चाहत खन्ना का बड़ा बयान: 'कहानी और क्रिएटिविटी में टीवी OTT-फिल्मों से बहुत पीछे'
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री चाहत खन्ना ने 15 सितंबर 2026 को अभिनेता रोहित रॉय के उस विवादित बयान से आंशिक सहमति जताई, जिसमें उन्होंने भारतीय टेलीविज़न को 'डस्टबिन मीडियम' करार दिया था। चाहत ने स्पष्ट किया कि कहानी और रचनात्मकता के मोर्चे पर टीवी अभी फिल्मों और OTT प्लेटफॉर्म से काफी पीछे है, हालाँकि उन्होंने यह भी कहा कि रोहित का पूरा इंटरव्यू उन्होंने नहीं देखा।
क्या था रोहित रॉय का विवादित बयान
टेलीविज़न के जाने-माने चेहरे रोहित रॉय ने हाल ही में एक इंटरव्यू में टीवी कंटेंट पर कड़ी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि मौजूदा समय में टेलीविज़न पर एक जैसे कॉन्सेप्ट बार-बार दोहराए जाते हैं, अधिकांश शोज़ जल्दी भुला दिए जाते हैं और रचनात्मकता की दृष्टि से यह माध्यम 'डस्टबिन' बन चुका है। यह बयान उद्योग में व्यापक बहस की वजह बना।
चाहत खन्ना की प्रतिक्रिया
चाहत ने खास बातचीत में कहा, 'मैं खुद टीवी से आई हूं और इस माध्यम की बहुत इज्जत करती हूं। टीवी ने मुझे एक अभिनेत्री के तौर पर मज़बूत बनाया है।' उन्होंने बताया कि टेलीविज़न पर अक्सर 12 से 15 घंटे की शूटिंग सामान्य बात होती है, जो एक अभिनेता को अनुशासित और अनुभवी बनाती है।
हालाँकि, रचनात्मकता के सवाल पर चाहत ने माना, 'अगर कहानी और क्रिएटिविटी की बात की जाए तो टीवी को अभी काफी आगे जाने की ज़रूरत है।' उन्होंने कहा कि टीवी का कंटेंट मास ऑडियंस को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है और मेकर्स दर्शकों की डिमांड के हिसाब से चलते हैं — 'यह पूरी तरह बिज़नेस का हिस्सा है।'
निजी करियर का उदाहरण
अपने स्वयं के अनुभव का हवाला देते हुए चाहत ने बताया कि उन्हें कई ऐसे शोज़ के ऑफर मिलते हैं जिनसे वे जुड़ नहीं पातीं। उन्होंने कहा, 'खासतौर पर 'नागिन' जैसे शोज़, जिनसे मैं खुद को कनेक्ट नहीं कर पाती। अगर कोई अभिनेता क्रिएटिव है तो उसके लिए टीवी के कुछ मौजूदा कॉन्सेप्ट से जुड़ना मुश्किल हो सकता है।'
उन्होंने आगे जोड़ा, 'जो चीज़ मुझे पसंद आती है और जिससे मैं खुद जुड़ाव महसूस करती हूं, वही काम करना मेरे लिए ज़्यादा ज़रूरी है।' हालाँकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अगर वे ऐसे प्रोजेक्ट्स से जुड़ पाती तो शायद करियर के लिए चीज़ें और बेहतर होतीं।
टीवी बनाम OTT और फिल्में: बड़ी बहस
यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय मनोरंजन उद्योग में टेलीविज़न और OTT के बीच दर्शकों की प्राथमिकताओं को लेकर बहस तेज़ हो रही है। OTT प्लेटफॉर्म पर कहानी की विस्तृत डिटेलिंग और अलग तरह की क्रिएटिविटी के मुकाबले टेलीविज़न के कंटेंट को बार-बार कमज़ोर माना जाता रहा है। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब किसी जाने-माने टेलीविज़न कलाकार ने ही अपने माध्यम की सीमाओं पर खुलकर बात की हो।
आगे क्या
चाहत खन्ना की यह टिप्पणी उद्योग में टीवी कंटेंट के स्तर को लेकर चल रही चर्चा को और हवा देगी। माना जा रहा है कि टेलीविज़न चैनल और प्रोडक्शन हाउस इस दबाव में नए और अलग कॉन्सेप्ट पर विचार करने के लिए बाध्य होंगे — खासकर तब, जब दर्शक तेज़ी से OTT की ओर शिफ्ट हो रहे हैं।