सपा-कांग्रेस गठबंधन पर राजभर का तंज: 'जितनी भी जोड़-तोड़ करें, सत्ता नहीं मिलेगी'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने 3 सितंबर 2025 को लखनऊ में पत्रकारों से बातचीत के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के संभावित गठबंधन को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष चाहे जिससे भी हाथ मिला ले, उत्तर प्रदेश में सत्ता उनके हाथ नहीं आएगी। राजभर ने दावा किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश में विकास कार्यों की रफ्तार इतनी तेज़ है कि विपक्ष का सरकार बनाने का सपना 'दिवास्वप्न' से अधिक कुछ नहीं है।
गठबंधन पर राजभर का सीधा प्रहार
राजभर ने कहा कि सपा और कांग्रेस 2017, 2022 और 2024 के चुनावों में भी सरकार बनाने के दावे करते रहे हैं, लेकिन हर बार परिणाम उनके विपरीत रहा। उन्होंने कहा, 'इन लोगों का दावा महज दावा बनकर ही रह जाता है।' उन्होंने विश्वास जताया कि आगामी चुनाव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो-तिहाई बहुमत के साथ पुनः सत्ता में लौटेंगे।
कांग्रेस-सपा सीट बंटवारे पर टिप्पणी
राजभर ने यह भी कहा कि कांग्रेस एक राष्ट्रीय पार्टी है और राज्य में उसकी स्थिति सपा की तुलना में बेहतर है, इसलिए गठबंधन में उसे उतनी सीटें मिलनी चाहिए जितनी वह माँग रही है। अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद के उस बयान पर — जिसमें उन्होंने कहा था कि देशभर में भाजपा का सफाया होने वाला है — राजभर ने पलटवार करते हुए कहा कि वे पहले अपनी स्थिति का आकलन करें, कहीं अगले चुनाव में उनका खुद का ही सफाया न हो जाए।
विभागीय अधिकारियों पर नाराज़गी
राजभर ने अपने विभाग के अधिकारियों पर भी कड़ी नाराज़गी जताई। उन्होंने कहा कि अधिकारी न समय दे रहे हैं, न काम देख रहे हैं। उन्होंने बताया कि 32 बारात घर बनाए जाने हैं, लेकिन 10-12 बारात घरों का डीपीआर अभी तक तैयार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, 'पिछले डेढ़ साल से इन अधिकारियों का ऐसा ही रवैया रहा है। अगर डीएम का सहारा लेकर पंचायती राज का काम होगा, तो इन अधिकारियों की ज़रूरत ही क्या है।'
अखिलेश यादव पर भ्रष्टाचार के आरोप
राजभर ने समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर सीधे हमला बोलते हुए कहा कि जेपीएनआईसी परियोजना का काम ₹200 करोड़ में तय हुआ था, जिसे अखिलेश यादव के कार्यकाल में बढ़ाकर ₹800 करोड़ कर दिया गया, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ। उन्होंने सवाल उठाया कि बाकी पैसा कहाँ गया। उन्होंने यह भी कहा कि खनन मामले में सीबीआई ने जो एफआईआर दर्ज की है, उसमें अखिलेश यादव का नाम शामिल है। राजभर ने सपा शासनकाल में दंगों, गैंगवार और अपराधियों की खुली छूट का भी ज़िक्र किया और मुजफ्फरनगर दंगों का हवाला देते हुए कहा कि उस वक्त नेतृत्व सैफई में नाच-गाने में व्यस्त था।
मुस्लिम प्रतिनिधित्व और राम मंदिर विवाद
राजभर ने सपा पर जातिवाद का आरोप लगाते हुए कहा कि अखिलेश यादव ने अपने शासनकाल में केवल अपनी जाति को आगे बढ़ाया और 20 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं को धोखा दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और सपा में मुस्लिम नेता 'गुलामों की तरह' काम कर रहे हैं और किसी में यह साहस नहीं कि वे राहुल गांधी या अखिलेश यादव के सामने मुस्लिम को मुख्यमंत्री बनाने की माँग रख सकें। राम मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की नियुक्ति पर विपक्ष के आरोपों को राजभर ने खारिज करते हुए कहा कि यह नियुक्ति पूरी तरह तय प्रक्रिया के तहत हुई है और विपक्ष हर मुद्दे पर आलोचना करने की आदत रखता है।