21 सितंबर 2026
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यूपी बंटवारे और 'राजभर बेटे को CM' वाले ओपी राजभर के बयान पर सपा-कांग्रेस का तीखा हमला

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यूपी बंटवारे और 'राजभर बेटे को CM' वाले ओपी राजभर के बयान पर सपा-कांग्रेस का तीखा हमला

सारांश

ओपी राजभर के 'यूपी के चार टुकड़े और राजभर बेटे को CM' वाले बयान ने सियासी आग लगा दी है। सपा ने कहा — BJP उनके बयान लिखती है; कांग्रेस ने पूछा — चार साल मंत्री रहकर समुदाय के लिए क्या किया? आरक्षण से परिवारवाद तक, सभी मोर्चों पर राजभर घिरे दिख रहे हैं।

मुख्य बातें

ओमप्रकाश राजभर ने कथित तौर पर कहा कि यूपी को चार हिस्सों में बाँटा जाएगा और पूर्वांचल राज्य बनने पर राजभर के बेटे को CM बनाया जाएगा।
सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने आरोप लगाया कि BJP सरकार का सूचना विभाग राजभर के बयान लिखता है।
सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने दावा किया कि राजभर का X अकाउंट BJP आईटी सेल ने हैक किया है।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने पूछा — चार वर्षों की मंत्रिपद में राजभर समुदाय के लिए क्या किया?
कांग्रेस नेता आसिम वकार ने परिवारवाद पर सवाल उठाया — सिर्फ अपने बेटे का नाम क्यों, पूरे राजभर समुदाय का क्यों नहीं?

उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर के उस बयान पर राजनीतिक विवाद गहरा गया है, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर कहा कि उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बाँटा जाएगा और यदि पूर्वांचल अलग राज्य बनता है तो किसी राजभर के बेटे को ही मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। 21 सितंबर 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के नेताओं ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी।

सपा का पलटवार

सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार का सूचना विभाग ओपी राजभर के बयान लिखता है और वे जो चाहते हैं, उनसे वही कहलवाते हैं। उन्होंने तर्क देते हुए कहा, 'राजभर जोर-शोर से कहते रहे कि पंचायत चुनाव समय पर होंगे, फिर भी वे चुनाव नहीं करवा पाए, जबकि उसी विभाग के मंत्री हैं।' उदयवीर सिंह ने सवाल उठाया कि जिस मंत्री को अपने ही विभाग की सही जानकारी नहीं है, उनसे दूसरे मामलों में जानकारी लेने की क्या जरूरत है।

उदयवीर सिंह ने आरक्षण के मुद्दे पर भी राजभर को घेरा। उन्होंने कहा कि राजभर निजी मुलाकातों में खुद कहते हैं कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछड़े वर्गों के विरोधी हैं और उनकी बात नहीं सुनते। सपा प्रवक्ता ने पूछा, 'जब वे आरक्षण और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर BJP को चुनौती नहीं दे सकते, तो ऐसी क्या मजबूरी है जो उन्हें अपनी कुर्सी से चिपके रहने पर मजबूर कर रही है?'

सपा का 'X अकाउंट हैक' वाला आरोप

सपा प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने दावा किया कि ओम प्रकाश राजभर का एक्स (X) अकाउंट BJP आईटी सेल ने हैक कर लिया है और राजभर ने स्वयं पासवर्ड भी माँग लिया है। वर्मा ने कहा कि इस तरह राजभर 'एक संदेशवाहक' बन गए हैं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए जोड़ा कि BJP ने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से यह स्वीकार कर लिया है कि वह उत्तर प्रदेश का विकास नहीं कर पाई, इसीलिए अब राज्य को चार टुकड़ों में बाँटने की बात उठाई जा रही है।

कांग्रेस की प्रतिक्रिया: चुनावी नाटक का आरोप

कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने राजभर पर 'मानसिक रूप से परेशान' होने का कटाक्ष करते हुए कहा कि चुनाव नजदीक आते ही वे राजभर समुदाय को सम्मान दिलाने का दिखावा कर रहे हैं। राजपूत ने सीधे सवाल उठाए — पिछले चार वर्षों में मंत्री रहते हुए उन्होंने राजभर समुदाय के लिए क्या किया? अनुसूचित जाति श्रेणी में शामिल राजभर लोगों को आरक्षण का लाभ मिला या नहीं? उनके बच्चे सब-इंस्पेक्टर बने या नहीं?

राजपूत ने दावा किया, 'अब राजभर समुदाय ओम प्रकाश राजभर को समझ चुका है और इस बार पूरा राजभर समुदाय BJP दोनों को उनकी सही जगह दिखा देगा।'

परिवारवाद पर सवाल

कांग्रेस नेता आसिम वकार ने बयान के 'पारिवारिक पक्षपात' को निशाना बनाया। उन्होंने पूछा कि राजभर ने यदि पूर्वांचल के CM की बात की, तो सिर्फ अपने बेटे का नाम क्यों लिया — 'क्या राजभर का मतलब सिर्फ अमित राजभर, अरुण राजभर और ओम प्रकाश राजभर का परिवार है?' वकार ने कहा कि अन्य दलों में भी राजभर समुदाय के नेता हैं, जिनके नामों का जिक्र तक नहीं किया गया।

राजनीतिक संदर्भ

गौरतलब है कि ओमप्रकाश राजभर पहले भी BJP से अलग होकर सपा के साथ गठबंधन कर चुके हैं और बाद में फिर NDA में लौटे हैं। यह विवाद ऐसे समय में आया है जब यूपी में आगामी चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मियाँ तेज हैं और पिछड़े व अति-पिछड़े वर्गों का वोट बैंक सभी दलों के लिए निर्णायक माना जा रहा है। आलोचकों का कहना है कि राज्य-विभाजन की माँग कोई नई नहीं है — पूर्वांचल, बुंदेलखंड और हरित प्रदेश की माँग दशकों से उठती रही है — लेकिन इसे मुख्यमंत्री पद की दावेदारी से जोड़ना राजनीतिक महत्वाकांक्षा का संकेत माना जा रहा है।

इस पूरे प्रकरण पर BJP की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आगे देखना होगा कि ओमप्रकाश राजभर इन आरोपों का जवाब कैसे देते हैं और क्या सरकार में उनकी स्थिति पर इसका कोई असर पड़ता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

उससे गहरा राजनीतिक संकेत देता है — वे NDA में रहते हुए भी पिछड़े वर्गों का गुस्सा अपने पाले में रखने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन आरक्षण के अधूरे वादों और पंचायत चुनाव की विफलता जैसे ठोस उदाहरणों के सामने यह रणनीति कमज़ोर पड़ती दिखती है। मुख्य धारा की कवरेज इस बयान को 'विवाद' की तरह पेश करती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या राजभर समुदाय वास्तव में पिछले चार वर्षों में हुए वादाखिलाफी के बाद इस बयानबाजी से संतुष्ट होगा। 'सिर्फ बेटे को CM' वाला कोण परिवारवाद की उसी आलोचना को आमंत्रित करता है जो राजभर खुद दूसरे दलों पर करते रहे हैं।
RashtraPress
21 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओपी राजभर ने यूपी बंटवारे पर क्या बयान दिया?
ओमप्रकाश राजभर ने कथित तौर पर कहा कि उत्तर प्रदेश को चार हिस्सों में बाँटा जाएगा और यदि पूर्वांचल अलग राज्य बनता है तो किसी राजभर के बेटे को ही मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। इस बयान ने सपा और कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया भड़काई।
सपा ने राजभर के बयान पर क्या कहा?
सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने आरोप लगाया कि BJP सरकार का सूचना विभाग राजभर के बयान लिखता है। सपा के आशुतोष वर्मा ने यह भी दावा किया कि राजभर का X अकाउंट BJP आईटी सेल ने हैक कर लिया है।
कांग्रेस ने राजभर पर कौन-से सवाल उठाए?
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने पूछा कि पिछले चार वर्षों में मंत्री रहते हुए राजभर ने अपने समुदाय के लिए क्या किया। उन्होंने आरक्षण के वादे, सब-इंस्पेक्टर भर्ती और अनुसूचित जाति दर्जे के लाभ जैसे मुद्दों पर जवाब माँगा।
'सिर्फ राजभर के बेटे को CM' वाले बयान पर आपत्ति क्यों?
कांग्रेस नेता आसिम वकार ने कहा कि राजभर ने पूरे राजभर समुदाय का नहीं, केवल अपने परिवार — अमित राजभर, अरुण राजभर — का नाम लिया। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य दलों में भी राजभर समुदाय के नेता हैं जिनका जिक्र नहीं किया गया।
ओपी राजभर का राजनीतिक इतिहास क्या है?
ओमप्रकाश राजभर सुभासपा के अध्यक्ष हैं और वर्तमान में यूपी सरकार में मंत्री हैं। वे पहले BJP से अलग होकर सपा के साथ गठबंधन कर चुके हैं और बाद में NDA में लौट आए। पिछड़े और अति-पिछड़े वर्गों, विशेषकर राजभर समुदाय, में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।
राष्ट्र प्रेस
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