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प्रीति जिंटा के बॉलीवुड के 28 साल: 'कलाकार पर अच्छे काम का दबाव आज भी वैसा ही है'

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प्रीति जिंटा के बॉलीवुड के 28 साल: 'कलाकार पर अच्छे काम का दबाव आज भी वैसा ही है'

सारांश

28 साल, दो युग और एक सच्चाई — प्रीति जिंटा कहती हैं कि फिल्म कैमरे बदले, साउंड बदला, कहानियाँ NRI रोमांस से देशप्रेम तक पहुंचीं, लेकिन एक चीज़ नहीं बदली: कलाकार पर बेहतरीन प्रदर्शन देने का दबाव आज भी उतना ही है।

मुख्य बातें

प्रीति जिंटा ने 90 के दशक के आखिर में फिल्म 'क्या कहना' से बॉलीवुड में कदम रखा था।
उन्होंने बताया कि 'दिल चाहता है' के साथ लाइव साउंड रिकॉर्डिंग ने डबिंग की परंपरा को बदल दिया।
फिल्म निर्माण में सबसे बड़ा बदलाव तकनीक का रहा — फिल्म कैमरों की जगह डिजिटल कैमरों ने ली।
कहानियों का रुझान NRI प्रेम कहानियों से हटकर भारतीय गौरव, इतिहास और सेना जैसे विषयों की तरफ गया है।
प्रीति के अनुसार एकमात्र अपरिवर्तित तत्व है — कलाकार पर अच्छा काम देने का दबाव ।

अभिनेत्री प्रीति जिंटा ने अपने 28 साल के बॉलीवुड सफर को याद करते हुए कहा कि हिंदी सिनेमा में तकनीक से लेकर कहानियों तक सब कुछ बदल गया है — लेकिन एक चीज़ जो आज भी नहीं बदली, वह है एक कलाकार पर बेहतरीन प्रदर्शन देने का दबाव। मुंबई में दिए एक विशेष साक्षात्कार में उन्होंने 90 के दशक के आखिर से लेकर आज तक के सिनेमाई बदलावों पर खुलकर बात की।

शुरुआती दौर और 'क्या कहना' का अनुभव

प्रीति ने अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद करते हुए कहा, 'मैं खुद को खुशकिस्मत मानती हूं कि मुझे 90 के दशक के आखिर में फिल्मों में आने का मौका मिला। उस समय हिंदी सिनेमा में बदलाव की शुरुआत हो चुकी थी।' उन्होंने बताया कि फिल्म 'क्या कहना' उनके लिए एक अलग और खास अनुभव लेकर आई, क्योंकि उस दौर में उस तरह की कहानी पर्दे पर लाना साहसिक कदम था।

उन्होंने आगे कहा, 'मेरे इंडस्ट्री में आने से पहले भी इस तरह की कहानियों पर फिल्में बन चुकी थीं, लेकिन एक नई अभिनेत्री के रूप में ऐसी फिल्म से शुरुआत करना मेरे लिए बिल्कुल अलग बात थी।'

'दिल चाहता है' और तकनीकी क्रांति

प्रीति ने बताया कि 'क्या कहना' के कुछ ही समय बाद 'दिल चाहता है' आई और फिल्म निर्माण के तरीके में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला। उन्होंने कहा, 'उस फिल्म में लाइव साउंड का इस्तेमाल किया गया, जिससे डबिंग की परंपरा धीरे-धीरे बंद होने लगी।' यह ऐसे समय में आया जब हिंदी सिनेमा वैश्विक दर्शकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहा था।

गौरतलब है कि लाइव साउंड रिकॉर्डिंग की इस तकनीक ने भारतीय अभिनेताओं के प्रशिक्षण और तैयारी के तरीके को भी मौलिक रूप से बदल दिया — अब डायलॉग डिलीवरी और भावनाएं एक साथ, एक ही टेक में कैद करनी होती थीं।

तकनीक का बदलाव: फिल्म कैमरा से डिजिटल तक

प्रीति ने कहा, 'पहले फिल्मों की शूटिंग फिल्म कैमरों से होती थी, लेकिन अब डिजिटल कैमरों ने उनकी जगह ले ली है।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज पोस्ट-प्रोडक्शन में फिल्म को ठीक करने के कई रास्ते उपलब्ध हैं, जो उनके शुरुआती दौर में नहीं थे।

हालांकि, उन्होंने एक महत्वपूर्ण बात रेखांकित की — 'एक चीज़ ऐसी है जो आज भी नहीं बदली है, और वह है कलाकार पर अच्छा काम देने का दबाव।' यह टिप्पणी उस सच्चाई को उजागर करती है कि चाहे माध्यम कितना भी बदल जाए, कलाकार की ज़िम्मेदारी अपरिवर्तित रहती है।

कहानियों का बदलता रुझान: NRI रोमांस से देशप्रेम तक

प्रीति ने बताया कि उनके शुरुआती दौर में विदेश में रहने वाले भारतीयों (NRI) की प्रेम कहानियां परदे पर खूब देखने को मिलती थीं। उस समय कई फिल्में भारतीय परिवारों और विदेशी पृष्ठभूमि के बीच घूमती थीं।

अब यह रुझान बदल गया है। आज भारतीय गौरव, देश का इतिहास और सेना जैसे विषयों पर फिल्में बन रही हैं। कॉमेडी फिल्मों का अंदाज़ भी पहले जैसा नहीं रहा। यह बदलाव दर्शकों की बदलती रुचि और देश में बढ़ते राष्ट्रीय गर्व के भाव को दर्शाता है।

आगे क्या

प्रीति जिंटा का यह साक्षात्कार ऐसे समय में आया है जब बॉलीवुड OTT प्लेटफॉर्म की चुनौती और बदलते दर्शक-वर्ग के बीच अपनी नई पहचान तलाश रहा है। उनके अनुभव और नज़रिए से यह स्पष्ट होता है कि इंडस्ट्री के दिग्गज कलाकार भी इस परिवर्तन को न केवल महसूस कर रहे हैं, बल्कि उसे समझने और स्वीकार करने में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल बना रहता है कि क्या यह बदलाव दर्शकों की स्वाभाविक रुचि है या बाज़ार और नीतिगत दबावों का परिणाम — और इस पर बहस होनी चाहिए।
RashtraPress
9 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रीति जिंटा ने बॉलीवुड में कब और किस फिल्म से शुरुआत की थी?
प्रीति जिंटा ने 90 के दशक के आखिर में फिल्म 'क्या कहना' से बॉलीवुड में कदम रखा था। उन्होंने इस फिल्म को एक नई अभिनेत्री के रूप में अपने करियर की खास और अलग शुरुआत बताया है।
प्रीति जिंटा के अनुसार बॉलीवुड में सबसे बड़ा तकनीकी बदलाव क्या आया?
प्रीति जिंटा के अनुसार सबसे बड़ा बदलाव फिल्म कैमरों की जगह डिजिटल कैमरों का आना है। इसके साथ ही 'दिल चाहता है' से शुरू हुई लाइव साउंड रिकॉर्डिंग ने डबिंग की परंपरा को भी बदल दिया।
प्रीति जिंटा के अनुसार बॉलीवुड की कहानियों में क्या बदलाव आया है?
उनके शुरुआती दौर में NRI प्रेम कहानियाँ और विदेशी पृष्ठभूमि की फिल्में प्रमुख थीं। अब फिल्मों का ध्यान भारतीय गौरव, देश के इतिहास और सेना जैसे विषयों की तरफ अधिक हो गया है।
प्रीति जिंटा का कहना है कि बॉलीवुड में क्या नहीं बदला?
प्रीति जिंटा का कहना है कि चाहे तकनीक कितनी भी बदल जाए, एक कलाकार पर अच्छा काम देने का दबाव आज भी उतना ही है जितना 28 साल पहले था। यह उनके लिए इंडस्ट्री का सबसे स्थायी सच है।
'दिल चाहता है' का बॉलीवुड पर क्या प्रभाव पड़ा?
'दिल चाहता है' ने हिंदी सिनेमा में लाइव साउंड रिकॉर्डिंग की शुरुआत की, जिससे डबिंग की परंपरा धीरे-धीरे खत्म होने लगी। प्रीति जिंटा के अनुसार यह फिल्म निर्माण के तरीके में एक बड़े बदलाव का प्रतीक बनी।
राष्ट्र प्रेस
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