थोक महंगाई दर अप्रैल में उछलकर 8.30% पर, क्रूड पेट्रोलियम में 88% की बढ़ोतरी मुख्य कारण
सारांश
मुख्य बातें
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर अप्रैल 2026 में सालाना आधार पर 8.30 प्रतिशत (अनंतिम) दर्ज की गई — जो मार्च 2026 की 3.88 प्रतिशत की तुलना में दोगुने से अधिक है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने गुरुवार को जारी आधिकारिक आँकड़ों में यह जानकारी दी। खनिज तेल, कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में तीव्र वृद्धि इस उछाल का प्रमुख कारण रही है।
मुख्य घटनाक्रम: किस श्रेणी में कितनी महंगाई
मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, प्राइमरी आर्टिकल्स में थोक महंगाई दर सालाना आधार पर 9.17 प्रतिशत रही। फ्यूल एंड पावर श्रेणी में यह दर 24.71 प्रतिशत तक पहुँच गई, जो समग्र WPI को ऊपर खींचने में सबसे बड़ी भूमिका निभा रही है। मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स में महंगाई दर 4.62 प्रतिशत रही।
उल्लेखनीय है कि क्रूड पेट्रोलियम की कीमत में थोक महंगाई दर सालाना आधार पर 88.06 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज हुई। एलपीजी में यह दर 10.92 प्रतिशत रही। हालाँकि, खाद्य उत्पादों में अपेक्षाकृत राहत बनी रही और अप्रैल में खाद्य महंगाई दर 2.31 प्रतिशत पर सीमित रही।
खुदरा महंगाई की स्थिति
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई दर अप्रैल में सालाना आधार पर 3.48 प्रतिशत रही, जो मार्च की 3.40 प्रतिशत से मामूली अधिक है। ग्रामीण क्षेत्र में खुदरा महंगाई 3.74 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र में 3.16 प्रतिशत दर्ज की गई।
खाद्य महंगाई दर अप्रैल में 4.20 प्रतिशत रही, जो मार्च की 3.87 प्रतिशत से अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 4.26 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 4.10 प्रतिशत रही।
राज्यवार स्थिति
खुदरा महंगाई के मामले में तेलंगाना (5.81 प्रतिशत) शीर्ष पर रहा। इसके बाद आंध्र प्रदेश (4.20 प्रतिशत), तमिलनाडु (4.18 प्रतिशत), कर्नाटक (4.00 प्रतिशत) और राजस्थान (3.77 प्रतिशत) का स्थान रहा। दक्षिणी राज्यों में महंगाई का यह उच्च स्तर नीति-निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
RBI का अनुमान और आगे की राह
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की खुदरा महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि रबी की अच्छी फसल से निकट भविष्य में खाद्य आपूर्ति की स्थिति बेहतर रहेगी, जो महंगाई को नियंत्रण में रखने में सहायक होगी। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें घरेलू ईंधन महंगाई पर दबाव बनाए हुए हैं।
गौरतलब है कि WPI और CPI के बीच का यह व्यापक अंतर — 8.30 प्रतिशत बनाम 3.48 प्रतिशत — यह संकेत देता है कि थोक स्तर पर दबाव अभी खुदरा उपभोक्ता तक पूरी तरह नहीं पहुँचा है, लेकिन यदि कच्चे तेल की ऊँची कीमतें बनी रहीं, तो आने वाले महीनों में खुदरा महंगाई पर भी असर पड़ सकता है।