अंजना सुखानी का खुलासा: हिंदी और रीजनल सिनेमा की स्टोरीटेलिंग में क्यों है ज़मीन-आसमान का फर्क
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री अंजना सुखानी ने हिंदी और रीजनल सिनेमा की कहानी कहने की शैलियों के बीच के गहरे अंतर को उजागर किया है। बॉलीवुड के साथ-साथ दक्षिण भारतीय फिल्म उद्योग में भी सक्रिय रहीं इस अभिनेत्री ने एक विशेष बातचीत में भारतीय सिनेमा की विविधता पर अपने अनुभव साझा किए।
हिंदी बनाम रीजनल: स्टोरीटेलिंग का फर्क
अंजना सुखानी के अनुसार, हिंदी सिनेमा समूचे भारतीय दर्शकों को केंद्र में रखकर फिल्में बनाता है, जबकि रीजनल सिनेमा अपनी स्थानीय संस्कृति, भाषा और परंपराओं में गहरी जड़ें रखता है। उन्होंने कहा, 'हिंदी सिनेमा में स्टोरीटेलिंग स्टाइल रीजनल फिल्म इंडस्ट्री से काफी अलग है। हिंदी सिनेमा में भारतीय ऑडियंस को ध्यान में रखकर काम किया जाता है, जबकि रीजनल सिनेमा में कल्चर, भाषा, खाने की आदतों, स्टोरीटेलिंग से लेकर एक्टिंग करने के फॉर्मेट तक बदल जाते हैं।'
उन्होंने यह भी जोड़ा कि यही विविधता भारत को खूबसूरत बनाती है। एक अभिनेत्री के रूप में वे खुद को भाग्यशाली मानती हैं कि उन्हें हिंदी, पंजाबी, तेलुगु, मराठी, कन्नड़, मलयालम और अन्य कई भाषाओं में काम करने का अवसर मिला।
'मैं वापस आऊंगा' में अहम भूमिका
अंजना सुखानी हाल ही में निर्देशक इम्तियाज अली की फिल्म 'मैं वापस आऊंगा' में नज़र आईं, जो 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई। फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों दोनों की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
इस फिल्म में अंजना ने 'मेहर' का किरदार निभाया, जिसके सर्वाधिक दृश्य दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के साथ हैं। फिल्म में दिलजीत दोसांझ, शरवरी और वेदांग रैना प्रमुख भूमिकाओं में हैं, जबकि बनिता संधू, रजत कपूर, संजय सूरी और दानिश पंडोर सहायक भूमिकाओं में हैं।
फिल्म की कहानी और संगीत
यह फिल्म 1947 के भारत-पाकिस्तान विभाजन की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसमें विभाजन के दौरान बिछड़े प्रेम, यादों और परिवार की भावुक कहानी को आधुनिक समय से जोड़ा गया है।
फिल्म का संगीत ए.आर. रहमान ने तैयार किया है, जबकि गीत इरशाद कामिल ने लिखे हैं — यह जोड़ी फिल्म के भावनात्मक धरातल को और गहरा बनाती है।
भारतीय सिनेमा में अंजना की विरासत
अंजना सुखानी का बहुभाषी करियर उस दौर में और प्रासंगिक हो जाता है जब पैन-इंडिया फिल्मों का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है। उनका यह नज़रिया कि रीजनल सिनेमा की जड़ें उसकी सबसे बड़ी ताकत हैं, उद्योग की उस बहस को भी छूता है जिसमें हिंदी और क्षेत्रीय सिनेमा के बीच के संतुलन पर चर्चा होती रहती है। आने वाले समय में उनकी आगामी परियोजनाओं पर दर्शकों की नज़र बनी रहेगी।