21 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

यूपी को चार टुकड़ों में बाँटने की योजना? इमरान प्रतापगढ़ी ने BJP से माँगा जवाब

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
यूपी को चार टुकड़ों में बाँटने की योजना? इमरान प्रतापगढ़ी ने BJP से माँगा जवाब

सारांश

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने एक साथ चार बड़े मुद्दे उठाए — यूपी विभाजन पर राजभर का बयान, रामदेव की 'गृहयुद्ध' चेतावनी, एसआईआर में आम मतदाताओं के साथ भेदभाव और सपा-कांग्रेस गठजोड़ की शर्तें। BJP से सीधा जवाब माँगकर उन्होंने विपक्षी हमले की धार तेज़ की है।

मुख्य बातें

इमरान प्रतापगढ़ी ने 21 सितंबर 2026 को BJP से माँगा कि उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बाँटने की कथित योजना पर स्थिति स्पष्ट करे।
कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कथित तौर पर यूपी के चार टुकड़ों और पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने की बात कही थी।
बाबा रामदेव द्वारा सामाजिक खाई और गृहयुद्ध की आशंका जताए जाने पर प्रतापगढ़ी ने सरकार से जवाब माँगा।
दिल्ली में एसआईआर नोटिस प्रक्रिया पर चुनाव आयोग को घेरा; CM रेखा गुप्ता के मामले में त्वरित कार्रवाई और आम नागरिकों से भेदभाव का आरोप।
सपा-कांग्रेस गठबंधन पर प्रतापगढ़ी ने शर्त रखी — पहले 2013 में गठबंधन टूटने का कारण स्पष्ट हो।

कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने 21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में उत्तर प्रदेश के चार हिस्सों में विभाजन की संभावना पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण की माँग की। यह प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि आने वाले समय में यूपी को चार हिस्सों में बाँटा जा सकता है और पूर्वांचल के अलग राज्य बनने पर राजभर समाज का व्यक्ति मुख्यमंत्री बन सकता है।

राजभर के बयान पर प्रतापगढ़ी की प्रतिक्रिया

प्रतापगढ़ी ने कहा कि ओम प्रकाश राजभर गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के करीबी माने जाते हैं। ऐसे में यूपी सरकार के एक कैबिनेट मंत्री का यह बयान कि प्रदेश को चार हिस्सों में बाँटने की योजना है, गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या गृह मंत्रालय या केंद्र सरकार के स्तर पर उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन को लेकर कोई विचार चल रहा है।

उनका कहना था कि BJP को यह स्पष्ट करना चाहिए कि राजभर का बयान सरकार की नीति है या उनका निजी राजनीतिक विचार। यदि सरकार के स्तर पर ऐसी कोई योजना नहीं है, तो भाजपा को सार्वजनिक रूप से इसका खंडन करना चाहिए।

रामदेव की 'गृहयुद्ध' टिप्पणी पर सवाल

बाबा रामदेव द्वारा सवर्ण और अन्य सामाजिक वर्गों के बीच बढ़ती खाई और गृहयुद्ध जैसी स्थिति की आशंका जताए जाने पर भी प्रतापगढ़ी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संभव है कि रामदेव के पास सरकार की कोई आंतरिक रिपोर्ट पहुँची हो, जिसके आधार पर उन्हें लग रहा हो कि सामाजिक खाई बढ़ रही है।

कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार के करीबी माने जाने वाले लोगों के इस तरह के बयान राजनीतिक माहौल में बदलाव का संकेत देते हैं। उनके अनुसार, यही कारण है कि हाल के समय में रामदेव के सुर और स्वर दोनों बदले हुए नज़र आ रहे हैं।

एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग पर निशाना

दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के अंतर्गत मतदाताओं को जारी नोटिसों पर प्रतापगढ़ी ने चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले दिन से इस प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज करते रहे हैं और इस संबंध में प्रस्तुतीकरण भी दे चुके हैं।

उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी वरिष्ठ राजनीतिक व्यक्ति को नोटिस मिलने पर चुनाव आयोग कुछ घंटों में कार्रवाई कर मामला ठीक कर देता है, तो किसी दूरदराज के गाँव की महिला या सामान्य नागरिक को ऐसी ही समस्या होने पर क्या उतनी ही त्वरित कार्रवाई होती है? उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर की प्रक्रिया आम मतदाताओं की गरिमा और लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ कर रही है।

गौरतलब है कि प्रतापगढ़ी ने बंगाल की मतदाता सूची से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया, जहाँ कथित तौर पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए और बाद में उनमें से कुछ को पुनः मतदाता माना गया। उनका कहना था कि पात्र नागरिक किसी भी प्रक्रियागत कारण से अपने मताधिकार से वंचित नहीं होने चाहिए।

सपा-कांग्रेस गठबंधन की संभावना पर टिप्पणी

समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के बीच संभावित चुनावी सहयोग की अपीलों पर प्रतापगढ़ी ने सीधा उत्तर देने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि 2013 में समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन क्यों छोड़ा था। उनके अनुसार, इस सवाल का संतोषजनक जवाब मिलने के बाद ही किसी भविष्य की राजनीतिक पेशकश पर विचार किया जा सकता है।

राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की स्थिति

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ रही है और विपक्ष एकजुटता की दिशा में कदम तलाश रहा है। राजभर का पूर्वांचल राज्य संबंधी बयान, रामदेव की सामाजिक तनाव की चेतावनी और एसआईआर विवाद — तीनों मुद्दे अलग-अलग होते हुए भी एक साझा राजनीतिक संदेश देते हैं कि विपक्ष सत्तारूढ़ गठबंधन की आंतरिक असहमतियों को केंद्र में लाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले हफ्तों में BJP और केंद्र सरकार की ओर से इन सवालों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे की रणनीति साफ़ है — राजभर के बयान को BJP की आंतरिक असहमति के रूप में स्थापित करना। असली सवाल यह है कि क्या राजभर जैसे छोटे सहयोगी दल अब सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर खुलकर अलग स्वर बोलने लगे हैं, और यदि हाँ, तो यह यूपी की चुनावी राजनीति में किस बदलाव का संकेत है। एसआईआर पर 'CM को तुरंत राहत, आम वोटर को नहीं' वाला तर्क राजनीतिक रूप से धारदार है और मीडिया में गूँज बनाने में सक्षम है — लेकिन मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस संस्थागत असमानता के ढाँचे को छोड़कर बयानबाज़ी पर केंद्रित हो जाती है।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओम प्रकाश राजभर ने यूपी विभाजन पर क्या कहा था?
राजभर ने कथित तौर पर कहा कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बाँटा जा सकता है और पूर्वांचल के अलग राज्य बनने पर राजभर समाज का व्यक्ति मुख्यमंत्री बन सकता है। यह बयान इसलिए चर्चा में है क्योंकि राजभर यूपी सरकार के कैबिनेट मंत्री हैं।
इमरान प्रतापगढ़ी ने BJP से क्या माँग की?
प्रतापगढ़ी ने BJP और केंद्र सरकार से यह स्पष्ट करने की माँग की कि क्या गृह मंत्रालय के स्तर पर उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन की कोई योजना चल रही है, या राजभर का बयान उनका निजी राजनीतिक विचार है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी कोई सरकारी योजना नहीं है तो BJP को सार्वजनिक रूप से इसका खंडन करना चाहिए।
दिल्ली में एसआईआर नोटिस विवाद क्या है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत दिल्ली में बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस जारी किए गए हैं, जिनमें BJP की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। प्रतापगढ़ी का आरोप है कि वरिष्ठ राजनेताओं के मामले कुछ घंटों में हल हो जाते हैं, जबकि ग्रामीण और सामान्य मतदाताओं को दस्तावेज़ जुटाने में भारी परेशानी होती है।
सपा और कांग्रेस के गठबंधन पर प्रतापगढ़ी का क्या रुख है?
प्रतापगढ़ी ने गठबंधन की संभावना पर सीधा जवाब देने से बचते हुए शर्त रखी कि पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि 2013 में समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन क्यों तोड़ा था। इसका अर्थ है कि कांग्रेस किसी भी भविष्य के सहयोग से पहले सपा से जवाब माँग रही है।
बाबा रामदेव की 'गृहयुद्ध' टिप्पणी पर विवाद क्यों है?
रामदेव ने कथित तौर पर सवर्ण और अन्य सामाजिक वर्गों के बीच बढ़ती खाई और गृहयुद्ध जैसी स्थिति की आशंका जताई। प्रतापगढ़ी ने इसे संवेदनशील बताते हुए कहा कि सरकार के करीबी माने जाने वाले व्यक्ति का ऐसा बयान राजनीतिक माहौल में बड़े बदलाव का संकेत देता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 3 घंटे पहले
  2. 5 घंटे पहले
  3. 8 घंटे पहले
  4. 3 सप्ताह पहले
  5. 3 महीने पहले
  6. 3 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 3 महीने पहले