मणिपुर के कामजोंग में नागा-कुकी सशस्त्र झड़प, 20 से अधिक घर जलाए; सुरक्षाबल तैनात
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के कामजोंग जिले में 1 जुलाई 2026 को नागा और कुकी समूहों के बीच भड़की सशस्त्र हिंसा में 20 से अधिक घर जलाकर राख कर दिए गए। भारत-म्यांमार सीमा से सटे इस संवेदनशील जिले में हुई इस घटना के बाद सुरक्षाबलों को तत्काल तैनात किया गया और क्षेत्र नियंत्रण अभियान चलाया गया। अधिकारियों के अनुसार, बुधवार की इन घटनाओं में आधिकारिक तौर पर किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्य घटनाक्रम
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, हिंसा बुधवार सुबह उस समय शुरू हुई जब कथित तौर पर हथियारबंद लोगों ने एक कुकी गाँव की ओर से एक नागा गाँव पर हमला किया और कम से कम 10 घरों में आग लगा दी। दोपहर होते-होते स्थिति और बिगड़ गई जब संदिग्ध उग्रवादियों और सशस्त्र ग्राम स्वयंसेवकों ने कथित तौर पर क्षेत्र के अन्य गाँवों पर जवाबी हमले किए। इसके बाद हुई हिंसा में नागा समुदाय के कम से कम 12 और घर जला दिए गए।
सुरक्षाबलों की प्रतिक्रिया
अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित गाँवों में सुरक्षाबल भेजे गए और स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए क्षेत्र नियंत्रण अभियान चलाया गया। स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है, लेकिन उस पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। किसी भी तरह की और हिंसा को रोकने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किए गए हैं।
हालाँकि, कुकी इनपी मणिपुर (KIM) ने अपने बयान में एक गंभीर सवाल उठाया है — उसके अनुसार जिस कुकी गाँव को जलाया गया, वह सुरक्षाबलों की सुरक्षा में था, और सुरक्षाकर्मी आगजनी से ठीक एक दिन पहले चौकी छोड़कर चले गए थे। संगठन ने इस घटना के समय को संवेदनशील बताते हुए तत्काल और पारदर्शी जाँच की माँग की है।
तनाव की पृष्ठभूमि
यह ताज़ा हिंसा उस गहरे जातीय तनाव की कड़ी है जो छह नागा नागरिकों की हत्या के बाद से और भड़क उठा है। इन नागरिकों का कथित तौर पर 13 मई को अपहरण किया गया था और उनके शव 11 जून को कांगपोकपी जिले से बरामद किए गए थे। इस घटना के बाद व्यापक विरोध प्रदर्शन, आर्थिक नाकाबंदी और दोनों समुदायों के बीच नए सिरे से शत्रुता सामने आई। गौरतलब है कि ताज़ा हिंसा कुकी-बहुल क्षेत्रों में आवश्यक वस्तुओं के काफिले की आवाजाही को लेकर हाल के विवादों और विभिन्न संगठनों के प्रदर्शनों के बाद हुई है।
संगठनों की प्रतिक्रिया
कुकी इनपी मणिपुर (KIM) ने इस घटना को 'आतंकी कृत्य' करार देते हुए कड़ी निंदा की और दावा किया कि यह मणिपुर के तंगखुल-बहुल पहाड़ी जिलों में कुकी गाँवों को निशाना बनाकर चलाई जा रही 'सुनियोजित मुहिम' का हिस्सा है।
दूसरी ओर, कुकी-जो परिषद (KZC) के अध्यक्ष हेनलियानथांग थांगलेट ने छह नागा नागरिकों की हत्याओं पर खेद व्यक्त करते हुए माफी माँगी और राज्य में जारी जातीय अशांति से जुड़ी सभी हिंसा की घटनाओं की निष्पक्ष, पारदर्शी और तटस्थ जाँच की माँग की।
आगे क्या होगा
कामजोंग में हालात अभी भी नाज़ुक बने हुए हैं और सुरक्षाबलों की निगरानी जारी है। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर में जातीय हिंसा के दीर्घकालिक समाधान की दिशा में ठोस कदमों की माँग लगातार बढ़ रही है। दोनों समुदायों के बीच विश्वास बहाली और स्वतंत्र जाँच की माँग अब राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर केंद्रीय मुद्दा बन चुकी है।