यूपी विभाजन वाले बयान पर विपक्ष का पलटवार: 'ओपी राजभर को इलाज की ज़रूरत है'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओम प्रकाश राजभर के उत्तर प्रदेश को चार भागों में बाँटने और राजभर समुदाय से मुख्यमंत्री बनाने के बयान पर समाजवादी पार्टी (SP) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) ने 22 सितंबर 2026 को तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्षी नेताओं ने इस बयान को राजनीतिक स्वार्थ और समाज से 'गद्दारी' करार दिया।
राजभर का विवादित बयान क्या था
बीते सोमवार को मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने कहा था कि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और इसकी विशाल जनसंख्या को देखते हुए 'आज नहीं तो कल' इसका विभाजन अवश्यंभावी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि जिस दिन उत्तर प्रदेश चार भागों में बँटेगा, पूर्वांचल की आबादी के आधार पर उनके गठबंधन में 'पहला मुख्यमंत्री राजभर समुदाय का बेटा' होगा।
यह बयान राजनीतिक हलकों में हलचल मचाने के लिए पर्याप्त था, क्योंकि राज्य पुनर्गठन एक संवैधानिक और संवेदनशील विषय है।
समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया
नई दिल्ली में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन ने राजभर के बयान पर कड़ा प्रहार किया। सुमन ने कहा, 'कुछ लोग मानसिक रूप से परेशान हैं और कुछ मसखरे भी पार्टी में शामिल हो गए हैं। उन्होंने पहले ही अपने बेटे को मुख्यमंत्री घोषित कर दिया है।'
सुमन ने यह भी स्वीकार किया कि देश के विभिन्न हिस्सों से नए राज्यों की माँगें उठती रहती हैं और इसके लिए एक राज्य पुनर्गठन आयोग के गठन पर विचार होना चाहिए। हालाँकि, उनके अनुसार इस समय राज्य विभाजन की बात करना न्यायसंगत नहीं है।
कांग्रेस ने साधा निशाना
लखनऊ में कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने और भी कड़े शब्दों में राजभर की आलोचना की। उन्होंने कहा कि 'ओम प्रकाश राजभर को इलाज की ज़रूरत है।'
राजपूत ने राजभर पर 'गद्दारी' का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने पहले समाजवादी पार्टी के साथ चुनाव लड़ा और फिर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ सरकार बना ली। उन्होंने पूछा कि राजभर ने जो वादे किए थे — राजभर समाज के हाई स्कूल पास युवाओं को दरोगा बनाना और त्रिस्तरीय आरक्षण लागू कराना — वे पूरे क्यों नहीं हुए। उन्होंने सवाल किया, 'क्या राजभर समाज को त्रिस्तरीय आरक्षण मिला? क्या उनका हाई स्कूल पास लड़का दरोगा बना?'
राजपूत ने आगे कहा कि चुनाव नज़दीक आते देख राजभर डर रहे हैं कि समाज को क्या जवाब देंगे।
कांग्रेस नेता आसिम वकार का तंज
कांग्रेस नेता आसिम वकार ने भी इस बयान पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने कहा, 'पहले वह अपनी विधानसभा का विकास कर लें, तब उत्तर प्रदेश की बात करें। जो व्यक्ति अपनी विधानसभा की बात नहीं कर सकता है, वह उत्तर प्रदेश की बात नहीं कर सकता है।'
वकार ने राजभर को सीधी चुनौती देते हुए कहा कि अगर उन्हें लगता है कि उन्होंने जहूराबाद का विकास किया है, तो वहाँ से चुनाव लड़कर दिखाएँ। उन्होंने यह भी कहा कि राजभर समाज एक बड़ा और विविध समुदाय है, जिसे केवल अरविंद राजभर, अरुण राजभर और ओम प्रकाश राजभर तक सीमित नहीं किया जा सकता।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं और पिछड़े वर्गों के वोट बैंक को लेकर सभी दल सक्रिय हैं। राजभर का यह कदम उनकी अपनी पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (SBSP) के लिए सौदेबाज़ी की एक कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
विपक्षी दलों की यह प्रतिक्रिया संकेत देती है कि राजभर का बयान आने वाले चुनावी समर में एक प्रमुख मुद्दा बन सकता है और उनकी साख को लेकर बहस तेज़ होगी।