सपा प्रवक्ता का दावा: भाजपा के दबाव में बोलते हैं ओपी राजभर, बेटे ने माँगा था सुभासपा का सपा में विलय
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने बुधवार, 17 जून को लखनऊ में सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर के उस बयान को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें राजभर ने दावा किया था कि समाजवादी पार्टी जल्द ही बिखर जाएगी। चांद ने कहा कि यह बयान पूरी तरह निराधार है और सपा इसे किसी भी रूप में गंभीरता से नहीं लेती।
मुख्य आरोप: दबाव में काम कर रहे हैं राजभर
फखरुल हसन चांद ने दावा किया कि सपा के पास ऐसी जानकारी है जो यह साबित करती है कि ओम प्रकाश राजभर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दबाव में बयान देते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राजभर को भाजपा की ओर से संदेश आते हैं और उन्हें वही बातें सार्वजनिक मंचों पर दोहरानी पड़ती हैं। यहाँ तक कि सोशल मीडिया पर भी वे वही पोस्ट करते हैं जो भाजपा चाहती है।
अरुण राजभर ने अखिलेश से माँगा था विलय
सपा प्रवक्ता के अनुसार, ओम प्रकाश राजभर के पुत्र अरुण राजभर ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात कर सुभासपा के समाजवादी पार्टी में विलय का अनुरोध किया था। चांद के मुताबिक, अरुण राजभर ने उस बातचीत में स्वीकार किया था कि उनके पिता पर भाजपा का अत्यधिक दबाव है, वे लगातार तनाव में रहते हैं और अखिलेश यादव से मिलने के लिए व्याकुल हैं, परंतु भाजपा के दबाव के कारण ऐसा नहीं कर पा रहे।
पिछड़ों की राजनीति बचाने की दुहाई
फखरुल हसन चांद ने बताया कि अरुण राजभर ने पिछड़े वर्गों की राजनीति को सुरक्षित रखने का हवाला देते हुए सुभासपा के सपा में विलय की गुहार लगाई थी। सपा प्रवक्ता ने कहा कि जब ओम प्रकाश राजभर के अपने पुत्र ने यह संकेत दे दिया कि उनके बयानों को गंभीरता से न लिया जाए, तब से सपा ने भी उनके किसी भी बयान को विशेष महत्व देना बंद कर दिया है।
सपा की प्रतिक्रिया: महज राजनीतिक बयानबाजी
चांद ने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी के टूटने का ओम प्रकाश राजभर का दावा शुद्ध रूप से राजनीतिक बयानबाजी है और इसका वास्तविकता से कोई वास्ता नहीं। यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और सत्तारूढ़ गठबंधन तथा विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी स्थिति मजबूत करने में लगे हैं। गौरतलब है कि राजभर पहले सपा के साथ गठबंधन में रह चुके हैं और बाद में भाजपा नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल हो गए।