4 अगस्त 2026
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सपा ने राजभर के दावे खारिज किए: 'पहले अपनी पार्टी बचाएं', फखरुल हसन चांद का पलटवार

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सपा ने राजभर के दावे खारिज किए: 'पहले अपनी पार्टी बचाएं', फखरुल हसन चांद का पलटवार

सारांश

सपा नेता फखरुल हसन चांद ने मंत्री ओमप्रकाश राजभर के सपा टूट के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि राजभर के चार विधायक खुद सपा का झंडा लगाकर चलते हैं और उनके बेटे सपा में विलय माँग रहे हैं। राजभर को पहले अपनी पार्टी बचानी चाहिए।

मुख्य बातें

सपा नेता फखरुल हसन चांद ने 19 जून 2026 को लखनऊ में मंत्री ओमप्रकाश राजभर के सपा टूट के दावों को पूरी तरह निराधार बताया।
चांद के अनुसार, राजभर की सुभासपा के पास केवल 6 विधायक हैं और उनमें से 4 कथित तौर पर सपा का झंडा लगाकर चलते हैं।
राजभर के पुत्र अखिलेश यादव से सुभासपा के सपा में विलय की मांग कर रहे हैं।
RJD सांसद सुधाकर सिंह द्वारा राम मंदिर ट्रस्ट को चंदे का ब्योरा माँगने पर सपा ने पारदर्शिता का समर्थन किया, लेकिन SIT जाँच के चलते विस्तृत टिप्पणी से परहेज किया।
चांद ने भाजपा पर विपक्षी नेताओं की सुरक्षा में कटौती और ममता बनर्जी के स्टाफ घटाने का आरोप लगाया।
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के गठबंधन में शामिल होने के ऐलान को चांद ने INDIA गठबंधन के लिए सकारात्मक बताया।

समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता फखरुल हसन चांद ने 19 जून 2026 को लखनऊ में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री ओमप्रकाश राजभर के उन दावों को पूरी तरह निराधार करार दिया, जिनमें सपा में संभावित टूट और कई सांसदों से संपर्क की बात कही गई थी। चांद ने स्पष्ट कहा कि सपा राजभर के किसी भी बयान को गंभीरता से नहीं लेती, और उन्हें पहले अपने दल की बिखरती स्थिति पर ध्यान देना चाहिए।

राजभर के दावों पर सपा का तीखा पलटवार

फखरुल हसन चांद ने कहा कि ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के पास कुल छह विधायक हैं — जिनमें एक स्वयं राजभर हैं और दूसरे कथित पेपर लीक प्रकरण से जुड़े विधायक। उन्होंने दावा किया कि शेष चार विधायक सपा का झंडा लगाकर चलते हैं। उनके अनुसार, राजभर की पार्टी स्वयं बिखराव की कगार पर है।

चांद ने व्यंग्यात्मक लहजे में जोड़ा कि राजभर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के दबाव में हैं और जो बातें भाजपा उन्हें बताती है, वही वे सार्वजनिक मंचों पर दोहराते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब राजभर के पुत्र स्वयं सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मिलकर सुभासपा के सपा में विलय की मांग कर रहे हैं।

राम मंदिर ट्रस्ट चंदे पर पारदर्शिता की मांग

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद सुधाकर सिंह द्वारा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को कानूनी नोटिस भेजकर चंदे का पूरा ब्योरा माँगे जाने के मामले पर चांद ने कहा कि इस विषय में पारदर्शिता अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि यह मुद्दा सबसे पहले सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उठाया था। हालाँकि, चांद ने यह भी स्पष्ट किया कि चूँकि मामले की जाँच विशेष जाँच दल (SIT) कर रही है, इसलिए सपा फिलहाल इस पर विस्तृत टिप्पणी से परहेज करेगी।

विपक्षी नेताओं की सुरक्षा में कटौती पर आरोप

चांद ने भाजपा पर राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, विपक्षी नेताओं की सुरक्षा में कटौती की जा रही है, जबकि सरकार के करीबी लोगों को विशेष सुरक्षा मिल रही है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा और स्टाफ में कटौती का उदाहरण देते हुए कहा कि लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष दोनों का सम्मान होना चाहिए।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में सुरक्षा आवंटन का यह मुद्दा पिछले कई महीनों से विपक्षी दलों के लिए एक प्रमुख राजनीतिक हथियार बना हुआ है।

नीट पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली पर सवाल

नीट परीक्षा को लेकर हुई उच्चस्तरीय बैठक और अधिकारियों को दिए गए सख्त निर्देशों पर भी चांद ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि जिन मंत्रियों के कार्यकाल में दो बार नीट का पेपर लीक हो चुका है, वही अब सख्त निर्देश देने की बात कर रहे हैं। उनके अनुसार, सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रही है।

ओवैसी के गठबंधन ऐलान पर प्रतिक्रिया

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी द्वारा किसी भी राजनीतिक गठबंधन में शामिल होने की घोषणा पर चांद ने कहा कि इससे INDIA गठबंधन और अधिक मजबूत होगा। उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह बयान नई अटकलों को जन्म दे सकता है, क्योंकि ओवैसी पहले INDIA गठबंधन से दूरी बनाए हुए थे।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसी दल के विधायक कथित तौर पर सपा के करीब हैं और उसी दल के वारिस विलय माँग रहे हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में पिछड़े वर्ग के वोटों की राजनीति और तेज होगी, और राजभर जैसे नेताओं की स्थिति दोनों पक्षों के लिए अनिश्चित बनी रहेगी।
RashtraPress
4 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

फखरुल हसन चांद ने ओमप्रकाश राजभर के बयान पर क्या कहा?
सपा नेता फखरुल हसन चांद ने राजभर के सपा टूट के दावों को पूरी तरह निराधार बताया और कहा कि सपा उनके किसी भी बयान को गंभीरता से नहीं लेती। उन्होंने राजभर को सलाह दी कि वे पहले अपनी पार्टी की बिखरती स्थिति पर ध्यान दें।
ओमप्रकाश राजभर की पार्टी की मौजूदा स्थिति क्या है?
सपा के दावे के अनुसार, राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के पास केवल 6 विधायक हैं, जिनमें से 4 कथित तौर पर सपा के करीब हैं। इसके अलावा राजभर के पुत्र खुद अखिलेश यादव से सुभासपा के सपा में विलय की मांग कर रहे हैं।
राम मंदिर ट्रस्ट के चंदे विवाद पर सपा का क्या रुख है?
सपा ने श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के चंदे में पारदर्शिता का समर्थन किया है और कहा कि यह मुद्दा सबसे पहले अखिलेश यादव ने उठाया था। हालाँकि, SIT जाँच चल रही होने के कारण सपा ने फिलहाल विस्तृत टिप्पणी से परहेज करने का फैसला किया है।
सपा ने भाजपा पर विपक्षी नेताओं की सुरक्षा को लेकर क्या आरोप लगाए?
सपा नेता चांद ने आरोप लगाया कि भाजपा विपक्षी नेताओं की सुरक्षा में कटौती कर रही है और सरकार समर्थकों को विशेष सुरक्षा दे रही है। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा और स्टाफ में कटौती का उदाहरण देते हुए इसे लोकतंत्र विरोधी बताया।
ओवैसी के गठबंधन ऐलान का उत्तर प्रदेश की राजनीति पर क्या असर होगा?
सपा नेता फखरुल हसन चांद ने AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के किसी राजनीतिक गठबंधन में शामिल होने के ऐलान को INDIA गठबंधन के लिए सकारात्मक बताया। हालाँकि, ओवैसी पहले इस गठबंधन से दूरी बनाए हुए थे, इसलिए उनकी संभावित भूमिका पर अभी स्पष्टता नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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