमर अब्दुल्ला ने उस समय कहा था, 'हम आपको बिना शर्त समर्थन देंगे, BJP को मत लाइए क्योंकि उनके घोषणापत्र में अनुच्छेद 370 को हटाने की बात है।' इस चेतावनी के बावजूद PDP ने BJP के साथ गठबंधन सरकार बनाई।
सादिक का सीधा आरोप
तनवीर सादिक ने बिना लाग-लपेट के कहा, '2019 में जो हुआ, वह उसी गठबंधन की वजह से हुआ। अगर उन्होंने BJP के साथ गठबंधन नहीं किया होता, तो 2019 वाली घटना कभी नहीं होती। ये सब सिर्फ दिखावटी आंसू हैं। 2019 की घटनाओं के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार महबूबा मुफ्ती साहिबा ही हैं।' नेशनल कॉन्फ्रेंस ने यह भी दावा किया कि उसने BJP के घोषित रुख का हवाला देते हुए उसे सरकार में शामिल करने के खिलाफ पहले ही आगाह किया था।
राजनीतिक संदर्भ और व्यापक असर
गौरतलब है कि 2014 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था, जिसके बाद PDP और BJP ने मिलकर गठबंधन सरकार बनाई थी। यह गठबंधन 2018 में टूट गया, जिसके बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हुआ और अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को निरस्त कर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया। यह बहस ऐसे समय में सामने आई है जब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों की संभावना को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ रही है।
आगे की राह
महबूबा मुफ्ती और PDP की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जम्मू-कश्मीर की राजनीति में यह आरोप-प्रत्यारोप का दौर आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है, खासकर जब 'दिमागी नक्सल' की बहस राष्ट्रीय स्तर पर गर्म है।