2 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

मणिपुर के कामजोंग में नागा-कुकी सशस्त्र झड़प, 20 से अधिक घर जलाए; सुरक्षाबल तैनात

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
मणिपुर के कामजोंग में नागा-कुकी सशस्त्र झड़प, 20 से अधिक घर जलाए; सुरक्षाबल तैनात

सारांश

मणिपुर के कामजोंग में नागा-कुकी सशस्त्र झड़प ने एक बार फिर राज्य की जातीय दरारों को उजागर किया — 20 से अधिक घर जले, सुरक्षाबल तैनात, और KIM ने सुरक्षा चूक पर गंभीर सवाल उठाए। छह नागा नागरिकों की हत्या के बाद भड़का यह तनाव अब खतरनाक मोड़ पर है।

मुख्य बातें

1 जुलाई 2026 को मणिपुर के कामजोंग जिले में नागा और कुकी समूहों के बीच सशस्त्र झड़प में 20 से अधिक घर जला दिए गए।
हिंसा सुबह शुरू हुई — पहले एक नागा गाँव पर हमला ( 10 घर ), फिर जवाबी कार्रवाई में 12 और घर जलाए गए।
कुकी इनपी मणिपुर (KIM) ने आरोप लगाया कि जलाए गए गाँव से सुरक्षाकर्मी हमले से एक दिन पहले ही हट गए थे।
कुकी-जो परिषद (KZC) अध्यक्ष हेनलियानथांग थांगलेट ने छह नागा नागरिकों की हत्या पर माफी माँगी और निष्पक्ष जाँच की माँग की।
तनाव की जड़ 13 मई को हुए कथित अपहरण और 11 जून को कांगपोकपी से बरामद छह नागा नागरिकों के शव हैं।
अधिकारियों के अनुसार बुधवार की घटनाओं में आधिकारिक तौर पर कोई हताहत नहीं।

मणिपुर के कामजोंग जिले में 1 जुलाई 2026 को नागा और कुकी समूहों के बीच भड़की सशस्त्र हिंसा में 20 से अधिक घर जलाकर राख कर दिए गए। भारत-म्यांमार सीमा से सटे इस संवेदनशील जिले में हुई इस घटना के बाद सुरक्षाबलों को तत्काल तैनात किया गया और क्षेत्र नियंत्रण अभियान चलाया गया। अधिकारियों के अनुसार, बुधवार की इन घटनाओं में आधिकारिक तौर पर किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।

मुख्य घटनाक्रम

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, हिंसा बुधवार सुबह उस समय शुरू हुई जब कथित तौर पर हथियारबंद लोगों ने एक कुकी गाँव की ओर से एक नागा गाँव पर हमला किया और कम से कम 10 घरों में आग लगा दी। दोपहर होते-होते स्थिति और बिगड़ गई जब संदिग्ध उग्रवादियों और सशस्त्र ग्राम स्वयंसेवकों ने कथित तौर पर क्षेत्र के अन्य गाँवों पर जवाबी हमले किए। इसके बाद हुई हिंसा में नागा समुदाय के कम से कम 12 और घर जला दिए गए।

सुरक्षाबलों की प्रतिक्रिया

अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित गाँवों में सुरक्षाबल भेजे गए और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए क्षेत्र नियंत्रण अभियान चलाया गया। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, लेकिन उस पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। किसी भी तरह की और हिंसा को रोकने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं।

हालाँकि, कुकी इनपी मणिपुर (KIM) ने अपने बयान में एक गंभीर सवाल उठाया है — उसके अनुसार जिस कुकी गाँव को जलाया गया, वह सुरक्षाबलों की सुरक्षा में था, और सुरक्षाकर्मी आगजनी से ठीक एक दिन पहले चौकी छोड़कर चले गए थे। संगठन ने इस घटना के समय को संवेदनशील बताते हुए तत्काल और पारदर्शी जाँच की माँग की है।

तनाव की पृष्ठभूमि

यह ताज़ा हिंसा उस गहरे जातीय तनाव की कड़ी है जो छह नागा नागरिकों की हत्या के बाद से और भड़क उठा है। इन नागरिकों का कथित तौर पर 13 मई को अपहरण किया गया था और उनके शव 11 जून को कांगपोकपी जिले से बरामद किए गए थे। इस घटना के बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन, आर्थिक नाकाबंदी और दोनों समुदायों के बीच नए सिरे से शत्रुता सामने आई। गौरतलब है कि ताज़ा हिंसा कुकी-बहुल क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं के काफिले की आवाजाही को लेकर हाल के विवादों और विभिन्न संगठनों के प्रदर्शनों के बाद हुई है।

संगठनों की प्रतिक्रिया

कुकी इनपी मणिपुर (KIM) ने इस घटना को 'आतंकी कृत्य' करार देते हुए कड़ी निंदा की और दावा किया कि यह मणिपुर के तंगखुल-बहुल पहाड़ी जिलों में कुकी गाँवों को निशाना बनाकर चलाई जा रही 'सुनियोजित मुहिम' का हिस्सा है।

दूसरी ओर, कुकी-जो परिषद (KZC) के अध्यक्ष हेनलियानथांग थांगलेट ने छह नागा नागरिकों की हत्याओं पर खेद व्यक्त करते हुए माफी माँगी और राज्य में जारी जातीय अशांति से जुड़ी सभी हिंसा की घटनाओं की निष्पक्ष, पारदर्शी और तटस्थ जाँच की माँग की।

आगे क्या होगा

कामजोंग में हालात अभी भी नाज़ुक बने हुए हैं और सुरक्षाबलों की निगरानी जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में जातीय हिंसा के दीर्घकालिक समाधान की दिशा में ठोस कदमों की माँग लगातार बढ़ रही है। दोनों समुदायों के बीच विश्वास बहाली और स्वतंत्र जाँच की माँग अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर केंद्रीय मुद्दा बन चुकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

अगर सत्य है तो यह सुरक्षा तंत्र की गंभीर विफलता है जिसकी जाँच होनी चाहिए — न कि इसे महज़ 'आरोप' कहकर टाला जाए। KZC अध्यक्ष की माफी एक असामान्य कदम है, लेकिन जब तक दोनों पक्षों की हिंसा की स्वतंत्र जाँच नहीं होती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, ये बयान विश्वास बहाली के लिए पर्याप्त नहीं होंगे।
RashtraPress
2 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर के कामजोंग में 1 जुलाई को क्या हुआ?
1 जुलाई 2026 को कामजोंग जिले में नागा और कुकी समूहों के बीच सशस्त्र झड़पें हुईं जिनमें 20 से अधिक घर जला दिए गए। हिंसा सुबह शुरू हुई और दोपहर तक जवाबी हमलों के साथ और भड़क गई।
इस हिंसा की पृष्ठभूमि क्या है?
यह हिंसा छह नागा नागरिकों की हत्या के बाद भड़के तनाव की कड़ी है, जिनका 13 मई को कथित तौर पर अपहरण हुआ था और जिनके शव 11 जून को कांगपोकपी जिले से बरामद हुए थे। इस घटना के बाद से व्यापक विरोध, आर्थिक नाकाबंदी और दोनों समुदायों के बीच शत्रुता बढ़ी है।
कुकी इनपी मणिपुर (KIM) ने क्या आरोप लगाया है?
KIM ने दावा किया है कि जिस कुकी गाँव को जलाया गया, वह सुरक्षाबलों की सुरक्षा में था और सुरक्षाकर्मी आगजनी से ठीक एक दिन पहले चौकी छोड़कर चले गए थे। संगठन ने इसे सुनियोजित हमला बताते हुए तत्काल और पारदर्शी जाँच की माँग की है।
कुकी-जो परिषद (KZC) का इस मामले में क्या रुख है?
KZC के अध्यक्ष हेनलियानथांग थांगलेट ने छह नागा नागरिकों की हत्याओं पर खेद व्यक्त करते हुए माफी माँगी है। उन्होंने राज्य में जारी जातीय अशांति से जुड़ी सभी हिंसा की घटनाओं की निष्पक्ष, पारदर्शी और तटस्थ जाँच की माँग की है।
क्या इस घटना में कोई हताहत हुआ है?
अधिकारियों के अनुसार 1 जुलाई की घटनाओं में आधिकारिक तौर पर किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है। हालाँकि स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और अतिरिक्त सुरक्षाबल तैनात किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 3 सप्ताह पहले
  3. 3 सप्ताह पहले
  4. 1 महीना पहले
  5. 1 महीना पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 2 महीने पहले
  8. 2 महीने पहले