क्या रानी मुखर्जी ने हिंदी सिनेमा में 30 साल पूरे होने पर अपने करियर का सफर साझा किया?

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क्या रानी मुखर्जी ने हिंदी सिनेमा में 30 साल पूरे होने पर अपने करियर का सफर साझा किया?

सारांश

बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री रानी मुखर्जी ने अपने 30 साल के करियर पर भावनाओं और अनुभवों का साझा किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने कभी भी फिल्म इंडस्ट्री में एक मास्टर प्लान नहीं बनाया और अपने करियर के दौरान मिली सीखों के बारे में खुलकर बात की।

Key Takeaways

  • रानी मुखर्जी ने 30 सालों में सिनेमा में कई महत्वपूर्ण किरदार निभाए हैं।
  • उन्होंने साबित किया कि महिलाएं स्क्रीन पर विविधता से भरे किरदार निभा सकती हैं।
  • उनकी यात्रा ने यह दिखाया है कि मेहनत और समर्पण से सफलता पाई जा सकती है।
  • रानी ने अपने करियर में कई नेशनल अवॉर्ड्स जीते हैं।
  • उन्होंने समाज में महिलाओं के अधिकारों को उजागर किया।

मुंबई, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री रानी मुखर्जी ने आज हिंदी सिनेमा में अपने 30 साल पूरे कर लिए हैं। इस अवसर पर उन्होंने अपने अनुभवों और भावनाओं को साझा किया। रानी ने सोमवार को यश राज फिल्म्स के इंस्टाग्राम हैंडल पर एक नोट साझा किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्होंने फिल्मों की दुनिया में कभी कोई मास्टर प्लान नहीं बनाया था।

उन्हें यह रास्ता अपने आप मिला और उन्होंने हमेशा उस नई लड़की की तरह महसूस किया, जो पहली बार कैमरे के सामने खड़ी होती है और यह सोचती है कि क्या वह सही जगह पर है।

रानी ने कहा, ''जब मैंने 1997 में 'राजा की आएगी बारात' से अपने करियर की शुरुआत की थी, तब मुझे यह नहीं पता था कि अभिनय में कैसा करियर बन सकता है। उस समय एक्टिंग मुझे जिंदगी में जीवंत महसूस कराती थी। इस फिल्म ने मुझे यह पहला और बड़ा सबक सिखाया कि सिनेमा केवल ग्लैमर के लिए नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी के लिए है। मैंने उस किरदार के माध्यम से सीखा कि महिलाओं के लिए गरिमा की लड़ाई को दिखाना कितना महत्वपूर्ण है, और यह अनुभव मेरे भविष्य के अभिनय को आकार देने वाला साबित हुआ।''

रानी ने 1990 के दशक के अंत को अपने लिए 'जादुई' बताया। उन्होंने कहा, ''उस समय दर्शकों ने मेरे करियर की दिशा तय की। उन फिल्मों ने मुझे अवसर दिए, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण यह था कि मैंने उस वक्त यह समझा कि हिंदी सिनेमा लोगों के दिलों में कितना गहराई से बसा हुआ है। उस दौर के सेट पर मेरा समय सीखने और आनंद से भरा रहा। मैंने कई मेंटर्स और सहयोगियों से मार्गदर्शन और प्रेरणा प्राप्त की।''

2000 के दशक के शुरुआती वर्षों में रानी ने अपने अभिनय की पहचान और आवाज ढूंढी। उन्होंने कहा, '''साथिया' मेरे करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जिसमें मैंने एक दोषपूर्ण, भावुक और सहज महिला का किरदार निभाया। मुझे पर्दे पर परफेक्ट बनने की इच्छा नहीं थी, बल्कि ईमानदार और वास्तविक अभिनय करने की चाह थी। इसी सोच ने 'हम तुम' जैसी फिल्मों की ओर अग्रसर किया, और यह दिखाया कि महिलाएं स्क्रीन पर हास्यपूर्ण और संवेदनशील सभी भावों को साथ लेकर चल सकती हैं।''

फिर आई 'ब्लैक', जिसने उनके अभिनय के बारे में उनके विश्वास को पूरी तरह बदल दिया। रानी ने कहा, ''संजय लीला भंसाली और अमिताभ बच्चन के साथ काम करना मुझे अपनी छिपी हुई संभावनाओं तक ले गया। यह अनुभव अनुशासन, समर्पण और साहस मांगता था। 'ब्लैक' मेरे जीवन का एक अत्यधिक भावनात्मक अनुभव बना और इसने मुझे सिखाया कि कभी-कभी मौन भाव भी शब्दों से भी अधिक बोल सकता है।''

रानी ने कहा कि उन्हें हमेशा ऐसी महिलाओं के किरदारों ने आकर्षित किया जो समाज को चुनौती देती हैं। इसमें 'बंटी और बबली', 'नो वन किल्ड जेसिका', और 'मर्दानी' जैसी फिल्में शामिल हैं। खास तौर पर 'मर्दानी' मेरे दिल के बहुत करीब है, क्योंकि शिवानी शिवाजी रॉय का किरदार शांति से शक्ति दिखाता है और यह दिखाता है कि कठिन लेकिन आशावादी कहानियां कितनी प्रभावशाली हो सकती हैं।''

रानी ने कहा, ''शादी और बेटी अदीरा ने मुझे धीमा होने नहीं दिया, बल्कि मेरे फोकस को तेज किया। मैंने ज्यादा समझदारी से फिल्मों का चयन करना शुरू किया और अपनी ऊर्जा तो बचाए रखी। इसके बाद 'हिचकी' और 'मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे' जैसी फिल्मों ने संवेदनशीलता और भावनात्मक सच्चाई की गहराई समझाई। 'मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे' ने मुझे पहला नेशनल अवॉर्ड दिलाया।''

Point of View

बल्कि समाज में महिलाओं की महत्वपूर्ण भूमिकाओं को भी उजागर किया। उनकी यात्रा यह दर्शाती है कि मेहनत और समर्पण से किसी भी क्षेत्र में सफलता पाई जा सकती है।
NationPress
12/01/2026

Frequently Asked Questions

रानी मुखर्जी ने कब अपने करियर की शुरुआत की?
रानी मुखर्जी ने 1997 में 'राजा की आएगी बारात' से अपने करियर की शुरुआत की।
रानी मुखर्जी के कौन से किरदार समाज को चुनौती देते हैं?
रानी मुखर्जी के किरदार जैसे 'बंटी और बबली', 'नो वन किल्ड जेसिका', और 'मर्दानी' समाज को चुनौती देते हैं।
रानी मुखर्जी को कौन सा पुरस्कार मिला?
रानी मुखर्जी को 'मिसेज चटर्जी वर्सेस नॉर्वे' के लिए पहला नेशनल अवॉर्ड मिला।
रानी मुखर्जी का सबसे महत्वपूर्ण फिल्म कौन सी है?
'साथिया' को रानी मुखर्जी के करियर का एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जाता है।
रानी मुखर्जी ने अपने करियर में क्या सीखा?
रानी मुखर्जी ने अपने करियर में सीखा कि सिनेमा केवल ग्लैमर के लिए नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी के लिए भी है।
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