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संदीप सिकंद बोले — हिंदी टेलीविजन को ओरिजिनल स्टोरीटेलिंग पर लौटना होगा

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संदीप सिकंद बोले — हिंदी टेलीविजन को ओरिजिनल स्टोरीटेलिंग पर लौटना होगा

सारांश

हिंदी टेलीविजन के दिग्गज अभिनेता संदीप सिकंद ने साफ कहा — रीजनल रीमेक की लत और पुराने ढर्रे की कहानियाँ टीवी को डुबो रही हैं। उनका संदेश सीधा है: ओरिजिनल स्टोरीटेलिंग पर लौटो, वरना वापसी मुश्किल हो जाएगी।

मुख्य बातें

अभिनेता संदीप सिकंद ने 18 सितंबर 2026 को हिंदी टेलीविजन की स्टोरीटेलिंग पर गंभीर चिंता जताई।
उनके अनुसार हिंदी टीवी की अधिकांश कहानियाँ पश्चिमी शो या क्षेत्रीय धारावाहिकों के रीमेक पर निर्भर हैं।
सिकंद ने कहा — टीवी आज की महिलाओं और समकालीन वास्तविकता को ठीक से नहीं दिखा रहा।
टेलीविजन से जुड़े प्रतिभाशाली कलाकारों और लेखकों को उचित अवसर न मिलने पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने उद्योग से ओरिजिनल स्टोरीटेलिंग पर वापसी और सामूहिक प्रयास की अपील की।

अभिनेता संदीप सिकंद, जिन्होंने 'कहानी घर-घर की', 'अमृत मंथन' और 'बंदिनी' जैसे चर्चित धारावाहिकों में अपनी अभिनय-क्षमता का लोहा मनवाया, ने हिंदी टेलीविजन की मौजूदा दशा पर खुलकर अपनी राय रखी है। मुंबई में हुई एक बातचीत में उन्होंने कहा कि आज हिंदी टीवी की अधिकांश कहानियाँ या तो पश्चिमी शो से या क्षेत्रीय धारावाहिकों से प्रेरित हैं, और यह प्रवृत्ति उद्योग के लिए दीर्घकाल में घातक साबित हो सकती है।

हिंदी टीवी की बदलती तस्वीर

संदीप सिकंद ने कहा, 'हिंदी टेलीविजन बड़े स्टोरीटेलिंग मीडियम में से एक माना जाता है और अनगिनत लोग इसे देखते हैं।' उन्होंने माना कि टीवी ने उन्हें और अनेक लोगों को करियर दिया है, लेकिन साथ ही अफसोस जताया कि एक वक्त जब टीवी में दर्शकों को लुभाने वाली असली कहानियाँ परोसी जाती थीं, वह दौर अब बीत चुका है। उनके अनुसार, 'कई हिंदी शो में कहानी कहने का तरीका अभी भी पुराने दशकों वाला है।'

आज की महिलाओं और असलियत की अनदेखी

सिकंद का मानना है कि हिंदी टीवी आज की महिलाओं, समकालीन परिस्थितियों और वास्तविक जीवन की कहानियों को ठीक से नहीं दिखा रहा। उन्होंने कहा, 'टीवी आज की महिलाओं, आज के हालात और असलियत की कहानियों को ठीक से एक्सप्लोर नहीं कर रहा, जो उसके लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर महिला-केंद्रित और समसामयिक कथाओं को भारी दर्शक-वर्ग मिल रहा है।

क्षेत्रीय रीमेक पर निर्भरता चिंताजनक

अभिनेता ने क्षेत्रीय शो के रीमेक बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'रीजनल शो पर हमारी डिपेंडेंसी भी कम होनी चाहिए। आप कितने रीजनल शो रीमेक कर सकते हैं? वह भी आखिरकार खत्म हो जाएगा। हमें ओरिजिनल स्टोरीटेलिंग पर लौटना होगा।' गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में दक्षिण भारतीय और मराठी धारावाहिकों के हिंदी रूपांतरण की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

टैलेंट को मौके नहीं मिलते

सिकंद ने यह भी रेखांकित किया कि टेलीविजन से जुड़े प्रतिभाशाली कलाकारों, तकनीशियनों और लेखकों को उनकी क्षमता के अनुरूप अवसर नहीं मिलते। उनके शब्दों में, 'टेलीविजन में कई टैलेंटेड एक्टर्स, टेक्नीशियन और स्टोरीटेलर काम कर रहे हैं, जो फिल्मों और ओटीटी पर दिखने वाले कुछ कंटेंट से कहीं बेहतर लिख सकते हैं, लेकिन उन्हें मौके नहीं मिलते क्योंकि वे टेलीविजन से आते हैं।' उन्होंने इसे प्रतिभा के साथ अन्याय बताया।

सामूहिक प्रयास की ज़रूरत

अपनी बात को समेटते हुए संदीप सिकंद ने कहा कि वे खुद भी मौजूदा टीवी कंटेंट से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, 'हमें टेलीविजन को वापस उसके अच्छे दौर में लाना होगा और यह हम सबकी मिलकर की गई मेहनत से होगा।' उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब हिंदी टीवी की टीआरपी लगातार गिर रही है और दर्शक ओटीटी की ओर खिंच रहे हैं। अब देखना होगा कि उद्योग उनकी इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन इसके पीछे एक गहरी संरचनात्मक समस्या है — हिंदी टीवी उद्योग में रचनात्मक जोखिम लेने की इच्छाशक्ति की कमी है, क्योंकि टीआरपी-आधारित विज्ञापन मॉडल निर्माताओं को सुरक्षित, परखे हुए फॉर्मूले पर टिके रहने के लिए मजबूर करता है। ओटीटी प्लेटफॉर्म ठीक वही कर रहे हैं जो सिकंद माँग रहे हैं — और दर्शक वहाँ जा रहे हैं। असली सवाल यह नहीं कि ओरिजिनल कहानियाँ लिखी जाएँ, बल्कि यह है कि क्या मौजूदा कमीशनिंग और वित्तपोषण ढाँचा ऐसी कहानियों को पर्दे तक पहुँचने देगा।
RashtraPress
18 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

संदीप सिकंद ने हिंदी टेलीविजन के बारे में क्या कहा?
संदीप सिकंद ने कहा कि हिंदी टीवी की अधिकांश कहानियाँ पश्चिमी या क्षेत्रीय शो से प्रेरित हैं और उद्योग को ओरिजिनल स्टोरीटेलिंग पर वापस लौटना होगा। उन्होंने चेताया कि अगर जल्द बदलाव नहीं हुआ, तो टीवी को फिर से खड़ा करना मुश्किल हो जाएगा।
संदीप सिकंद कौन हैं और किन धारावाहिकों में काम किया है?
संदीप सिकंद हिंदी टेलीविजन के जाने-माने अभिनेता हैं, जिन्होंने 'कहानी घर-घर की', 'अमृत मंथन' और 'बंदिनी' जैसे लोकप्रिय धारावाहिकों में काम किया है। वे दशकों से टेलीविजन उद्योग का हिस्सा हैं।
हिंदी टीवी में क्षेत्रीय रीमेक की समस्या क्या है?
सिकंद के अनुसार हिंदी टीवी की क्षेत्रीय शो पर अत्यधिक निर्भरता एक सीमित रणनीति है, क्योंकि रीमेक के लिए उपलब्ध सामग्री आखिरकार समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे उद्योग की मौलिक रचनात्मकता कमज़ोर पड़ रही है।
टेलीविजन के टैलेंट को लेकर सिकंद की क्या राय है?
सिकंद का मानना है कि टेलीविजन से जुड़े कई प्रतिभाशाली अभिनेता, तकनीशियन और लेखक फिल्मों व ओटीटी के कुछ कंटेंट से बेहतर काम कर सकते हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ टीवी पृष्ठभूमि के कारण उचित अवसर नहीं मिलते।
हिंदी टीवी को बेहतर बनाने के लिए क्या करना होगा?
सिकंद ने उद्योग के सभी हितधारकों से सामूहिक प्रयास की अपील की है। उनके अनुसार आज की महिलाओं और समसामयिक वास्तविकता को केंद्र में रखकर ओरिजिनल कहानियाँ गढ़ना और टैलेंट को उचित मौके देना ही हिंदी टीवी की वापसी का रास्ता है।
राष्ट्र प्रेस
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