यूपी को चार टुकड़ों में बाँटने की योजना? इमरान प्रतापगढ़ी ने BJP से माँगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने 21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में उत्तर प्रदेश के चार हिस्सों में विभाजन की संभावना पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण की माँग की। यह प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि आने वाले समय में यूपी को चार हिस्सों में बाँटा जा सकता है और पूर्वांचल के अलग राज्य बनने पर राजभर समाज का व्यक्ति मुख्यमंत्री बन सकता है।
राजभर के बयान पर प्रतापगढ़ी की प्रतिक्रिया
प्रतापगढ़ी ने कहा कि ओम प्रकाश राजभर गृह मंत्री और प्रधानमंत्री के करीबी माने जाते हैं। ऐसे में यूपी सरकार के एक कैबिनेट मंत्री का यह बयान कि प्रदेश को चार हिस्सों में बाँटने की योजना है, गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि क्या गृह मंत्रालय या केंद्र सरकार के स्तर पर उत्तर प्रदेश के पुनर्गठन को लेकर कोई विचार चल रहा है।
उनका कहना था कि BJP को यह स्पष्ट करना चाहिए कि राजभर का बयान सरकार की नीति है या उनका निजी राजनीतिक विचार। यदि सरकार के स्तर पर ऐसी कोई योजना नहीं है, तो भाजपा को सार्वजनिक रूप से इसका खंडन करना चाहिए।
रामदेव की 'गृहयुद्ध' टिप्पणी पर सवाल
बाबा रामदेव द्वारा सवर्ण और अन्य सामाजिक वर्गों के बीच बढ़ती खाई और गृहयुद्ध जैसी स्थिति की आशंका जताए जाने पर भी प्रतापगढ़ी ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि संभव है कि रामदेव के पास सरकार की कोई आंतरिक रिपोर्ट पहुँची हो, जिसके आधार पर उन्हें लग रहा हो कि सामाजिक खाई बढ़ रही है।
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार के करीबी माने जाने वाले लोगों के इस तरह के बयान राजनीतिक माहौल में बदलाव का संकेत देते हैं। उनके अनुसार, यही कारण है कि हाल के समय में रामदेव के सुर और स्वर दोनों बदले हुए नज़र आ रहे हैं।
एसआईआर प्रक्रिया और चुनाव आयोग पर निशाना
दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के अंतर्गत मतदाताओं को जारी नोटिसों पर प्रतापगढ़ी ने चुनाव आयोग (ECI) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पहले दिन से इस प्रक्रिया पर आपत्ति दर्ज करते रहे हैं और इस संबंध में प्रस्तुतीकरण भी दे चुके हैं।
उन्होंने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि किसी वरिष्ठ राजनीतिक व्यक्ति को नोटिस मिलने पर चुनाव आयोग कुछ घंटों में कार्रवाई कर मामला ठीक कर देता है, तो किसी दूरदराज के गाँव की महिला या सामान्य नागरिक को ऐसी ही समस्या होने पर क्या उतनी ही त्वरित कार्रवाई होती है? उन्होंने आरोप लगाया कि एसआईआर की प्रक्रिया आम मतदाताओं की गरिमा और लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ कर रही है।
गौरतलब है कि प्रतापगढ़ी ने बंगाल की मतदाता सूची से जुड़े विवाद का भी उल्लेख किया, जहाँ कथित तौर पर बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए और बाद में उनमें से कुछ को पुनः मतदाता माना गया। उनका कहना था कि पात्र नागरिक किसी भी प्रक्रियागत कारण से अपने मताधिकार से वंचित नहीं होने चाहिए।
सपा-कांग्रेस गठबंधन की संभावना पर टिप्पणी
समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस के बीच संभावित चुनावी सहयोग की अपीलों पर प्रतापगढ़ी ने सीधा उत्तर देने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि पहले यह स्पष्ट होना चाहिए कि 2013 में समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन क्यों छोड़ा था। उनके अनुसार, इस सवाल का संतोषजनक जवाब मिलने के बाद ही किसी भविष्य की राजनीतिक पेशकश पर विचार किया जा सकता है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और आगे की स्थिति
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ रही है और विपक्ष एकजुटता की दिशा में कदम तलाश रहा है। राजभर का पूर्वांचल राज्य संबंधी बयान, रामदेव की सामाजिक तनाव की चेतावनी और एसआईआर विवाद — तीनों मुद्दे अलग-अलग होते हुए भी एक साझा राजनीतिक संदेश देते हैं कि विपक्ष सत्तारूढ़ गठबंधन की आंतरिक असहमतियों को केंद्र में लाने की कोशिश कर रहा है। आने वाले हफ्तों में BJP और केंद्र सरकार की ओर से इन सवालों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देखने को मिल सकती है।