7 अगस्त 2026
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महबूबा मुफ्ती का आरोप: अनुच्छेद 370 बहाली की मांग के कारण पीडीपी को बनाया जा रहा निशाना

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महबूबा मुफ्ती का आरोप: अनुच्छेद 370 बहाली की मांग के कारण पीडीपी को बनाया जा रहा निशाना

सारांश

महबूबा मुफ्ती का आरोप सिर्फ पार्टी की शिकायत नहीं — यह जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 की बहाली की मांग पर बढ़ते राजनीतिक दबाव का संकेत है। इल्तिजा मुफ्ती की पुलिस पूछताछ और विरोध मार्च पर रोक ने पीडीपी को एक नई राजनीतिक लड़ाई का मंच दे दिया है।

मुख्य बातें

महबूबा मुफ्ती ने 7 अगस्त 2026 को श्रीनगर में आरोप लगाया कि पीडीपी को BJP और RSS द्वारा इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि वह अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली की मांग कर रही है।
5 अगस्त 2026 को अनुच्छेद 370 हटाने की सातवीं बरसी पर विरोध के दौरान इल्तिजा मुफ्ती पर एक पुलिसकर्मी के साथ कथित मारपीट का मामला कोठीबाग पुलिस स्टेशन में दर्ज हुआ।
पीडीपी के विरोध मार्च को श्रीनगर की सड़कों पर ले जाने की अनुमति नहीं दी गई; नेताओं और कार्यकर्ताओं को रेजिडेन्सी रोड पर पार्टी मुख्यालय तक सीमित रखा गया।
महबूबा ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर आरोप लगाया कि 5 जुलाई के विरोध प्रदर्शनों के दौरान वे मुद्दे से बचने के लिए पुंछ और राजौरी चले गए।
मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के 1981 के बयान का हवाला देते हुए नेशनल कॉन्फ्रेंस के रुख पर सवाल उठाए।

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने 7 अगस्त 2026 को श्रीनगर में आरोप लगाया कि उनकी पार्टी को दक्षिणपंथी ताकतों द्वारा इसलिए निशाना बनाया जा रहा है क्योंकि पीडीपी ही एकमात्र राजनीतिक दल है जो अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए की बहाली की खुलकर मांग कर रहा है। यह बयान उस दिन आया जब उनकी बेटी इल्तिजा मुफ्ती को एक पुलिसकर्मी पर कथित हमले के मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

5 अगस्त 2026 को अनुच्छेद 370 हटाए जाने की सातवीं बरसी पर विरोध प्रदर्शन के दौरान कोठीबाग पुलिस स्टेशन, श्रीनगर में एक एफआईआर दर्ज की गई। इसमें इल्तिजा मुफ्ती पर आरोप है कि उन्होंने ड्यूटी पर तैनात एक पुलिसकर्मी के साथ मारपीट की। पीडीपी कार्यकर्ता इल्तिजा के साथ पुलिस स्टेशन जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें रास्ते में रोक दिया गया, जबकि इल्तिजा शुक्रवार को अकेले पुलिस स्टेशन पहुँचीं।

महबूबा मुफ्ती का विरोध प्रदर्शन

महबूबा मुफ्ती ने श्रीनगर में विरोध प्रदर्शन किया और पत्रकारों से कहा कि आरएसएस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पीडीपी को तोड़ने और डराने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'हमारी पार्टी को तोड़ने की हर कोशिश की गई। हमें परेशान और डराया-धमकाया गया। क्या नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस ने राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए विरोध प्रदर्शन नहीं किया? हमारे विरोध को ही क्यों रोका गया? जिन लोगों ने अनुच्छेद 370 को हटाने में मदद की और जो लोगों की मौजूदा दुर्दशा के लिए जिम्मेदार हैं, वे आज बेनकाब हो गए हैं।' पीडीपी के विरोध मार्च को शहर की सड़कों पर ले जाने की अनुमति नहीं दी गई और नेताओं व कार्यकर्ताओं को रेजिडेन्सी रोड स्थित पार्टी मुख्यालय तक ही सीमित कर दिया गया।

नेशनल कॉन्फ्रेंस पर निशाना

मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने 1981 में कहा था कि अनुच्छेद 370 कोई कुरान की आयत नहीं है और यदि यह जम्मू-कश्मीर के विकास में बाधा बने तो इसे हटाया जा सकता है। यह बयान नेशनल कॉन्फ्रेंस के मौजूदा रुख पर सवाल उठाने के लिए दिया गया। गौरतलब है कि यह बयान राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के उस व्यापक संदर्भ में आता है जो घाटी में अनुच्छेद 370 की बहाली के मुद्दे पर दलों के बीच गहरी खाई बनाए हुए है।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर आरोप

महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि 5 जुलाई को जब सभी राजनीतिक दल राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे, तब मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने इस मुद्दे पर कुछ भी कहने से बचने के लिए जम्मू क्षेत्र के पुंछ और राजौरी जिलों का दौरा चुना। यह आरोप जम्मू-कश्मीर में सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और विपक्षी पीडीपी के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव को रेखांकित करता है।

आगे क्या

इल्तिजा मुफ्ती के खिलाफ दर्ज एफआईआर की जाँच जारी है। पीडीपी ने स्पष्ट किया है कि वह अनुच्छेद 370 और 35ए की बहाली की मांग से पीछे नहीं हटेगी। यह घटनाक्रम जम्मू-कश्मीर की राजनीति में आने वाले दिनों में और तनाव पैदा कर सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस सत्ता में है और कांग्रेस राष्ट्रीय स्तर पर सतर्क रुख अपनाए हुए है। इल्तिजा मुफ्ती पर दर्ज एफआईआर को पीडीपी राजनीतिक उत्पीड़न बता रही है, लेकिन पुलिस का कहना है कि यह एक नियमित कानूनी प्रक्रिया है — यह विरोधाभास ही घाटी की राजनीतिक जटिलता को उजागर करता है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूक जाती है वह यह है कि अनुच्छेद 370 की बरसी पर हर साल यही तनाव उभरता है, लेकिन ज़मीनी बदलाव की रफ्तार बेहद धीमी रही है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महबूबा मुफ्ती ने पीडीपी को निशाना बनाए जाने का आरोप क्यों लगाया?
महबूबा मुफ्ती का कहना है कि पीडीपी एकमात्र ऐसी पार्टी है जो अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए की बहाली की मांग कर रही है, इसलिए BJP और RSS उसे निशाना बना रहे हैं। उन्होंने पार्टी को तोड़ने और डराने की कोशिशों का भी आरोप लगाया।
इल्तिजा मुफ्ती पर क्या आरोप है?
5 अगस्त 2026 को अनुच्छेद 370 हटाने की सातवीं बरसी पर विरोध प्रदर्शन के दौरान इल्तिजा मुफ्ती पर एक ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी के साथ कथित मारपीट का आरोप है। यह एफआईआर श्रीनगर के कोठीबाग पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी।
पीडीपी के विरोध मार्च को क्यों रोका गया?
पीडीपी के विरोध मार्च को श्रीनगर की सड़कों पर ले जाने की अनुमति नहीं दी गई। नेताओं और कार्यकर्ताओं को रेजिडेन्सी रोड स्थित पार्टी मुख्यालय तक ही सीमित रखा गया। पुलिस ने कार्यकर्ताओं को इल्तिजा मुफ्ती के साथ पुलिस स्टेशन जाने से भी रोका।
महबूबा मुफ्ती ने उमर अब्दुल्ला पर क्या आरोप लगाया?
महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया कि 5 जुलाई को राज्य का दर्जा बहाली की मांग पर विरोध प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इस मुद्दे से बचने के लिए जम्मू के पुंछ और राजौरी जिलों के दौरे पर चले गए।
महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस पर क्या सवाल उठाए?
महबूबा मुफ्ती ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के 1981 के उस बयान का हवाला दिया जिसमें उन्होंने कहा था कि अनुच्छेद 370 कोई कुरान की आयत नहीं है और यदि यह विकास में बाधा बने तो इसे हटाया जा सकता है। इससे उन्होंने नेशनल कॉन्फ्रेंस के मौजूदा रुख पर सवाल खड़े किए।
राष्ट्र प्रेस
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