दिव्या दत्ता बोलीं: बॉलीवुड बनाम रीजनल सिनेमा की तुलना गलत, अच्छी कहानी ही असली कसौटी
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री दिव्या दत्ता ने 25 जून 2026 को बॉलीवुड और रीजनल सिनेमा के बीच चल रही तुलना पर खुलकर अपनी राय रखी और कहा कि किसी भी फिल्म इंडस्ट्री को एकांगी नज़रिए से आँकना उचित नहीं है। उनके अनुसार, किसी फिल्म की सफलता का असली पैमाना उसकी भाषा नहीं, बल्कि उसकी कहानी और प्रस्तुति की ताकत है।
मुख्य बात: भाषा नहीं, कंटेंट है असल फर्क
दिव्या दत्ता ने कहा, 'इस तरह की तुलना करना सही नहीं है। किसी भी कॉमेडी फिल्म की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसकी कहानी कितनी मजबूत है और उसे दर्शकों के सामने किस तरह पेश किया गया है। मेरा मानना है कि अगर कंटेंट अच्छा है, तो वह किसी भी भाषा में हो, दर्शकों को जरूर पसंद आता है।' यह विचार ऐसे समय में आया है जब दक्षिण भारतीय और पंजाबी सिनेमा ने हिंदी फिल्मों के मुकाबले बॉक्स ऑफिस पर उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।
इंडस्ट्री को भाषा के आधार पर बाँटना ठीक नहीं
अभिनेत्री ने आगे स्पष्ट किया, 'फिल्म इंडस्ट्री को भाषा के आधार पर बांटना ठीक नहीं है। चाहे फिल्म हिंदी में हो, किसी रीजनल भाषा में हो या फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी हो, अगर कहानी दमदार है और उसे सही तरीके से दिखाया गया है तो वह लोगों के दिलों तक पहुंचती है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज के दर्शक काफी समझदार हो चुके हैं और वे सिर्फ नाम या भाषा देखकर फिल्म को पसंद नहीं करते, बल्कि कंटेंट को प्राथमिकता देते हैं।
'कैरी ऑन जट्टा 4' का उदाहरण
दिव्या दत्ता ने पंजाबी कॉमेडी फिल्म 'कैरी ऑन जट्टा 4' का उदाहरण देते हुए कहा कि यह फिल्म इस बात का प्रमाण है कि अच्छी कॉमेडी हर जगह काम करती है और दर्शकों को हंसाने में सफल रहती है। गौरतलब है कि वह इस फिल्म के ग्रैंड प्रीमियर में भी शामिल हुई थीं, जहाँ उन्होंने फिल्म के कलाकारों के काम की सराहना की।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
फिल्म समीक्षकों का भी मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में रीजनल सिनेमा की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि दर्शक भाषाई सीमाओं से परे जाकर अच्छी कहानियों को अपनाते हैं। 'आरआरआर', 'पुष्पा' और 'कांतारा' जैसी फिल्मों की पैन-इंडिया सफलता इसी सोच को पुष्ट करती है। दिव्या दत्ता का यह बयान इस व्यापक बहस में एक संतुलित और अनुभवी आवाज़ के रूप में सामने आया है।