प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स लागू: महंगाई निगरानी होगी मजबूत, WPI का नया आधार वर्ष 2022-23
सारांश
मुख्य बातें
भारत सरकार ने नया प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) फ्रेमवर्क लागू किया है, जिसे अर्थशास्त्रियों और उद्योग विशेषज्ञों ने 15 जून 2026 को सराहा। विशेषज्ञों के अनुसार इस कदम से देश की महंगाई निगरानी प्रणाली अधिक सटीक और वैश्विक मानकों के अनुरूप बनेगी। इसके साथ ही थोक मूल्य सूचकांक (WPI) का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 कर दिया गया है।
नई PPI प्रणाली में क्या बदला
सरकार ने संशोधित WPI श्रृंखला के साथ-साथ तीन नए सूचकांक एक साथ जारी किए हैं — आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (OPPI), ट्रायल इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (IPPI) और सर्विसेज प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (SPPI)। नई व्यवस्था में वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है। वेटेज की गणना अब ग्रॉस वैल्यू ऑफ आउटपुट (GVO) के आधार पर होगी, जो पहले की पद्धति से अधिक व्यापक मानी जा रही है।
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया
केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने कहा कि OPPI, ट्रायल IPPI और SPPI की शुरुआत घरेलू मूल्य सूचकांकों को अंतरराष्ट्रीय प्रथाओं के अनुरूप बनाने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (PHDCCI) के अध्यक्ष राजीव जुनेजा ने इस नई श्रृंखला को एक महत्वपूर्ण आधुनिकीकरण पहल बताया और कहा कि इससे भारत के महंगाई आँकड़े वैश्विक स्तर पर मान्य मानकों के और करीब पहुँचेंगे।
PHDCCI के अनुसार, अगले पाँच वर्षों तक WPI और PPI दोनों का समानांतर प्रकाशन महंगाई विश्लेषण को मजबूत करेगा, उद्योग स्तर पर निगरानी बेहतर बनाएगा और नए फ्रेमवर्क में सुचारु परिवर्तन सुनिश्चित करेगा।
मई में थोक महंगाई: ईंधन ने बढ़ाई चिंता
सरकार द्वारा जारी आँकड़ों के अनुसार, मई 2026 में वार्षिक थोक महंगाई दर बढ़कर 9.68 प्रतिशत हो गई, जो अप्रैल में 8.26 प्रतिशत थी। यह वृद्धि मुख्य रूप से ईंधन और ऊर्जा क्षेत्र में आई तेज बढ़ोतरी के कारण हुई — ईंधन और बिजली महंगाई मई में 30.33 प्रतिशत तक पहुँच गई। विनिर्मित उत्पादों की महंगाई 7.48 प्रतिशत और खाद्य महंगाई अपेक्षाकृत नियंत्रित 4.49 प्रतिशत रही।
रजनी सिन्हा ने कहा, 'हालांकि सभी प्रमुख समूहों में महंगाई बढ़ी है, लेकिन ईंधन, बिजली और विनिर्मित वस्तुओं में वृद्धि सबसे अधिक देखने को मिली है। यह पश्चिम एशिया संकट के थोक कीमतों पर पड़ने वाले प्रभाव को दर्शाता है।'
आगे का जोखिम: क्रूड और एल नीनो
रजनी सिन्हा ने अनुमान जताया कि यदि ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत वित्त वर्ष 2026-27 में लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो WPI महंगाई औसतन 7.8 प्रतिशत रह सकती है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस वर्ष एल नीनो की संभावना अधिक होने के कारण खाद्य महंगाई का जोखिम भी बना हुआ है। पश्चिम एशिया में हालिया सकारात्मक घटनाक्रमों के बाद वैश्विक ऊर्जा कीमतों में कुछ नरमी आई है, हालाँकि स्थिति अभी पूरी तरह स्थिर नहीं है।
सिन्हा ने कहा, 'अब तक तेल विपणन कंपनियों और सरकार ने कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का बड़ा हिस्सा अपने स्तर पर संभाला है। आगे घरेलू कच्चे तेल की कीमतों की दिशा वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।'
बजाज ब्रोकिंग के शाश्वत सिंह ने कहा कि मई में थोक महंगाई बढ़ने का सबसे बड़ा कारण ईंधन और बिजली क्षेत्र रहा, जिसमें कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और खनिज तेलों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी शामिल है। उनके अनुसार खुदरा महंगाई के स्थिर रहने से उपभोक्ता माँग को समर्थन मिल रहा है, लेकिन ईंधन और ऊर्जा लागत से उत्पन्न कॉस्ट-पुश दबाव मौजूदा भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच निकट भविष्य में जोखिम बना रह सकता है।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी सांख्यिकीय प्रणाली को IMF और UN के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप ढालने की कोशिश में है। PPI फ्रेमवर्क के पूर्ण क्रियान्वयन से नीति-निर्माताओं, उद्योगों और निवेशकों को मूल्य दबावों का अधिक सटीक आकलन करने में मदद मिलेगी। गौरतलब है कि WPI और PPI का समानांतर प्रकाशन अगले पाँच वर्षों तक जारी रहेगा, जिससे दोनों प्रणालियों के बीच तुलना और डेटा की निरंतरता बनी रहेगी।