10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सपा प्रवक्ता का दावा: भाजपा के दबाव में बोलते हैं ओपी राजभर, बेटे ने माँगा था सुभासपा का सपा में विलय

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सपा प्रवक्ता का दावा: भाजपा के दबाव में बोलते हैं ओपी राजभर, बेटे ने माँगा था सुभासपा का सपा में विलय

सारांश

सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने ओपी राजभर के 'सपा टूटेगी' वाले दावे को निराधार बताया और आरोप लगाया कि राजभर भाजपा के दबाव में बयान देते हैं। दावा यह भी कि राजभर के बेटे अरुण ने खुद अखिलेश यादव से सुभासपा के सपा में विलय की गुहार लगाई थी।

मुख्य बातें

सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने 17 जून को लखनऊ में ओम प्रकाश राजभर के 'सपा टूटेगी' वाले दावे को पूरी तरह निराधार बताया।
चांद के अनुसार, अरुण राजभर ने अखिलेश यादव से मुलाकात कर सुभासपा के सपा में विलय का अनुरोध किया था।
सपा का आरोप — राजभर को भाजपा से संदेश आते हैं और उन्हें वही बातें सार्वजनिक रूप से बोलनी और सोशल मीडिया पर पोस्ट करनी पड़ती हैं।
चांद ने कहा कि जब राजभर के अपने पुत्र ने उनके बयानों को गंभीरता से न लेने की बात कही, तब से सपा भी उन्हें महत्व नहीं देती।
राजभर का यह बयान 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने बुधवार, 17 जून को लखनऊ में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर के उस बयान को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें राजभर ने दावा किया था कि समाजवादी पार्टी जल्द ही बिखर जाएगी। चांद ने कहा कि यह बयान पूरी तरह निराधार है और सपा इसे किसी भी रूप में गंभीरता से नहीं लेती।

मुख्य आरोप: दबाव में काम कर रहे हैं राजभर

फखरुल हसन चांद ने दावा किया कि सपा के पास ऐसी जानकारी है जो यह साबित करती है कि ओम प्रकाश राजभर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दबाव में बयान देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजभर को भाजपा की ओर से संदेश आते हैं और उन्हें वही बातें सार्वजनिक मंचों पर दोहरानी पड़ती हैं। यहाँ तक कि सोशल मीडिया पर भी वे वही पोस्ट करते हैं जो भाजपा चाहती है।

अरुण राजभर ने अखिलेश से माँगा था विलय

सपा प्रवक्ता के अनुसार, ओम प्रकाश राजभर के पुत्र अरुण राजभर ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात कर सुभासपा के समाजवादी पार्टी में विलय का अनुरोध किया था। चांद के मुताबिक, अरुण राजभर ने उस बातचीत में स्वीकार किया था कि उनके पिता पर भाजपा का अत्यधिक दबाव है, वे लगातार तनाव में रहते हैं और अखिलेश यादव से मिलने के लिए व्याकुल हैं, परंतु भाजपा के दबाव के कारण ऐसा नहीं कर पा रहे।

पिछड़ों की राजनीति बचाने की दुहाई

फखरुल हसन चांद ने बताया कि अरुण राजभर ने पिछड़े वर्गों की राजनीति को सुरक्षित रखने का हवाला देते हुए सुभासपा के सपा में विलय की गुहार लगाई थी। सपा प्रवक्ता ने कहा कि जब ओम प्रकाश राजभर के अपने पुत्र ने यह संकेत दे दिया कि उनके बयानों को गंभीरता से न लिया जाए, तब से सपा ने भी उनके किसी भी बयान को विशेष महत्व देना बंद कर दिया है।

सपा की प्रतिक्रिया: महज राजनीतिक बयानबाजी

चांद ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी के टूटने का ओम प्रकाश राजभर का दावा शुद्ध रूप से राजनीतिक बयानबाजी है और इसका वास्तविकता से कोई वास्ता नहीं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और सत्तारूढ़ गठबंधन तथा विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने में लगे हैं। गौरतलब है कि राजभर पहले सपा के साथ गठबंधन में रह चुके हैं और बाद में भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल हो गए।

संपादकीय दृष्टिकोण

राजनीतिक गणित अधिक है — अरुण राजभर की कथित बैठक का कोई स्वतंत्र सत्यापन नहीं हुआ है, और सुभासपा ने इन दावों का खंडन किया है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं। असली सवाल यह है कि 2027 से पहले पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को साधने की होड़ में दोनों दल एक-दूसरे पर आरोप लगाकर कितना राजनीतिक लाभ उठा सकते हैं। राजभर पहले सपा के साथ थे, फिर NDA में गए — उनकी पुनः वापसी की अटकलें हर चुनावी चक्र में उठती हैं और इस बार भी इसी पैटर्न की पुनरावृत्ति दिखती है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फखरुल हसन चांद ने ओपी राजभर पर क्या आरोप लगाए?
सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने आरोप लगाया कि ओम प्रकाश राजभर भाजपा के दबाव में बयान देते हैं और उन्हें वही बातें सार्वजनिक रूप से कहनी व सोशल मीडिया पर पोस्ट करनी पड़ती हैं जो भाजपा चाहती है। उन्होंने राजभर के 'सपा टूटेगी' वाले दावे को पूरी तरह निराधार बताया।
अरुण राजभर और अखिलेश यादव की मुलाकात का दावा क्या है?
सपा प्रवक्ता के अनुसार, ओम प्रकाश राजभर के पुत्र अरुण राजभर ने सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात कर सुभासपा के समाजवादी पार्टी में विलय का अनुरोध किया था। अरुण ने कथित तौर पर यह भी कहा था कि उनके पिता पर भाजपा का अत्यधिक दबाव है।
समाजवादी पार्टी ओम प्रकाश राजभर के बयानों को गंभीरता से क्यों नहीं लेती?
सपा प्रवक्ता चांद के मुताबिक, जब राजभर के अपने पुत्र ने यह स्वीकार किया कि उनके पिता के बयानों को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए, तब से सपा ने भी उनके बयानों को विशेष महत्व देना बंद कर दिया है।
ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के बारे में क्या दावा किया था?
सुभासपा प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने दावा किया था कि समाजवादी पार्टी जल्द ही टूट जाएगी। सपा ने इस दावे को राजनीतिक बयानबाजी करार देते हुए खारिज कर दिया है।
यह विवाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्यों अहम है?
2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले पिछड़े वर्गों के मतदाताओं को लेकर सपा और NDA दोनों में खींचतान तेज है। राजभर का पिछड़े वर्ग में प्रभाव होने के कारण उनकी राजनीतिक स्थिति और गठबंधन का सवाल दोनों दलों के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 महीना पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 1 महीना पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 2 महीने पहले