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UP 2027 से पहले संजय निषाद का दावा: जातीय आबादी के आधार पर CM बने तो निषाद समाज सबसे आगे

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UP 2027 से पहले संजय निषाद का दावा: जातीय आबादी के आधार पर CM बने तो निषाद समाज सबसे आगे

सारांश

2027 से पहले UP की जातिगत राजनीति में नया मोर्चा खुल गया है। संजय निषाद ने राजभर के पूर्वांचल CM दावे का जवाब 18% आबादी के आँकड़े से दिया, UP विभाजन को नकारा और BJP से 150+ सीटों पर निषाद पार्टी को मौका देने की माँग रखी।

मुख्य बातें

संजय निषाद ने कहा कि जातीय आबादी के आधार पर CM बने तो निषाद समाज (करीब 18% जनसंख्या) सबसे बड़ा दावेदार है।
ओम प्रकाश राजभर के UP को चार हिस्सों में बाँटने और पूर्वांचल में राजभर CM के दावे को निषाद ने सीधे चुनौती दी।
निषाद ने UP के विभाजन का विरोध करते हुए बुंदेलखंड, पूर्वांचल, पश्चिमांचल समेत पूरे प्रदेश के समान विकास की पैरवी की।
निषाद पार्टी UP की सभी 403 सीटों पर संगठन मज़बूत कर रही है; प्रदेश को 10 प्रांतों में बाँटकर तैयारी शुरू।
निषाद ने दावा किया कि करीब 150-160 सीटों पर निषाद मतदाता निर्णायक भूमिका में हैं; BJP से उन सीटों पर अधिक अवसर माँगे जहाँ गठबंधन पहले हारा था।
ओवैसी के BJP-विरोधी गठबंधन प्रस्ताव और PDA की 'रोज़ बदलती' रणनीति पर कटाक्ष किया।

उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने 21 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में स्पष्ट किया कि यदि मुख्यमंत्री का चयन केवल जातीय जनसंख्या के आधार पर होना हो, तो निषाद समाज — जिसकी प्रदेश में आबादी करीब 18 प्रतिशत बताई जाती है — किसी भी अन्य समुदाय से कहीं आगे है। उनका यह बयान सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर के उस दावे की सीधी प्रतिक्रिया है, जिसमें राजभर ने पूर्वांचल को अलग राज्य बनने पर राजभर समाज के व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनाने की वकालत की थी।

राजभर के बयान पर निषाद की पलटवार

ओम प्रकाश राजभर ने हाल ही में उत्तर प्रदेश को चार भागों में विभाजित करने और जातीय जनगणना के बाद पूर्वांचल को स्वतंत्र राज्य बनाने की माँग उठाई थी। उनका तर्क था कि ऐसे में राजभर समाज से मुख्यमंत्री बनना स्वाभाविक होगा। संजय निषाद ने इस तर्क को सीधे चुनौती देते हुए कहा कि निषाद समाज की आबादी राजभर समाज से कई गुना अधिक है और प्रदेश के उन तमाम क्षेत्रों में इस समुदाय की उपस्थिति है जहाँ नदियाँ और नाले बहते हैं। हालाँकि, निषाद ने यह भी जोड़ा कि वर्तमान में प्रदेश का सबसे बड़ा मुद्दा जातिगत दावेदारी नहीं, बल्कि विकास है।

UP के विभाजन पर निषाद का रुख

संजय निषाद ने उत्तर प्रदेश को तोड़ने की किसी भी कोशिश का विरोध किया। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड, पूर्वांचल, पश्चिमांचल और मध्य क्षेत्र — सभी इलाकों का समान विकास होना चाहिए। उनके अनुसार, यदि राज्य के किसी नए टुकड़े में विकास बेहतर होने का कोई सिद्ध अनुभव होता, तो इस विचार पर विमर्श हो सकता था — लेकिन अभी ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश को एक मॉडल राज्य बताते हुए विकास और कानून-व्यवस्था में सुधार का दावा किया।

अखिलेश, ओवैसी और PDA पर निशाना

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की प्रस्तावित रथ यात्रा पर टिप्पणी करते हुए निषाद ने कहा कि राजनेताओं को विचारधारा के आधार पर तटस्थ होकर काम करना चाहिए। उन्होंने PDA (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) गठजोड़ को लेकर बदलते बयानों पर कटाक्ष किया और कहा कि रोज़ किसी नए सामाजिक समूह को जोड़ने या हटाने की घोषणाएँ किसी स्पष्ट राजनीतिक विचारधारा को नहीं दर्शातीं। असदुद्दीन ओवैसी द्वारा 2027 विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को रोकने के लिए समान विचारधारा वाले दलों से गठबंधन की संभावना जताने पर उन्होंने कहा कि जो दल कभी कांग्रेस की नीतियों के विरोध में बने थे, यदि वे अब उन्हीं नीतियों के साथ खड़े हों, तो उन्हें अपना राजनीतिक रुख स्पष्ट करना चाहिए।

2027 के लिए निषाद पार्टी की रणनीति

संजय निषाद ने बताया कि निषाद पार्टी उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर संगठन को मज़बूत करने की दिशा में काम कर रही है। इसके लिए प्रदेश को 10 प्रांतों में विभाजित कर संगठनात्मक तैयारी शुरू की गई है। प्रत्येक प्रांत में युवा मोर्चा, महिला मोर्चा, आईटी विंग और वरिष्ठ पदाधिकारी तैनात किए जाएँगे, और हर क्षेत्र के लिए प्रभारी व सह-प्रभारी नियुक्त होंगे।

निषाद ने दावा किया कि करीब 150 से 160 विधानसभा सीटों पर निषाद मतदाता चुनावी परिणाम को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। इसी आधार पर उन्होंने BJP से उन सीटों पर निषाद पार्टी को अधिक अवसर देने की माँग की, जहाँ पिछले चुनाव में गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा था। उनका तर्क है कि ऐसी सीटें पार्टी को सौंपे जाने पर संगठन और सामाजिक समीकरण के बल पर जीत हासिल की जा सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह भी कि असली मुद्दा विकास है। UP में 2027 से पहले हर छोटी पार्टी इसी तरह BJP पर सीट-दबाव बनाने की कोशिश कर रही है। असली सवाल यह है कि निषाद पार्टी को वास्तव में कितनी सीटें मिलती हैं और उनका '150 सीटों पर निर्णायक' होने का दावा क्या 2022 के नतीजों से मेल खाता है — जिसका जवाब अब तक स्पष्ट नहीं दिया गया।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संजय निषाद ने ओम प्रकाश राजभर के CM दावे का क्या जवाब दिया?
संजय निषाद ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री का चयन जातीय आबादी के आधार पर होना है, तो निषाद समाज — जिसकी उत्तर प्रदेश में जनसंख्या करीब 18 प्रतिशत बताई जाती है — राजभर समाज से कई गुना बड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में अभी विकास सबसे बड़ा मुद्दा है, जातिगत दावेदारी नहीं।
UP को चार भागों में बाँटने की माँग पर निषाद का क्या रुख है?
संजय निषाद ने उत्तर प्रदेश के विभाजन का विरोध किया। उनका कहना है कि बुंदेलखंड, पूर्वांचल, पश्चिमांचल और मध्य क्षेत्र — सभी का एक साथ विकास होना चाहिए। यदि नए राज्य बनने पर विकास बेहतर होने का कोई सिद्ध उदाहरण होता, तभी इस पर विचार हो सकता था।
2027 विधानसभा चुनाव के लिए निषाद पार्टी की रणनीति क्या है?
निषाद पार्टी UP की सभी 403 सीटों पर संगठन मज़बूत कर रही है और इसके लिए प्रदेश को 10 प्रांतों में बाँटा गया है। पार्टी ने BJP से उन सीटों पर अधिक अवसर माँगे हैं जहाँ 2022 में गठबंधन को हार मिली थी।
संजय निषाद ने ओवैसी और PDA पर क्या कहा?
असदुद्दीन ओवैसी के BJP-विरोधी गठबंधन प्रस्ताव पर निषाद ने कहा कि जो दल कांग्रेस की नीतियों के विरोध में बने थे, वे यदि अब उन्हीं के साथ खड़े हों तो अपना रुख स्पष्ट करें। PDA रणनीति पर उन्होंने तंज़ कसा कि रोज़ नए समूहों को जोड़ने-हटाने की घोषणाएँ किसी स्थिर विचारधारा को नहीं दर्शातीं।
निषाद समाज UP की कितनी सीटों पर निर्णायक भूमिका में है?
संजय निषाद के दावे के अनुसार करीब 150 से 160 विधानसभा सीटों पर निषाद मतदाता चुनावी परिणाम को प्रभावित करने की स्थिति में हैं। नदी और जलक्षेत्र वाले इलाकों में इस समुदाय की उपस्थिति सर्वाधिक है, जबकि शहरी क्षेत्रों में भी इनकी संख्या उल्लेखनीय है।
राष्ट्र प्रेस
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