ओमप्रकाश राजभर का पलटवार: 'राजभर समाज में पैदा हुआ, इसीलिए पैदाइश पर टिप्पणी'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने 14 सितंबर 2026 को समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता ओमप्रकाश सिंह पर तीखा पलटवार करते हुए कहा कि उनकी पैदाइश पर इसलिए टिप्पणी की गई, क्योंकि वह किसी जमींदार या ऊँची जाति में नहीं, बल्कि बेहद गरीब और असहाय राजभर समाज में जन्मे हैं। सोशल मीडिया पर पोस्ट के ज़रिये राजभर ने इस विवाद को जाति-आधारित राजनीति के व्यापक संदर्भ में रखा।
विवाद की पृष्ठभूमि
राजभर के अनुसार, पिछले दो दिनों से सपा नेता ओमप्रकाश सिंह का एक बयान सामने आ रहा है, जिसमें उनकी पैदाइश को लेकर टिप्पणी की गई। राजभर ने कहा कि बयान सुनकर उन्हें हैरानी नहीं हुई, बल्कि ओमप्रकाश सिंह पर तरस आया। उन्होंने सोशल मीडिया पर उन्हें 'मित्र ओमप्रकाश सिंह जी' संबोधित करते हुए अपनी बात रखी।
राजभर की मुख्य प्रतिक्रिया
ओमप्रकाश राजभर ने स्पष्ट किया कि उन्हें राजभर समाज में जन्म लेने का कोई दुख नहीं, बल्कि गर्व है। उनके शब्दों में, जिस समाज में वह पैदा हुए, उसके लिए कुछ करने की नीयत और हौसला उनके भीतर है। उन्होंने यह भी कहा कि वह चाहते तो ओमप्रकाश सिंह पर अनर्गल टिप्पणी कर सकते थे, लेकिन राजभर समाज ने किसी के माता-पिता पर गलत बयानबाजी करना नहीं सिखाया।
राजभर ने ओमप्रकाश सिंह के माता-पिता को प्रणाम करते हुए कहा कि कोई व्यक्ति यह तय नहीं करता कि वह कब, कहाँ और किस जाति में पैदा होगा — यह ईश्वर की इच्छा है।
सपा पर सियासी हमला
राजभर ने इसके बाद समाजवादी पार्टी (सपा) पर सीधा सियासी हमला बोलते हुए कहा कि शायद ये लोग ईश्वर को नहीं मानते। उनके अनुसार, यदि मानते होते तो भगवान राम, रघुकुल, सूर्यवंश और सनातन का अपमान करने वाली पार्टी में एक विधानसभा टिकट के लिए 'अपमान का घूंट' पीकर नहीं पड़े रहते। यह बयान राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया उत्पन्न कर सकता है, क्योंकि इसमें जाति, धर्म और दलीय निष्ठा — तीनों मुद्दों को एक साथ उठाया गया है।
माफी की उम्मीद नहीं, जनता पर भरोसा
राजभर ने साफ कहा कि उन्हें ओमप्रकाश सिंह से माफी की कोई अपेक्षा नहीं है, हालाँकि उन्होंने अपील की कि वह एक बार अपने माता-पिता को याद करके सोचें कि किसी की पैदाइश पर इस तरह की टिप्पणी उचित है या नहीं। उन्होंने ओमप्रकाश सिंह को सपा का टिकट लेने की इच्छा होने पर खुलकर लेने की बात कही और कहा कि जनता सब देख रही है — उन्हें भी और उनकी पार्टी को भी।
आगे क्या
राजभर ने अपनी पोस्ट 'जय श्रीराम' लिखकर समाप्त की और कहा कि वह कर्म में विश्वास रखते हैं तथा राजभर समाज सहित पिछड़ों, दलितों और शोषितों की आवाज़ बुलंद करने का प्रण निभाते रहेंगे। यह विवाद उत्तर प्रदेश की आगामी राजनीतिक सरगर्मियों के बीच जाति-आधारित तनाव को उजागर करता है, और आने वाले समय में दोनों पक्षों के बीच और तीखी नोकझोंक की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।