संदीप सिकंद बोले — हिंदी टेलीविजन को ओरिजिनल स्टोरीटेलिंग पर लौटना होगा
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता संदीप सिकंद, जिन्होंने 'कहानी घर-घर की', 'अमृत मंथन' और 'बंदिनी' जैसे चर्चित धारावाहिकों में अपनी अभिनय-क्षमता का लोहा मनवाया, ने हिंदी टेलीविजन की मौजूदा दशा पर खुलकर अपनी राय रखी है। मुंबई में हुई एक बातचीत में उन्होंने कहा कि आज हिंदी टीवी की अधिकांश कहानियाँ या तो पश्चिमी शो से या क्षेत्रीय धारावाहिकों से प्रेरित हैं, और यह प्रवृत्ति उद्योग के लिए दीर्घकाल में घातक साबित हो सकती है।
हिंदी टीवी की बदलती तस्वीर
संदीप सिकंद ने कहा, 'हिंदी टेलीविजन बड़े स्टोरीटेलिंग मीडियम में से एक माना जाता है और अनगिनत लोग इसे देखते हैं।' उन्होंने माना कि टीवी ने उन्हें और अनेक लोगों को करियर दिया है, लेकिन साथ ही अफसोस जताया कि एक वक्त जब टीवी में दर्शकों को लुभाने वाली असली कहानियाँ परोसी जाती थीं, वह दौर अब बीत चुका है। उनके अनुसार, 'कई हिंदी शो में कहानी कहने का तरीका अभी भी पुराने दशकों वाला है।'
आज की महिलाओं और असलियत की अनदेखी
सिकंद का मानना है कि हिंदी टीवी आज की महिलाओं, समकालीन परिस्थितियों और वास्तविक जीवन की कहानियों को ठीक से नहीं दिखा रहा। उन्होंने कहा, 'टीवी आज की महिलाओं, आज के हालात और असलियत की कहानियों को ठीक से एक्सप्लोर नहीं कर रहा, जो उसके लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक है।' यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ओटीटी प्लेटफॉर्म पर महिला-केंद्रित और समसामयिक कथाओं को भारी दर्शक-वर्ग मिल रहा है।
क्षेत्रीय रीमेक पर निर्भरता चिंताजनक
अभिनेता ने क्षेत्रीय शो के रीमेक बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'रीजनल शो पर हमारी डिपेंडेंसी भी कम होनी चाहिए। आप कितने रीजनल शो रीमेक कर सकते हैं? वह भी आखिरकार खत्म हो जाएगा। हमें ओरिजिनल स्टोरीटेलिंग पर लौटना होगा।' गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में दक्षिण भारतीय और मराठी धारावाहिकों के हिंदी रूपांतरण की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
टैलेंट को मौके नहीं मिलते
सिकंद ने यह भी रेखांकित किया कि टेलीविजन से जुड़े प्रतिभाशाली कलाकारों, तकनीशियनों और लेखकों को उनकी क्षमता के अनुरूप अवसर नहीं मिलते। उनके शब्दों में, 'टेलीविजन में कई टैलेंटेड एक्टर्स, टेक्नीशियन और स्टोरीटेलर काम कर रहे हैं, जो फिल्मों और ओटीटी पर दिखने वाले कुछ कंटेंट से कहीं बेहतर लिख सकते हैं, लेकिन उन्हें मौके नहीं मिलते क्योंकि वे टेलीविजन से आते हैं।' उन्होंने इसे प्रतिभा के साथ अन्याय बताया।
सामूहिक प्रयास की ज़रूरत
अपनी बात को समेटते हुए संदीप सिकंद ने कहा कि वे खुद भी मौजूदा टीवी कंटेंट से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, 'हमें टेलीविजन को वापस उसके अच्छे दौर में लाना होगा और यह हम सबकी मिलकर की गई मेहनत से होगा।' उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब हिंदी टीवी की टीआरपी लगातार गिर रही है और दर्शक ओटीटी की ओर खिंच रहे हैं। अब देखना होगा कि उद्योग उनकी इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है।