यूपी विभाजन पर राजभर के बयान को बृजभूषण ने बताया चुनावी जुमला, कहा — 'UP की स्थिति नहीं जानते'
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने 21 सितंबर 2026 को अयोध्या स्थित हनुमानगढ़ी का दौरा किया और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री तथा सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर के यूपी को चार हिस्सों में बाँटने और राजभर समुदाय से मुख्यमंत्री बनाने के बयान को सीधे तौर पर 'चुनावी जुमला' करार दिया। बृजभूषण ने मीडिया से बातचीत में कहा कि राजभर को उत्तर प्रदेश की वास्तविक परिस्थितियों का कोई ज्ञान नहीं है।
बृजभूषण ने क्या कहा
मीडिया से मुखातिब होते हुए बृज भूषण शरण सिंह ने कहा, 'यह चुनावी जुमला और बिना सोचे-समझे दिया गया बयान है। आज उत्तर प्रदेश की पहचान पूरे देश में है, मुख्य रूप से इसलिए क्योंकि यह एकमात्र ऐसा राज्य है, जो संसद में 80 सांसद भेजता है। यही उत्तर प्रदेश की ताकत और अनूठी विशेषता है। भारत सरकार की ओर से ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है, न ही योगी जी की सरकार की ओर से।'
उन्होंने आगे कहा कि इस तरह के निराधार बयान केवल 'सस्ती लोकप्रियता' हासिल करने की कोशिश हैं और इन्हें गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है।
राजभर ने क्या कहा था
दरअसल, मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कुछ दिनों पूर्व देवरिया में आयोजित एक सामाजिक समरसता रैली में यह दावा किया था कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश चार हिस्सों में बँट जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि पूर्वांचल एक अलग राज्य बनता है, तो वहाँ राजभर समाज का बेटा मुख्यमंत्री बनेगा। इसके अलावा उन्होंने आरक्षण में हिस्सेदारी और जातिगत जनगणना का मुद्दा भी उठाया।
चुनावी पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव फरवरी-मार्च के बीच होने की संभावना जताई जा रही है। चुनाव नजदीक आते देख राज्य के सभी प्रमुख राजनीतिक दल अभी से जनसंपर्क अभियान और रैलियों में जुट गए हैं। यह ऐसे समय में आया है जब सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर ही अलग-अलग स्वर उभरने लगे हैं, जिससे सियासी समीकरणों पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों की भी दिलचस्पी बढ़ गई है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य के विभाजन का प्रस्ताव संवैधानिक दृष्टि से अत्यंत जटिल प्रक्रिया है और केंद्र सरकार की मंजूरी के बिना यह संभव नहीं है। ऐसे में राजभर का यह बयान व्यावहारिक नीतिगत मसले से अधिक एक चुनावी संदेश के रूप में देखा जा रहा है। वहीं बृजभूषण की तीखी प्रतिक्रिया भी यह संकेत देती है कि सत्ताधारी खेमे में इस मुद्दे पर एकता नहीं है। आने वाले महीनों में जातिगत जनगणना और पिछड़े वर्गों के आरक्षण जैसे मुद्दे यूपी की चुनावी बहस के केंद्र में बने रहेंगे।