सीरत कपूर: 'भावनाओं को शब्दों की ज़रूरत नहीं' — दक्षिण भारतीय सिनेमा ने बदला अभिनय का नज़रिया
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेत्री सीरत कपूर ने खुलासा किया है कि दक्षिण भारतीय सिनेमा में काम करने के अनुभव ने उनके अभिनय को एक नई गहराई और परिपक्वता दी। 29 जुलाई को मुंबई में बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के बीच काम करने से उन्हें यह समझ मिली कि भावनाएँ किसी एक भाषा की मोहताज नहीं होतीं।
दक्षिण सिनेमा ने दिया करियर को मज़बूत आधार
सीरत कपूर ने कहा, 'दक्षिण भारतीय फिल्म इंडस्ट्री ने मेरे करियर को एक मज़बूत आधार दिया। अलग-अलग भाषाओं में काम करना मेरे लिए एक चुनौती भी रहा और सीखने का बड़ा मौका भी। इस अनुभव ने मुझे अभिनय में ज़्यादा सहज, परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने वाला और अपने काम के प्रति ईमानदार बनाया। इसने मुझे सिखाया कि भावनाओं को शब्दों की ज़रूरत नहीं होती।'
यह बात ऐसे समय में आई है जब हिंदी सिनेमा के कई कलाकार पैन-इंडिया फिल्मों की ओर रुख कर रहे हैं और दोनों उद्योगों के बीच सहयोग तेज़ी से बढ़ा है। सीरत का यह अनुभव उस व्यापक प्रवृत्ति को रेखांकित करता है जहाँ भाषाई सीमाएँ धुंधली हो रही हैं।
कलाकार के लिए सबसे ज़रूरी क्या
अभिनेत्री ने आज के दौर में कलाकारों के सामने आने वाली चुनौतियों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा, 'किसी कलाकार के लिए सबसे ज़रूरी बात यह है कि उसे सही कारणों से याद रखा जाए। लोकप्रियता और चर्चा कुछ समय के लिए हो सकती है, लेकिन अच्छे काम से मिलने वाला सम्मान लंबे समय तक बना रहता है।'
गौरतलब है कि सोशल मीडिया के दौर में जहाँ त्वरित प्रसिद्धि आसान हो गई है, वहाँ एक अभिनेत्री का यह दृष्टिकोण उनकी कला के प्रति गंभीरता को दर्शाता है।
आगामी फिल्म 'जटस्या मरणम ध्रुवम'
सीरत कपूर जल्द ही फिल्म 'जटस्या मरणम ध्रुवम' में नज़र आने वाली हैं। इस फिल्म में उनके साथ दिग्गज अभिनेता जेडी चक्रवर्ती भी महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। यह फिल्म अगले महीने पाँच भाषाओं में एक साथ रिलीज़ होने वाली है, जो इसे एक बड़ी पैन-इंडिया प्रस्तुति बनाती है।
शूटिंग का मुश्किल अनुभव
सीरत ने इस फिल्म की शूटिंग के दौरान एक कठिन पल भी साझा किया। उन्होंने बताया कि क्लाइमेक्स सीन की शूटिंग के दौरान उनके हाथों में सूजन आ जाने के कारण चूड़ियाँ उतारना मुश्किल हो गया था।
उन्होंने कहा, 'मुझे याद है जब हम फिल्म के आखिरी क्लाइमेक्स सीन की शूटिंग कर रहे थे। मैंने उस सीन के लिए चूड़ियाँ पहनी थीं और शूट पूरा होने के बाद सूजे हुए हाथों की वजह से हम उन्हें निकाल नहीं पाए। टीम की मदद से जैसे-तैसे चूड़ियाँ निकाली गईं।' यह किस्सा उनकी प्रतिबद्धता और फिल्म की शूटिंग की तीव्रता दोनों को उजागर करता है।
फिल्म की रिलीज़ के साथ यह देखना दिलचस्प होगा कि सीरत का यह पैन-इंडिया दांव उनके करियर को नई ऊँचाइयाँ देता है या नहीं।