मणिपुर: जिरीबाम में रोंगमेई नागा समुदाय के 3-4 घर जलाए, सुरक्षाबल हाई अलर्ट पर
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के जिरीबाम जिले में 14 सितंबर 2026 को उस समय तनाव गहरा गया, जब रोंगमेई नागा समुदाय के तीन से चार घरों में आग लगा दी गई। घटना के बाद सुरक्षाबलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और क्विक एक्शन टीमें त्वरित तैनाती के लिए तैयार हैं। अधिकारियों के अनुसार, अभी तक किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।
घटना का विवरण
रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना रविवार शाम करीब 6.30 बजे जिरीबाम थाना क्षेत्र से लगभग 12 किलोमीटर दक्षिण में हुई। आग लगाने के सही कारण और जिम्मेदार लोगों की पहचान अभी तक आधिकारिक तौर पर नहीं हो पाई है। जाँच एजेंसियाँ मामले की तह तक पहुँचने में जुटी हैं।
परिवारों ने पहले ही खाली किए थे घर
सूत्रों के हवाले से पता चला है कि कुकी और नागा समुदायों के बीच तनाव बढ़ने के बाद संभावित जवाबी कार्रवाई के डर से रोंगमेई नागा परिवारों ने कुछ हफ्ते पहले ही अपने घर खाली कर दिए थे। इसी कारण इस अग्निकांड में जन-हानि से बचाव हो सका। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर के कई जिलों में जातीय तनाव की स्थिति पहले से ही नाजुक बनी हुई है।
सुरक्षाबलों की तैनाती और निर्देश
घटना की सूचना मिलते ही सुरक्षाकर्मियों ने इलाके का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने सुरक्षाबलों को निर्देश दिया है कि वे क्षेत्र के ग्रामीणों और प्रमुख लोगों से संवाद बढ़ाएँ, ताकि सतर्कता बनाए रखी जा सके और तनाव को और अधिक बढ़ने से रोका जा सके। क्विक एक्शन टीमें किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रखी गई हैं।
तामेंगलोंग में गोलीबारी, एक महिला की मौत
इससे पहले, मणिपुर के तामेंगलोंग जिले में नेशनल हाईवे-37 पर स्थित टोलन गाँव में अज्ञात हमलावरों ने एक परिवार पर गोलीबारी की। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, यह हमला सुबह करीब 4 बजे हुआ, जिसमें एक महिला की गोली लगने से मौत हो गई। उनके पति और छह साल के बेटे को भी गोली लगी है, जबकि परिवार के दो बच्चे सुरक्षित बताए जा रहे हैं। गौरतलब है कि यह घटना जिरीबाम की घटना से अलग और पूर्व में हुई है, जो मणिपुर में व्यापक अशांति का संकेत देती है।
आगे की स्थिति
मणिपुर में जारी जातीय संघर्ष की पृष्ठभूमि में इन घटनाओं ने एक बार फिर राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए हैं। प्रशासन का ध्यान अभी हालात को स्थिर करने पर केंद्रित है। आने वाले दिनों में जाँच के नतीजे और सामुदायिक संवाद की प्रक्रिया यह तय करेगी कि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है या नियंत्रण में आता है।