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चेतन हंसराज का रोहित रॉय के 'डस्टबिन मीडियम' बयान पर पलटवार: 'टीवी एक्टर्स को कमतर नहीं आँकना चाहिए'

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चेतन हंसराज का रोहित रॉय के 'डस्टबिन मीडियम' बयान पर पलटवार: 'टीवी एक्टर्स को कमतर नहीं आँकना चाहिए'

सारांश

रोहित रॉय के 'डस्टबिन मीडियम' वाले बयान ने टीवी बनाम फिल्म की पुरानी बहस को फिर हवा दी है। चेतन हंसराज ने न सिर्फ इसे खारिज किया, बल्कि दावा किया कि टीवी कलाकार बेहतर परफॉर्मर होते हैं — और असली फर्क प्रतिभा का नहीं, बजट और पीआर का है।

मुख्य बातें

अभिनेता रोहित रॉय ने हाल ही में टेलीविज़न को 'डस्टबिन मीडियम' कहा था और टीवी कलाकारों को फिल्म स्टार्स से कमतर बताया था।
चेतन हंसराज ने इस बयान से असहमति जताते हुए कहा कि टीवी को इस तरह देखना सही नहीं है।
चेतन के अनुसार टीवी का रचनात्मक ग्राफ गिरने के लिए निर्माता और चैनल जिम्मेदार हैं, न कि माध्यम स्वयं।
उन्होंने दावा किया कि टीवी कलाकार एक जैसी लाइनें फिल्मी कलाकारों से बेहतर तरीके से निभा सकते हैं।
चेतन जल्द ही नितेश तिवारी निर्देशित 'रामायण' में रणबीर कपूर , साई पल्लवी और यश के साथ नज़र आएँगे।

अभिनेता चेतन हंसराज ने अपने दोस्त और साथी कलाकार रोहित रॉय के उस बयान से खुलकर असहमति जताई है, जिसमें रोहित ने टेलीविज़न को 'डस्टबिन मीडियम' करार दिया था और छोटे पर्दे के कलाकारों को फिल्म स्टार्स की तुलना में कमतर बताया था। चेतन, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत बी.आर. चोपड़ा की ऐतिहासिक श्रृंखला 'महाभारत' में युवा बलराम की भूमिका से की थी, ने स्पष्ट किया कि टेलीविज़न को इस नज़रिए से देखना न्यायसंगत नहीं है।

रोहित रॉय के बयान पर चेतन की सीधी प्रतिक्रिया

चेतन ने कहा, 'रोहित मेरे अच्छे दोस्त हैं, लेकिन सच कहूं तो मुझे नहीं पता कि यह बात कहाँ से आ रही है। टीवी कोई डस्टबिन मीडियम नहीं है।' उन्होंने स्वीकार किया कि टेलीविज़न में रचनात्मकता और विकास के मामले में कुछ ठहराव ज़रूर आया है, लेकिन इसे पूरे माध्यम को नकारने का आधार नहीं बनाया जा सकता। उनके अनुसार, आज भी कई शोज़ में एक जैसी कहानियाँ दिखाई जा रही हैं और कंटेंट में पर्याप्त विविधता नहीं है, जो टीवी के रचनात्मक ग्राफ को नीचे खींच रही है।

प्रोड्यूसर्स और चैनल्स पर जिम्मेदारी

चेतन ने इस स्थिति के लिए निर्माताओं और टीवी चैनल्स को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा, 'अगर मेकर्स नए कंटेंट के साथ प्रयोग करें, तो टीवी के पास आगे बढ़ने की पूरी गुंजाइश है। दर्शक नई तरह की कहानियों के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें वैसा कंटेंट मिल नहीं रहा।' उन्होंने यह भी कहा कि आज भी लाखों दर्शक छोटे पर्दे के शोज़ से जुड़े हैं, जो इस माध्यम की व्यापकता और प्रासंगिकता को सिद्ध करता है।

टीवी कलाकारों की प्रतिभा और गरिमा का बचाव

रोहित रॉय ने टीवी कलाकारों में 'क्लास की कमी' की भी बात कही थी, जिस पर चेतन ने कड़ी असहमति जताई। उन्होंने कहा, 'हर प्रोफेशन में अलग-अलग तरह के लोग होते हैं। बहुत सारे टीवी एक्टर्स हैं जो खुद को पूरी गरिमा के साथ पेश करते हैं। मैं खुद टीवी एक्टर हूँ और मैंने पूरी ज़िंदगी खुद को गरिमा के साथ पेश किया है।' यह ऐसे समय में आया है जब ओटीटी के उदय के बाद टेलीविज़न बनाम अन्य माध्यमों की बहस लगातार तेज़ होती जा रही है।

टीवी कलाकार बेहतर परफॉर्मर: चेतन का दावा

चेतन हंसराज ने एक कदम आगे जाते हुए टीवी कलाकारों की अभिनय क्षमता को फिल्मी कलाकारों से बेहतर तक बताया। उन्होंने तर्क दिया, 'अगर किसी टीवी एक्टर और फिल्म एक्टर को एक जैसी लाइनें दी जाएँ, तो टीवी एक्टर उन्हें ज़्यादा बेहतर तरीके से निभा सकता है।' उनके अनुसार, टेलीविज़न की तेज़ रफ्तार शूटिंग और लगातार काम का दबाव कलाकारों को अधिक कुशल और तत्पर बनाता है। गौरतलब है कि टीवी कलाकारों को कम समय में अपने किरदार को प्रभावशाली ढंग से दर्शकों तक पहुँचाना होता है, जो उनकी अभिनय क्षमता को और पैना बनाता है।

बड़े बजट और पीआर का फर्क

चेतन ने फिल्म और टेलीविज़न की लोकप्रियता के अंतर के पीछे की असली वजह भी उजागर की। उनके मुताबिक, 'फिल्मों में बड़े बजट की वजह से स्टार्स को ज़्यादा पीआर और प्रमोशन मिलता है, जिससे उनकी लोकप्रियता ज़्यादा दिखाई देती है।' उन्होंने स्पष्ट किया कि वे किसी एक पक्ष का साथ नहीं दे रहे, बल्कि अपने बहु-माध्यमी अनुभव के आधार पर एक संतुलित दृष्टिकोण रख रहे हैं। वर्कफ्रंट की बात करें तो चेतन हंसराज जल्द ही निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायण' में नज़र आएँगे, जिसमें रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश जैसे बड़े सितारे मुख्य भूमिकाओं में हैं। यह फिल्म उनके करियर का एक और महत्त्वपूर्ण पड़ाव साबित हो सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो ओटीटी के उभार के बाद और गहरा हुआ है। चेतन की यह बात सही है कि लोकप्रियता का अंतर प्रतिभा का नहीं, बजट और प्रमोशन का परिणाम है — लेकिन यह भी नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता कि दशकों से दोहराई जाने वाली कहानियों ने दर्शकों के एक बड़े वर्ग को टीवी से दूर किया है। असली सवाल यह नहीं कि टीवी कलाकार कमतर हैं या नहीं — असली सवाल यह है कि उन्हें वैसा कंटेंट कब मिलेगा जो उनकी प्रतिभा को सही मंच दे सके।
RashtraPress
14 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रोहित रॉय ने टीवी को 'डस्टबिन मीडियम' क्यों कहा?
रोहित रॉय ने हाल ही में टेलीविज़न को 'डस्टबिन मीडियम' कहा और छोटे पर्दे के कलाकारों को फिल्म स्टार्स की तुलना में कमतर बताया। उन्होंने टीवी कलाकारों में 'क्लास की कमी' की भी बात कही, जिसने इंडस्ट्री में तीखी बहस छेड़ दी।
चेतन हंसराज ने रोहित रॉय के बयान पर क्या कहा?
चेतन हंसराज ने रोहित रॉय के बयान से पूरी तरह असहमति जताई। उन्होंने कहा कि टीवी डस्टबिन मीडियम नहीं है और टीवी कलाकारों को फिल्मी कलाकारों से कमतर नहीं आँकना चाहिए, क्योंकि वे कम समय में बेहतर परफॉर्मेंस देने में सक्षम होते हैं।
चेतन हंसराज ने टीवी के गिरते स्तर के लिए किसे जिम्मेदार बताया?
चेतन ने टीवी के रचनात्मक ग्राफ में गिरावट के लिए निर्माताओं और चैनल्स को जिम्मेदार ठहराया। उनका कहना था कि अगर मेकर्स नए प्रयोग करें तो दर्शक नई कहानियाँ देखने के लिए तैयार हैं।
चेतन हंसराज ने टेलीविज़न से अपने करियर की शुरुआत कैसे की?
चेतन हंसराज ने बी.आर. चोपड़ा की ऐतिहासिक श्रृंखला 'महाभारत' में युवा बलराम का किरदार निभाकर टेलीविज़न में कदम रखा था। इसके बाद उन्होंने छोटे पर्दे से लेकर फिल्मों तक का लंबा सफर तय किया।
चेतन हंसराज की आगामी फिल्म कौन सी है?
चेतन हंसराज जल्द ही निर्देशक नितेश तिवारी की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'रामायण' में नज़र आएँगे। इस फिल्म में रणबीर कपूर, साई पल्लवी और यश जैसे बड़े सितारे मुख्य भूमिकाओं में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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