क्या ग्रीन हाइड्रोजन में भारतीय और जर्मन कंपनियों का नया मेगा प्रोजेक्ट गेम-चेंजर साबित होगा?
सारांश
Key Takeaways
- भारत और जर्मनी का ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट भविष्य की ऊर्जा का स्रोत बन सकता है।
- यह सुरक्षित और विश्वसनीय सप्लाई चेन का निर्माण करेगा।
- दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश में वृद्धि होगी।
- यह नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देगा।
- इससे नौकरी के नए अवसर उत्पन्न होंगे।
गांधीनगर, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की उपस्थिति में भारत-जर्मनी के बीच एक महत्वपूर्ण मेगा प्रोजेक्ट का उल्लेख किया। सोमवार को गांधीनगर के महात्मा मंदिर कनवेंशन और एग्जिबिशन सेंटर में हुई द्विपक्षीय वार्ता के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के बीच हुए विभिन्न समझौतों की महत्व पर प्रकाश डाला।
प्रधानमंत्री ने स्वामी विवेकानंद की जयंती का जिक्र करते हुए कहा, "स्वामी विवेकानंद जयंती के दिन चांसलर मर्ज का भारत में स्वागत करना मेरे लिए विशेष प्रसन्नता का कारण है। यह एक सुखद संयोग है कि स्वामी विवेकानंद जी ने भारत और जर्मनी के बीच दर्शन, ज्ञान और आत्मा का सेतु स्थापित किया था। आज चांसलर मर्ज की यह यात्रा उसी सेतु को नई ऊर्जा, नया विश्वास और विस्तार प्रदान कर रही है। चांसलर के रूप में यह उनकी भारत के साथ ही एशिया की पहली यात्रा है, जो इस बात का मजबूत प्रमाण है कि वे भारत के साथ संबंधों को कितना महत्व देते हैं।"
पीएम मोदी ने इस यात्रा को मील का पत्थर बताते हुए कहा कि भारत और जर्मनी की अर्थव्यवस्थाओं के बीच करीबी सहयोग पूरी मानवता के लिए महत्वपूर्ण है। व्यापार और निवेश के बढ़ते संबंधों ने हमारी स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप को नई ऊर्जा दी है। हमारा द्विपक्षीय व्यापार अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुँच चुका है और 50 बिलियन डॉलर को पार कर गया है। दो हजार से अधिक जर्मन कंपनियां लंबे समय से भारत में मौजूद हैं, जो भारत के प्रति उनके अटूट विश्वास और यहाँ मौजूद अनंत संभावनाओं को दर्शाता है। आज सुबह भारत-जर्मनी सीईओ फोरम में इसकी स्पष्ट झलक दिखाई दी।
प्रधानमंत्री ने उन समझौतों और सहयोग की बात की जो दोनों देशों के बीच हैं। बोले, "भारत और जर्मनी के बीच तकनीकी सहयोग प्रति वर्ष मजबूत हुआ है और आज इसका प्रभाव जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में भारत और जर्मनी की प्राथमिकताएं समान हैं। इसमें सहयोग को बढ़ाने के लिए हमने इंडिया–जर्मनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का निर्णय लिया है। यह नॉलेज, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन का साझा मंच बनेगा। हम जलवायु, ऊर्जा, शहरी विकास और शहरी गतिशीलता जैसे क्षेत्रों में मिलकर नई परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं।"
पीएम मोदी ने उस मेगा प्रोजेक्ट की चर्चा की जो दोनों देशों के लिए गेम चेंजर साबित होगा। उन्होंने कहा, "ग्रीन हाइड्रोजन में दोनों देशों की कंपनियों का नया मेगाप्रोजेक्ट भविष्य की ऊर्जा के लिए एक गेम चेंजर साबित होगा। भारत और जर्मनी सुरक्षित, विश्वसनीय और लचीले सप्लाई चेन निर्माण के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। इन सभी विषयों पर आज किए जा रहे एमओयू से हमारे सहयोग को नई गति और मजबूती मिलेगी।"
पीएम मोदी ने रक्षा उद्योग के रोडमैप पर भी बात की। उन्होंने कहा कि रक्षा और सुरक्षा में बढ़ता सहयोग हमारे आपसी भरोसे और साझी सोच का प्रतीक है। रक्षा व्यापार से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के लिए मैं चांसलर मर्ज का दिल से आभार व्यक्त करता हूँ। हम रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए एक रोडमैप पर भी काम करेंगे, जिससे को-डेवलपमेंट और को-प्रोडक्शन के नए अवसर खुलेंगे।
प्रधानमंत्री ने आम लोगों के बीच बने रिश्ते पर भी प्रकाश डाला। रवींद्रनाथ टैगोर और मैडम कामा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, भारत और जर्मनी के बीच ऐतिहासिक और गहरे पीपल-टू-पिपल संबंध हैं। रवींद्रनाथ टैगोर की रचनाओं ने जर्मनी के बौद्धिक जगत को नई दृष्टि दी। स्वामी विवेकानंद की विचारधारा ने जर्मनी सहित पूरे यूरोप को प्रेरित किया, और मैडम कामा ने जर्मनी में पहली बार भारत की आजादी का ध्वज फहराकर, हमारी स्वतंत्रता की आकांक्षा को वैश्विक पहचान दी। आज हम इस ऐतिहासिक जुड़ाव को आधुनिक साझेदारी का रूप दे रहे हैं।"
भारत के कौशल को महत्वपूर्ण बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, "माइग्रेशन, मोबिलिटी और स्किलिंग बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया है। भारत की प्रतिभाशाली युवाशक्ति जर्मनी की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। आज ग्लोबल स्किल्स पार्टनरशिप पर जारी ज्वाइंट डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट इसी भरोसे का प्रतीक है। इससे विशेष रूप से स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों की आवाजाही आसान होगी। आज हमने खेलों के क्षेत्र में भी सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। यह युवाओं को जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम बनेगा।"
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, "आज उच्च शिक्षा पर बने कॉम्प्रिहेंसिव रोडमैप शिक्षा के क्षेत्र में हमारी साझेदारी को नई दिशा देगा। मैं जर्मन विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस खोलने का आमंत्रण देता हूँ। भारतीय नागरिकों के लिए वीजा-फ्री ट्रांजिट की घोषणा के लिए मैं चांसलर मर्ज का आभार व्यक्त करता हूँ। इससे दोनों देशों के लोगों के बीच नज़दीकियां और बढ़ेंगी। मुझे खुशी है कि गुजरात के लोथल में बनाए जा रहे नेशनल मेरीटाइम हेरिटेज कॉम्पलेक्स से जर्मन मेरीटाइम म्यूजियम जुड़ रहा है। यह दोनों देशों की मैरिटाइम को जोड़ने वाला ऐतिहासिक कदम है। पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय का जर्मनी के साथ करीबी सहयोग रहा है। इस महत्वपूर्ण विषय पर आज किए जा रहे एमओयू से हमारे सहयोग को और अधिक बल मिलेगा।