अगस्त 2026 में WPI महंगाई बढ़कर 9.92%, ईंधन श्रेणी में 22.93% की उछाल
सारांश
मुख्य बातें
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई अगस्त 2026 में बढ़कर 9.92 प्रतिशत पर पहुँच गई, जो जुलाई 2026 में 9.78 प्रतिशत थी। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा 14 सितंबर 2026 को जारी आँकड़ों में यह खुलासा हुआ। ईंधन एवं ऊर्जा क्षेत्र में तेज़ मूल्य वृद्धि को इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
समग्र सूचकांक में बदलाव
मंत्रालय के अनुसार, अगस्त 2026 में सभी वस्तुओं का WPI सूचकांक 110.8 रहा, जबकि जुलाई में यह 110.0 था। आँकड़ों से स्पष्ट है कि प्राथमिक वस्तुओं, ईंधन एवं ऊर्जा तथा विनिर्मित उत्पादों — तीनों प्रमुख श्रेणियों में मूल्य दबाव बना रहा, जिसका समग्र महंगाई दर पर सीधा असर पड़ा।
ईंधन एवं ऊर्जा में सबसे तेज़ उछाल
अगस्त में ईंधन एवं ऊर्जा श्रेणी की महंगाई दर उछलकर 22.93 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 20.05 प्रतिशत थी। इस श्रेणी का सूचकांक 105.4 से बढ़कर 108.3 पर पहुँच गया। हाल के सप्ताहों में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ बढ़ोतरी का प्रभाव इस श्रेणी पर साफ़ दिखाई दिया, और खनिज तेल तथा पेट्रोलियम उत्पाद महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में रहे।
प्राथमिक वस्तुएँ और विनिर्मित उत्पाद
प्राथमिक वस्तुओं की महंगाई अगस्त में 7.76 प्रतिशत रही, जो जुलाई की 8.52 प्रतिशत से कम है। इस श्रेणी का सूचकांक 117.2 से बढ़कर 118.1 पर आया। दूसरी ओर, विनिर्मित उत्पादों की महंगाई मामूली रूप से बढ़कर 8.37 प्रतिशत हो गई, जो जुलाई में 8.29 प्रतिशत थी। विनिर्मित उत्पादों का सूचकांक 108.4 से 108.8 पर पहुँचा।
खाद्य महंगाई और अन्य प्रमुख कारक
WPI खाद्य सूचकांक आधारित महंगाई अगस्त में 7.05 प्रतिशत रही, जबकि जुलाई में यह 6.65 प्रतिशत थी। यह संकेत देता है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव जारी है। मंत्रालय के अनुसार, महंगाई बढ़ाने वाले अन्य प्रमुख कारकों में खाद्य वस्तुएँ, खाद्य उत्पादों का विनिर्माण, मूल धातुएँ, गैर-खाद्य पदार्थ तथा रसायन एवं रासायनिक उत्पादों का निर्माण शामिल रहे।
जून के आँकड़ों में संशोधन और इनपुट पीपीआई
सरकार ने जून 2026 के अंतिम आँकड़ों में भी संशोधन किया है। जून का WPI सूचकांक 110.2 के अस्थायी अनुमान से बढ़ाकर 110.3 किया गया, जबकि जून की थोक महंगाई दर 9.87 प्रतिशत से संशोधित होकर 9.97 प्रतिशत हो गई। इसके अतिरिक्त, विनिर्माण क्षेत्र का इनपुट उत्पादक मूल्य सूचकांक (इनपुट PPI) अगस्त 2026 में 104.2 रहा, जबकि जून का ट्रायल इनपुट PPI 107.1 के अनंतिम अनुमान से घटाकर 105.9 किया गया है।
यह ऐसे समय में आया है जब खुदरा महंगाई (CPI) पर भी नज़र रखी जा रही है और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति के आगामी निर्णयों पर बाज़ार की निगाहें टिकी हैं। थोक महंगाई में यह लगातार दूसरे महीने की वृद्धि आपूर्ति-पक्ष के दबावों का संकेत देती है।