जून में थोक महंगाई 9.87% पर पहुँची, वैश्विक ऊर्जा-कमोडिटी कीमतें बनीं मुख्य वजह
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने सोमवार, 3 अगस्त 2026 को लोकसभा में बताया कि जून 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 9.87 प्रतिशत हो गई, जो मई 2026 में 9.68 प्रतिशत थी। सरकार के अनुसार, इस बढ़ोतरी की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में ऊर्जा और कमोडिटी की कीमतों में आई तेज़ी है, जिसका सीधा असर खनिज तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, धातु, रसायन और खाद्य पदार्थों पर पड़ा।
संसद में क्या कहा सरकार ने
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में स्पष्ट किया कि थोक महंगाई में यह वृद्धि मुख्यतः उन वस्तुओं की कीमतों से प्रेरित है जो वैश्विक बाज़ार के उतार-चढ़ाव के प्रति अधिक संवेदनशील होती हैं। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम उत्पाद, खनिज तेल, बेसिक मेटल, रासायनिक उत्पाद और खाद्य सामग्री — इन सभी क्षेत्रों में मूल्य वृद्धि ने WPI को ऊपर धकेला है।
मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि सरकार महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए लगातार कई नीतिगत उपाय कर रही है। इन प्रयासों के चलते उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई को काफी हद तक नियंत्रण में रखा जा सका है।
सरकार के नीतिगत उपाय
चौधरी ने बताया कि सरकार ने आवश्यक खाद्य वस्तुओं का बफर स्टॉक बढ़ाया है और खुले बाज़ार बिक्री योजना (OMSS) के तहत अनाज की आपूर्ति की है। इसके अलावा, ज़रूरत के अनुसार व्यापार नीतियों में संशोधन भी किए गए हैं। इन कदमों का लक्ष्य खाद्य वस्तुओं की कीमतों को स्थिर रखना और उपभोक्ताओं को राहत देना है।
खुदरा महंगाई की स्थिति
थोक महंगाई में वृद्धि के बावजूद खुदरा महंगाई सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्य के दायरे में बनी हुई है। वित्त वर्ष 2026-27 की जनवरी से मार्च तिमाही में CPI महंगाई 3.1 प्रतिशत रही, जबकि अप्रैल से जून तिमाही में यह 3.9 प्रतिशत दर्ज की गई। हालाँकि जून 2026 में यह बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर पहुँच गई, जो मई 2026 में 3.93 प्रतिशत थी। खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों और ईंधन महँगा होने से परिवहन लागत में वृद्धि को इसका प्रमुख कारण माना जा रहा है।
महंगाई लक्ष्य का ढाँचा
गौरतलब है कि सरकार ने भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के साथ मिलकर मार्च 2026 में अगले पाँच वर्षों के लिए खुदरा महंगाई का लक्ष्य तय किया था। इसके तहत 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक महंगाई का लक्ष्य 4 प्रतिशत रखा गया है, जिसमें 2 प्रतिशत की निचली और 6 प्रतिशत की ऊपरी सहनशीलता सीमा है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति शृंखला में अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनाव ऊर्जा बाज़ारों को प्रभावित कर रहे हैं।
आगे क्या होगा
विशेषज्ञों के अनुसार, थोक महंगाई में यह वृद्धि आने वाले महीनों में खुदरा कीमतों पर भी दबाव बना सकती है, विशेषकर यदि वैश्विक ऊर्जा कीमतें ऊँची बनी रहती हैं। RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अगली बैठक में इन आँकड़ों की समीक्षा अपेक्षित है।