WPI का आधार वर्ष बदलकर 2022-23 होगा, सरकार लाएगी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स — महंगाई मापन में बड़ा बदलाव
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने जा रही है और साथ ही उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) भी लॉन्च करने की तैयारी में है। नई दिल्ली में 2 जून को की गई इस घोषणा को भारत की महंगाई मापने की सांख्यिकीय प्रणाली के व्यापक आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मुख्य घोषणाएँ
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के सचिव सौरभ गर्ग ने बताया कि संशोधित WPI शृंखला में आधार वर्ष 2011-12 की जगह 2022-23 होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्रालय ने WPI 2022-23 के आंतरिक आंकड़ों का उपयोग पहले ही कर लिया है ताकि अप्रैल के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के आंकड़ों में संशोधन की ज़रूरत न पड़े। उनके अनुसार, ये आंकड़े अगले कुछ सप्ताह में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होंगे।
इस विषय पर उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के प्रधान आर्थिक सलाहकार प्रवीण महतो मंगलवार को मीडिया को विस्तृत ब्रीफिंग देंगे।
WPI से PPI में बदलाव — क्रमिक प्रक्रिया
सचिव सौरभ गर्ग ने स्पष्ट किया कि नया सूचकांक लॉन्च होने के बाद भी WPI से आउटपुट PPI में तत्काल परिवर्तन नहीं किया जाएगा। सरकार पहले नई शृंखला की स्थिरता और विश्वसनीयता का गहन अध्ययन करेगी, उसके बाद ही इसे व्यापक स्तर पर अपनाने का निर्णय होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में WPI और आउटपुट PPI के बीच बड़े अंतर की संभावना नहीं है, क्योंकि WPI की मौजूदा गणना-पद्धति पहले से ही इस अंतर को सीमित रखती है।
व्यापक सांख्यिकीय सुधार का हिस्सा
यह घोषणा उस बड़े सुधार अभियान का हिस्सा है जिसकी शुरुआत फरवरी 2026 में हुई थी, जब सरकार ने एक साथ कई बड़े बदलावों की घोषणा की थी। उस समय बताया गया था कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का आधार वर्ष 2022-23 किया जाएगा, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) का आधार वर्ष 2024 होगा और IIP का आधार वर्ष भी 2022-23 किया जाएगा। गौरतलब है कि इस घोषणा से एक दिन पहले ही MoSPI ने 2022-23 आधार वर्ष के साथ संशोधित IIP जारी किया था।
मंत्रालय के अनुसार, जब तक नया WPI उपलब्ध नहीं हो जाता, तब तक मौजूदा WPI का उपयोग डिफ्लेटर के रूप में जारी रहेगा। मूल्य-आधारित वस्तुओं की गणना के लिए नए आधार वर्ष वाले अद्यतन WPI डिफ्लेटर का उपयोग पहले ही शुरू हो चुका है।
PPI क्या है और यह क्यों ज़रूरी है
प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) उन वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में होने वाले बदलाव को मापता है जिन्हें उत्पादक खरीदते और बेचते हैं। यह सूचकांक उत्पादन स्तर पर मूल्य-रुझानों को अधिक सटीक रूप से दर्शाता है और महंगाई के आकलन को बेहतर बनाता है। अधिकांश विकसित अर्थव्यवस्थाएँ WPI की जगह PPI का उपयोग करती हैं, और भारत का यह कदम उसी दिशा में है।
आगे क्या होगा
नई WPI शृंखला के सार्वजनिक होने के बाद सरकार उसकी विश्वसनीयता परखेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई शृंखला स्थिर साबित होती है, तो भारत अगले कुछ वर्षों में PPI को आधिकारिक महंगाई संकेतक के रूप में अपना सकता है — जो नीति-निर्माण और वित्तीय बाज़ारों दोनों के लिए अहम होगा।