17 जुलाई 2026
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WPI का आधार वर्ष बदलकर 2022-23 होगा, सरकार लाएगी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स — महंगाई मापन में बड़ा बदलाव

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WPI का आधार वर्ष बदलकर 2022-23 होगा, सरकार लाएगी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स — महंगाई मापन में बड़ा बदलाव

सारांश

भारत की महंगाई मापने की प्रणाली में बड़ा बदलाव आ रहा है — WPI का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 होगा और नया PPI लॉन्च होगा। यह GDP, CPI और IIP के बाद चौथा बड़ा सांख्यिकीय सुधार है, जो भारत को वैश्विक मानकों के करीब लाएगा।

मुख्य बातें

WPI का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया जाएगा; नए आंकड़े अगले कुछ सप्ताह में सार्वजनिक होंगे।
प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) भी लॉन्च होगा, जो उत्पादन स्तर पर मूल्य-रुझान मापेगा।
MoSPI सचिव सौरभ गर्ग ने कहा — WPI से PPI में बदलाव तत्काल नहीं होगा; पहले नई शृंखला की स्थिरता परखी जाएगी।
यह सुधार फरवरी 2026 में घोषित व्यापक सांख्यिकीय आधुनिकीकरण का हिस्सा है, जिसमें GDP, CPI और IIP के आधार वर्ष भी बदले जा रहे हैं।
DPIIT के प्रधान आर्थिक सलाहकार प्रवीण महतो मंगलवार को मीडिया को विस्तृत ब्रीफिंग देंगे।

केंद्र सरकार थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने जा रही है और साथ ही उत्पादक मूल्य सूचकांक (PPI) भी लॉन्च करने की तैयारी में है। नई दिल्ली में 2 जून को की गई इस घोषणा को भारत की महंगाई मापने की सांख्यिकीय प्रणाली के व्यापक आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मुख्य घोषणाएँ

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के सचिव सौरभ गर्ग ने बताया कि संशोधित WPI शृंखला में आधार वर्ष 2011-12 की जगह 2022-23 होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्रालय ने WPI 2022-23 के आंतरिक आंकड़ों का उपयोग पहले ही कर लिया है ताकि अप्रैल के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के आंकड़ों में संशोधन की ज़रूरत न पड़े। उनके अनुसार, ये आंकड़े अगले कुछ सप्ताह में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होंगे।

इस विषय पर उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के प्रधान आर्थिक सलाहकार प्रवीण महतो मंगलवार को मीडिया को विस्तृत ब्रीफिंग देंगे।

WPI से PPI में बदलाव — क्रमिक प्रक्रिया

सचिव सौरभ गर्ग ने स्पष्ट किया कि नया सूचकांक लॉन्च होने के बाद भी WPI से आउटपुट PPI में तत्काल परिवर्तन नहीं किया जाएगा। सरकार पहले नई शृंखला की स्थिरता और विश्वसनीयता का गहन अध्ययन करेगी, उसके बाद ही इसे व्यापक स्तर पर अपनाने का निर्णय होगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में WPI और आउटपुट PPI के बीच बड़े अंतर की संभावना नहीं है, क्योंकि WPI की मौजूदा गणना-पद्धति पहले से ही इस अंतर को सीमित रखती है।

व्यापक सांख्यिकीय सुधार का हिस्सा

यह घोषणा उस बड़े सुधार अभियान का हिस्सा है जिसकी शुरुआत फरवरी 2026 में हुई थी, जब सरकार ने एक साथ कई बड़े बदलावों की घोषणा की थी। उस समय बताया गया था कि सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का आधार वर्ष 2022-23 किया जाएगा, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) का आधार वर्ष 2024 होगा और IIP का आधार वर्ष भी 2022-23 किया जाएगा। गौरतलब है कि इस घोषणा से एक दिन पहले ही MoSPI ने 2022-23 आधार वर्ष के साथ संशोधित IIP जारी किया था।

मंत्रालय के अनुसार, जब तक नया WPI उपलब्ध नहीं हो जाता, तब तक मौजूदा WPI का उपयोग डिफ्लेटर के रूप में जारी रहेगा। मूल्य-आधारित वस्तुओं की गणना के लिए नए आधार वर्ष वाले अद्यतन WPI डिफ्लेटर का उपयोग पहले ही शुरू हो चुका है।

PPI क्या है और यह क्यों ज़रूरी है

प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) उन वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में होने वाले बदलाव को मापता है जिन्हें उत्पादक खरीदते और बेचते हैं। यह सूचकांक उत्पादन स्तर पर मूल्य-रुझानों को अधिक सटीक रूप से दर्शाता है और महंगाई के आकलन को बेहतर बनाता है। अधिकांश विकसित अर्थव्यवस्थाएँ WPI की जगह PPI का उपयोग करती हैं, और भारत का यह कदम उसी दिशा में है।

आगे क्या होगा

नई WPI शृंखला के सार्वजनिक होने के बाद सरकार उसकी विश्वसनीयता परखेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई शृंखला स्थिर साबित होती है, तो भारत अगले कुछ वर्षों में PPI को आधिकारिक महंगाई संकेतक के रूप में अपना सकता है — जो नीति-निर्माण और वित्तीय बाज़ारों दोनों के लिए अहम होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

जबकि अधिकांश G20 अर्थव्यवस्थाएँ दशकों पहले WPI से PPI पर जा चुकी हैं। GDP, CPI, IIP और अब WPI — एक साथ इतने सूचकांकों का आधार वर्ष बदलने से अल्पकालिक तुलनात्मक भ्रम पैदा हो सकता है, जिसके लिए बाज़ार और नीति-निर्माताओं को तैयार रहना होगा। क्रमिक दृष्टिकोण सावधानीपूर्ण है, पर इसमें पारदर्शी रोडमैप की कमी है।
RashtraPress
17 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

WPI का आधार वर्ष क्यों बदला जा रहा है?
WPI का मौजूदा आधार वर्ष 2011-12 है, जो डेढ़ दशक पुराना हो चुका है और आज की आर्थिक संरचना को सटीक नहीं दर्शाता। इसे 2022-23 करने से महंगाई का आकलन अधिक सटीक और प्रासंगिक होगा।
प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) क्या है और यह WPI से कैसे अलग है?
PPI उन वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव मापता है जिन्हें उत्पादक खरीदते और बेचते हैं — इसमें सेवा क्षेत्र भी शामिल होता है जो WPI में नहीं था। यह उत्पादन स्तर पर महंगाई की अधिक व्यापक तस्वीर देता है और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।
क्या WPI की जगह तुरंत PPI लागू हो जाएगा?
नहीं। MoSPI सचिव सौरभ गर्ग के अनुसार, WPI से PPI में बदलाव तत्काल नहीं होगा। सरकार पहले नई शृंखला की स्थिरता और विश्वसनीयता का अध्ययन करेगी, उसके बाद ही व्यापक अपनाने का निर्णय लिया जाएगा।
यह बदलाव किस बड़े सुधार का हिस्सा है?
यह फरवरी 2026 में घोषित भारत के व्यापक सांख्यिकीय आधुनिकीकरण अभियान का हिस्सा है। इसके तहत GDP, CPI और IIP के आधार वर्ष भी क्रमशः 2022-23 और 2024 किए जा रहे हैं।
नए WPI आंकड़े कब उपलब्ध होंगे?
MoSPI सचिव सौरभ गर्ग के अनुसार, 2022-23 आधार वर्ष वाले WPI के आंकड़े अगले कुछ सप्ताह में सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होने की उम्मीद है। तब तक मौजूदा WPI का उपयोग डिफ्लेटर के रूप में जारी रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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