अप्रैल में थोक महंगाई दर 8.3% पर पहुँची, ईंधन-ऊर्जा कीमतों में 24.71% की उछाल मुख्य कारण

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अप्रैल में थोक महंगाई दर 8.3% पर पहुँची, ईंधन-ऊर्जा कीमतों में 24.71% की उछाल मुख्य कारण

सारांश

अप्रैल में थोक महंगाई दर मार्च के 3.88% से उछलकर 8.3% पर पहुँच गई। ईंधन-ऊर्जा श्रेणी में 24.71% और क्रूड पेट्रोलियम में 88.06% की बढ़ोतरी मुख्य वजह रही। खाद्य महंगाई 2.31% पर नियंत्रित रही, लेकिन वैश्विक ऊर्जा बाज़ार की अनिश्चितता आगे भी दबाव बनाए रख सकती है।

मुख्य बातें

अप्रैल में थोक महंगाई दर (WPI) सालाना आधार पर 8.3% रही, जबकि मार्च में यह 3.88% थी।
फ्यूल एंड पावर श्रेणी में थोक महंगाई 24.71% और क्रूड पेट्रोलियम में 88.06% की बढ़ोतरी दर्ज।
एलपीजी में थोक महंगाई 10.92% , प्राइमरी आर्टिकल्स में 9.17% और मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स में 4.62% रही।
खाद्य उत्पादों में थोक महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित — अप्रैल में सालाना 2.31% ।
खुदरा महंगाई (CPI) अप्रैल में 3.48% रही, मार्च के 3.40% से मामूली अधिक।
पीएचडीसीसीआई ने आगे वैश्विक ऊर्जा कीमतों और आपूर्ति श्रृंखला पर कड़ी निगरानी की आवश्यकता जताई।

अप्रैल में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर सालाना आधार पर 8.3 प्रतिशत रही, जो मार्च के 3.88 प्रतिशत से काफी अधिक है। इंडस्ट्री चैंबर पीएचडीसीसीआई के अनुसार, इस तेज उछाल की मुख्य वजह ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में भारी बढ़ोतरी है, जिसने कई मैन्युफैक्चरिंग सेगमेंट्स की इनपुट लागत को सीधे प्रभावित किया है।

श्रेणीवार महंगाई का ब्यौरा

सरकारी आँकड़ों के अनुसार, फ्यूल एंड पावर श्रेणी में थोक महंगाई दर सालाना आधार पर 24.71 प्रतिशत रही — जो समग्र WPI में सर्वाधिक योगदान देने वाली श्रेणी रही। क्रूड पेट्रोलियम की कीमतों में सालाना आधार पर 88.06 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि एलपीजी में यह बढ़ोतरी 10.92 प्रतिशत रही।

प्राइमरी आर्टिकल्स में थोक महंगाई 9.17 प्रतिशत और मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स में 4.62 प्रतिशत रही। हालाँकि, खाद्य उत्पादों में महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित रही और अप्रैल में सालाना आधार पर मात्र 2.31 प्रतिशत दर्ज की गई।

वैश्विक कारण और भू-राजनीतिक जोखिम

पीएचडीसीसीआई के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने कहा कि भू-राजनीतिक जोखिम में वृद्धि, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों में माँग-आपूर्ति के असंतुलन के कारण ग्लोबल ब्रेंट क्रूड की कीमतों में भारी उछाल देखा गया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक अस्थिरता बढ़ने के बावजूद थोक खाद्य महंगाई अन्य श्रेणियों की तुलना में नियंत्रित रही।

खुदरा महंगाई से तुलना

उल्लेखनीय है कि इससे पहले जारी सरकारी आँकड़ों के अनुसार, खुदरा महंगाई दर (CPI) अप्रैल में सालाना आधार पर 3.48 प्रतिशत रही, जो मार्च के 3.40 प्रतिशत से मामूली अधिक है। WPI और CPI के बीच यह व्यापक अंतर दर्शाता है कि ऊर्जा लागत का दबाव फिलहाल उत्पादन स्तर पर अधिक महसूस हो रहा है, जबकि उपभोक्ता स्तर पर इसका असर अभी सीमित है।

विशेषज्ञों की राय और आगे की राह

पीएचडीसीसीआई के महासचिव एवं सीईओ डॉ. रंजीत मेहता ने कहा, 'आगे चलकर, वैश्विक ऊर्जा कीमतों, कमोडिटी बाज़ारों और आपूर्ति श्रृंखला की स्थितियों में होने वाले बदलाव थोक महंगाई के रुझानों के महत्वपूर्ण निर्धारक बने रहेंगे। ईंधन की लागत और मैन्युफैक्चरिंग एवं परिवहन क्षेत्रों में इसके प्रभाव पर आने वाले महीनों में बारीकी से नज़र रखी जाएगी।' यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय उद्योग जगत पहले से ही वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं से जूझ रहा है। आने वाले महीनों में ऊर्जा बाज़ारों की दिशा यह तय करेगी कि क्या यह दबाव उपभोक्ता कीमतों तक भी पहुँचता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

और यह दबाव देर-सबेर उपभोक्ता कीमतों में भी दिख सकता है। WPI और CPI के बीच मौजूदा व्यापक अंतर संकेत देता है कि उत्पादक अभी यह बोझ खुद उठा रहे हैं, लेकिन यह स्थिति अनिश्चितकाल तक नहीं टिक सकती।
RashtraPress
14 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अप्रैल 2026 में थोक महंगाई दर कितनी रही?
अप्रैल 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर सालाना आधार पर 8.3 प्रतिशत रही। यह मार्च के 3.88 प्रतिशत से काफी अधिक है।
थोक महंगाई में इस उछाल का मुख्य कारण क्या है?
ईंधन और ऊर्जा श्रेणी में 24.71 प्रतिशत और क्रूड पेट्रोलियम में 88.06 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी इस उछाल का प्रमुख कारण है। वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिम और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान ने ब्रेंट क्रूड कीमतों को ऊँचाई पर बनाए रखा।
खाद्य महंगाई पर इसका क्या असर पड़ा?
खाद्य उत्पादों में थोक महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित रही और अप्रैल में सालाना आधार पर 2.31 प्रतिशत दर्ज की गई। पीएचडीसीसीआई के अनुसार, वैश्विक अस्थिरता के बावजूद खाद्य थोक महंगाई अन्य श्रेणियों की तुलना में कम रही।
थोक महंगाई (WPI) और खुदरा महंगाई (CPI) में अभी कितना अंतर है?
अप्रैल में WPI 8.3 प्रतिशत रही, जबकि CPI 3.48 प्रतिशत। यह व्यापक अंतर दर्शाता है कि ऊर्जा लागत का दबाव अभी मुख्यतः उत्पादन स्तर पर है और उपभोक्ता स्तर पर इसका असर सीमित है।
आगे थोक महंगाई का रुझान कैसा रह सकता है?
पीएचडीसीसीआई के महासचिव डॉ. रंजीत मेहता के अनुसार, वैश्विक ऊर्जा कीमतों, कमोडिटी बाज़ारों और आपूर्ति श्रृंखला की स्थितियों में बदलाव आने वाले महीनों में थोक महंगाई के रुझान तय करेंगे। मैन्युफैक्चरिंग और परिवहन क्षेत्रों पर ईंधन लागत के प्रभाव पर कड़ी नज़र रखी जाएगी।
राष्ट्र प्रेस
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