PPI बनाम WPI: केंद्र सरकार का नया उत्पादक मूल्य सूचकांक लॉन्च, 15 जून से जारी होगा डेटा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने मंगलवार को प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) लॉन्च करने का औपचारिक ऐलान किया, जो आने वाले वर्षों में मौजूदा थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की जगह लेगा। लंबी तैयारी के बाद उठाए गए इस कदम को देश में महंगाई मापने की पद्धति में एक परिवर्तनकारी बदलाव माना जा रहा है, जिससे मूल्य दबावों का अधिक सटीक अनुमान संभव हो सकेगा।
मुख्य घटनाक्रम
सरकार की ओर से 15 जून को WPI के साथ-साथ नया PPI डेटा भी जारी किया जाएगा। शुरुआती चरण में दोनों सूचकांक समानांतर रूप से प्रकाशित होंगे, जिसके बाद PPI धीरे-धीरे WPI का स्थान ले लेगा।
WPI और PPI में बुनियादी अंतर
WPI थोक व्यापार के प्रारंभिक चरण में वस्तुओं की कीमतों में होने वाले औसत परिवर्तन को मापता है, यानी यह थोक व्यापारियों और थोक बिक्री के दृष्टिकोण से महंगाई का आकलन करता है। इसके विपरीत, PPI घरेलू उत्पादकों द्वारा कारखाने या खेत के स्तर पर अपने उत्पादन के लिए प्राप्त कीमतों में होने वाले औसत परिवर्तन को मापता है — यानी यह सीधे उत्पादक के नज़रिए से महंगाई दर्ज करता है।
WPI से बेहतर क्यों माना जा रहा है PPI
विशेषज्ञों के अनुसार, WPI की एक बड़ी सीमा यह है कि वह एक ही उत्पाद की गणना कई बार करता है, क्योंकि वस्तु एक थोक बिक्री चरण से दूसरे चरण में जाती है। PPI 'आपूर्ति और उपयोग तालिकाओं' (Supply and Use Tables) का इस्तेमाल करते हुए एकल उत्पादन चरण पर उत्पादों को ट्रैक करता है, जिससे दोहरी या बहुस्तरीय गणना पूरी तरह समाप्त हो जाती है।
एक और अहम अंतर करों और मार्जिन का है। WPI लेनदेन में अक्सर थोक स्तर तक वितरण लागत और अप्रत्यक्ष कर शामिल होते हैं। वहीं PPI — विशेष रूप से मूल मूल्य निर्धारण (Basic Pricing) के तहत — कर और व्यापार/परिवहन मार्जिन को बाहर रखता है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उत्पादक को वास्तव में कितनी राशि प्राप्त हो रही है।
इनपुट और आउटपुट दोनों स्तरों पर नज़र
PPI दो प्रकार के सूचकांक उपलब्ध कराता है — इनपुट इंडेक्स, जो विनिर्माताओं द्वारा कच्चे माल और सामग्रियों के लिए भुगतान की गई राशि को मापता है, और आउटपुट इंडेक्स, जो उनके द्वारा अपने उत्पादों के लिए वसूली गई कीमत दर्शाता है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि आपूर्ति श्रृंखला में मूल्य दबाव किस तरह एक चरण से दूसरे चरण तक फैलता है।
ग्लोबल स्टैंडर्ड के साथ तालमेल
सरकार के मुताबिक, PPI को लागू करने का एक प्रमुख उद्देश्य भारतीय महंगाई आँकड़ों को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालना है। अधिकांश विकसित अर्थव्यवस्थाएँ पहले से ही उत्पादक मूल्य आधारित सूचकांकों का उपयोग करती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय तुलनात्मक विश्लेषण आसान हो जाता है।
आने वाले महीनों में PPI के डेटा से नीति-निर्माताओं, RBI और उद्योग जगत को मूल्य रुझानों की अधिक सूक्ष्म तस्वीर मिलने की उम्मीद है।