ईरान परमाणु हथियार नहीं रख सकता — बीजिंग में ट्रंप-जिनपिंग की सहमति, व्हाइट हाउस ने की पुष्टि
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने बीजिंग में हुई एक अहम द्विपक्षीय बैठक में इस बात पर स्पष्ट सहमति जताई कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। व्हाइट हाउस ने 14 मई को सोशल मीडिया के ज़रिए इस बैठक के परिणामों की जानकारी साझा की। यह बैठक ट्रंप के तीन दिवसीय चीन दौरे के दौरान हुई, जिसे दोनों देशों के बीच संबंधों को नए सिरे से पटरी पर लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
बैठक में क्या हुआ
व्हाइट हाउस के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच हुई यह बैठक 'सकारात्मक और अहम' रही। चर्चा में अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक सहयोग को मज़बूत करने के तरीकों पर विशेष ध्यान दिया गया। इसमें अमेरिकी कंपनियों के लिए चीनी बाज़ार तक अधिक पहुँच और अमेरिकी उद्योगों में चीनी निवेश बढ़ाने जैसे मुद्दे केंद्र में रहे। बैठक के एक हिस्से में कई प्रमुख अमेरिकी कंपनियों के शीर्ष अधिकारी भी उपस्थित रहे।
होर्मुज़ स्ट्रेट और ऊर्जा सुरक्षा
बैठक में होर्मुज़ स्ट्रेट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। दोनों देशों ने माना कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को बाधारहित बनाए रखने के लिए इस रणनीतिक जलमार्ग का खुला रहना अनिवार्य है। राष्ट्रपति जिनपिंग ने होर्मुज़ स्ट्रेट के सैन्यीकरण का विरोध किया और इस मार्ग पर किसी भी प्रकार का शुल्क या टोल लगाने की कोशिशों को अस्वीकार्य बताया। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि चीन भविष्य में अमेरिका से अधिक तेल खरीदने में रुचि रखता है, ताकि इस जलमार्ग पर अपनी निर्भरता घटाई जा सके।
फेंटेनिल और कृषि व्यापार पर चर्चा
दोनों नेताओं ने अमेरिका में फेंटेनिल प्रीकर्सर्स (फेंटेनिल से जुड़े रसायनों) की तस्करी रोकने की दिशा में जारी सहयोग को और आगे बढ़ाने की ज़रूरत पर भी बल दिया। इसके अतिरिक्त, चीन की ओर से अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श हुआ — एक ऐसा मुद्दा जो दोनों देशों के व्यापारिक संतुलन के लिहाज़ से संवेदनशील रहा है।
ईरान परमाणु मुद्दे पर साझा रुख
व्हाइट हाउस ने अपने आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया कि अमेरिका और चीन दोनों इस बात पर एकमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की कभी इजाज़त नहीं दी जानी चाहिए। यह सहमति ऐसे समय में सामने आई है जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है और वाशिंगटन-तेहरान के बीच वार्ता का भविष्य अनिश्चित बना हुआ है।
आगे क्या
ट्रंप का यह चीन दौरा दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव की पृष्ठभूमि में हुआ है। आलोचकों का कहना है कि बैठक में हुई सहमतियों को ठोस नीतिगत कदमों में बदलने की असली परीक्षा अभी बाकी है। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान परमाणु मुद्दे पर अमेरिका-चीन की साझा स्थिति कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके व्यावहारिक परिणाम आने वाले हफ्तों की बातचीत पर निर्भर करेंगे।