महंगाई मापन में बड़ा बदलाव: WPI बास्केट में 957 वस्तुएँ, PPI भी होगा लॉन्च
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने मंगलवार, 2 जून को महंगाई के सटीक आकलन के लिए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की कार्यप्रणाली में बड़े बदलाव करते हुए बास्केट में वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी है, और साथ ही पहली बार प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) लॉन्च करने का ऐलान भी किया। नई WPI सीरीज़ का आधार वर्ष 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया गया है, जो 15 जून को जारी होने वाले आँकड़ों से प्रभावी होगा।
मुख्य घटनाक्रम
सरकार के अनुसार, इन बदलावों का उद्देश्य भारत के महंगाई मापन को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाना और थोक स्तर पर मूल्य परिवर्तनों की अधिक सटीक तस्वीर पेश करना है। नई बास्केट में 260 अतिरिक्त वस्तुएँ जोड़ी गई हैं, जो पिछले एक दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था के बदले हुए उत्पादन और खपत ढाँचे को प्रतिबिंबित करती हैं।
ऊर्जा क्षेत्र का पुनर्गठन
इलेक्ट्रिसिटी ग्रुप के तहत पहली बार सोलर, विंड और परमाणु बिजली जैसे नए ऊर्जा स्रोतों को शामिल किया गया है — यह भारत के नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन को आधिकारिक मूल्य आँकड़ों में दर्ज करने का बड़ा कदम है। सरकारी बयान के अनुसार, कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को 'प्राथमिक वस्तुओं' से हटाकर 'ईंधन और विद्युत खंड' में स्थानांतरित कर दिया गया है, जिससे कोयला, बिजली और पेट्रोलियम उत्पादों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित होगा।
PPI की भूमिका और दायरा
PPI WPI के साथ-साथ जारी किया जाएगा और आने वाले समय में इसकी जगह लेगा। यह सूचकांक आउटपुट, इनपुट और मुख्य सर्विस सेक्टर्स को कवर करेगा। सर्विस PPI में बैंकिंग, इंश्योरेंस, रेलवे, टेलीकॉम और एयर ट्रैवल को शामिल किया गया है — ऐसे क्षेत्र जो भारत की GDP में बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं लेकिन अब तक थोक महंगाई मापन से बाहर थे।
क्यों मायने रखता है
यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब वैश्विक केंद्रीय बैंक उत्पादक-स्तर की महंगाई पर अधिक भरोसा कर रहे हैं, जबकि भारत अब तक मुख्य रूप से WPI पर निर्भर था — एक ऐसा सूचकांक जिसकी सेवा क्षेत्र को न समेटने के लिए लंबे समय से आलोचना होती रही है। गौरतलब है कि भारत की GDP में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 50% से अधिक है, और PPI के आने से नीति निर्माताओं को महंगाई का अधिक संपूर्ण चित्र मिल सकेगा।
आगे क्या
सरकार के मुताबिक, WPI और PPI दोनों को मासिक आधार पर जारी किया जाएगा, जबकि सर्विस PPI तिमाही आधार पर आएगा। दोनों सूचकांकों को अगले पाँच वर्षों तक एक साथ प्रकाशित किया जाएगा, ताकि उपयोगकर्ता धीरे-धीरे नई प्रणाली की ओर संक्रमण कर सकें। नई सीरीज़ में भार निर्धारण, गणना कार्यप्रणाली और लापता मूल्य डेटा को भरने के लिए बेहतर सांख्यिकीय विधियाँ भी शामिल की गई हैं।